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उद्यान संगोष्ठी के नाम पर फिजूलखर्ची
Rudraprayag
Updated Thu, 20 Feb 2014 05:30 AM IST
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रुद्रप्रयाग। हम गांव की अनपढ़ महिलाएं हैं। हमें क्या पता हार्मोन या प्रोटीन क्या है। यदि विभाग को हमें कुछ बताना है, तो खेतों में चलकर काम कर दिखाएं। आज तक गांव में कोई वैज्ञानिक नहीं आया। यह शब्द हैं उद्यान विभाग की एक दिवसीय उद्यान संगोष्ठी में नारायणकोटी से पहुंची नर्मदा देवी के।
बुधवार को जिला उद्यान विभाग की तरफ से जिला मुख्यालय के गुलाबराय मैदान में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर के हार्टीकल्चर के विशेषज्ञ भी बुलाए गए थेे। गोष्ठी में ग्रामीणों को लाने के लिए उद्यान विभाग द्वारा वाहनों की व्यवस्था की गई। यहां खाने की भी व्यवस्था थी। गोष्ठी के लिए दो लाख का बजट रखा गया था।
गोष्ठी में विशेषज्ञों के भाषण चलते रहे। केंद्रीय विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डा. डीके राणा, डा. जगमोहन और डा. पारुल ने फ्लोरीकल्चर, कलम लगाने, फल-सब्जियों के रोगों और पौध लगाने के तरीके बताए। लेकिन प्रयोग के बजाय मंच से भाषण के कारण ग्रामीणों ने इसमें दिलचस्पी कम दिखाई। कोई पंचायत चुनाव की चर्चा में मशगूल था, कोई धूप सेक रहा था। सब्जी उत्पादन के रुप में प्रसिद्ध नारायणकोटी गांव से आए लोग उद्यान विभाग की कार्यप्रणाली से नाराज दिखे। प्रताप सिंह, रघुवीर और रुप सिंह ने इसे फिजूलखर्ची बताया। उन्होंने कहा कि यहां सिर्फ बातें की जा रही हैं। विभाग समय पर बीज और खाद नहीं दे रहा है। गोष्ठी में बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं। आलू का बीज तब आया, जब सबने बीज रोप दिया। जिला उद्यान अधिकारी एससी मिश्रा का कहना था कि गोष्ठी में विशेषज्ञ जानकारी देंगे। इसमें डेमोस्ट्रेशन और प्रेक्टिकल का कोई प्रावधान नहीं है। काश्तकारों को लिटरेचर बांटा गया है।
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बुधवार को जिला उद्यान विभाग की तरफ से जिला मुख्यालय के गुलाबराय मैदान में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर के हार्टीकल्चर के विशेषज्ञ भी बुलाए गए थेे। गोष्ठी में ग्रामीणों को लाने के लिए उद्यान विभाग द्वारा वाहनों की व्यवस्था की गई। यहां खाने की भी व्यवस्था थी। गोष्ठी के लिए दो लाख का बजट रखा गया था।
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गोष्ठी में विशेषज्ञों के भाषण चलते रहे। केंद्रीय विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डा. डीके राणा, डा. जगमोहन और डा. पारुल ने फ्लोरीकल्चर, कलम लगाने, फल-सब्जियों के रोगों और पौध लगाने के तरीके बताए। लेकिन प्रयोग के बजाय मंच से भाषण के कारण ग्रामीणों ने इसमें दिलचस्पी कम दिखाई। कोई पंचायत चुनाव की चर्चा में मशगूल था, कोई धूप सेक रहा था। सब्जी उत्पादन के रुप में प्रसिद्ध नारायणकोटी गांव से आए लोग उद्यान विभाग की कार्यप्रणाली से नाराज दिखे। प्रताप सिंह, रघुवीर और रुप सिंह ने इसे फिजूलखर्ची बताया। उन्होंने कहा कि यहां सिर्फ बातें की जा रही हैं। विभाग समय पर बीज और खाद नहीं दे रहा है। गोष्ठी में बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं। आलू का बीज तब आया, जब सबने बीज रोप दिया। जिला उद्यान अधिकारी एससी मिश्रा का कहना था कि गोष्ठी में विशेषज्ञ जानकारी देंगे। इसमें डेमोस्ट्रेशन और प्रेक्टिकल का कोई प्रावधान नहीं है। काश्तकारों को लिटरेचर बांटा गया है।
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