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लैंड टू लैंड सेटलमेंट पुनर्वास की योजना

Thu, 09 Oct 2014 05:33 AM IST
Rudraprayag
Rudraprayag Updated Thu, 09 Oct 2014 05:33 AM IST
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गुप्तकाशी। शासन ने केदारनाथ मंदिर के इर्द-गिर्द सरस्वती और मंदाकिनी नदी से घिरे क्षेत्र को केदारपुरी माना है। शासन का ध्यान केदारपुरी को सुरक्षित करने और पुनर्निर्माण पर है। पहले सुरक्षा कार्य हाेंगे। जबकि पुनर्निर्माण तीर्थ पुरोहितों को मनाने के बाद हो पाएगा।
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गुप्तकाशी में योजना की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने बताया कि सरकार का प्रथम प्रयास चौराबाड़ी तालाब और नदियों से धाम को सुरक्षित करना है। फिलहाल धाम में नदियों से सुरक्षा के लिए अस्थायी दीवार बनाई गई हैं। इनके स्थान पर तीन लेयर में प्रोटेक्शन वाल (चोराबाड़ी तालाब से मंदिर के पीछे तक) का निर्माण होगा।
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उन्होंने बताया कि केदारपुरी पुनर्निर्माण महत्वपूर्ण इश्यू है। केदारनाथ मंदिर से आगे 10 मीटर छोड़कर दो हेक्टेअर भूमि उपलब्ध है। इस पर जीएसआई की रिपोर्ट की सिफारिश के आधार पर पुनर्निर्माण हो सकता है। पहले यहां 330 भवन थे। वर्तमान में 213 भवन खडे़ हैं। इसमें कुछ ठीक ठाक हैं और कुछ डैमेज हैं। इन भवनों से लगभग 735 परिवार जुडे़ हैं। इस भूमि में लैंड टू लैंड और बिल्डिंग टू बिल्डिंग पुनर्वास होगा। संबंधित तीर्थ पुरोहितों को भूमि और भवन का मुआवजा मिलेगा। किसी स्थान पर भूमि कम पड़ने पर शेष भूमि दूसरे स्थान में दी जाएगी। निर्माण का खर्चा भी सरकार उठाएगी।
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हालांकि तीर्थ पुरोहितों के साथ सहमति न बन पाने के कारण एसीएस ने इस प्लान में हल्का फेरबदल की बात कही। उन्होंने अपने साथ लाए मैप और डिजायन को पहले तीर्थ पुरोहितों को देने की बात कही थी, लेकिन तीर्थ पुरोहितों के रुख को देखते हुए इसे देने से मना करते हुए अगले हफ्ते नई डिजायन देने की बात कही है।
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