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ऋषिकेश -कर्णप्रयाग रेल लाइन पर 2029 में दौड़ने लगेगी रेल-compat
Updated Wed, 01 Aug 2018 10:46 PM IST
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रुद्रप्रयाग। 126 किमी लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना का निर्माण 2029 में पूरा हो जाएगा। आरवीएनएल ने रेल लाइन निर्माण की प्रारंभिक कार्रवाई शुरू कर दी है। रुद्रप्रयाग में तिलणी, सुमेरपुर और नगरासू में बतौर रेलव स्टेशन के साइन बोर्ड लगा दिए गए हैं। 2019 तक परियोजना के तहत दो पुलों का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
रेलवे विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा 16216 करोड़ की लागत की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत जिलों में अधिग्रहित की गई भूमि का सीमांकन शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार अधिग्रहित की गई भूमि का 90 फीसदी मुआवजा दिया जा चुका है, इसलिए अब रेलवे भूमि अपने कब्जे में ले रहा है। साथ ही जिन स्थानों पर काश्तकारों द्वारा भूमि पर फसल बोई गई है, वहां, फसल कटान के बाद सीमांकन कर दिया जाएगा, ताकि आगे काश्तकार यहां फसल न बोएं।
आरवीएनएल के अधिकारियों के अनुसार 2020 से रेल लाइन पर प्रस्तावित सुरंगों का निर्माण कार्य एजेंसियों द्वारा शुरू कर दिया जाएगा। भारत सरकार द्वारा आरवीएनएल को 2029 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। पहले चरण में वीरभद्र-न्यू ऋषिकेश रेलवे लाइन विकसित की जा रही है। अंडर ब्रिज रोड, ओवर ब्रिज रोड और चंद्रभागा नदी पर पुल का निर्माण जोरों पर है। अगले वर्ष के शुरू तक इस पुल का कार्य पूरा होने की उम्मीद है। कर्णप्रयाग के निकट कालेश्वर में सिवाई स्टेशन के लिए प्रस्तावित पुल का डिजायन लगभग तैयार हो चुका है। पुल निर्माण की निविदाएं आमंत्रित भी कर दी गई हैं। गौचर-रानो, धारी देवी, शिवपुरी में बनने वाले पुलों का डिजायन भी तैयार किया जा रहा है। इन स्थानों पर निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए एप्रोच रोड बनाई जा रही हैं। 126 किमी लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर 16 पुलों व 16 सुरंगों का निर्माण होना है। साथ ही 12 स्टेशनों का निर्माण होना है। रेल लाइन का 85 फीसदी हिस्सा यानी 105 किमी भूमिगत है।
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इनका कहना है --
अधिग्रहित की गई भूमि का सीमांकन कर प्रस्तावित स्टेशनों पर साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं। पुलों के निर्माण के लिए जरूरी औपचारिकताएं त्वरित गति से निस्तारित की जा रही हैं। 2029 तक रेल लाइन बनकर तैयार हो जाएगी।
-बीपी बडोगा, डीजीएम (प्रोजेक्ट), आरवीएनएल
रेलवे विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा 16216 करोड़ की लागत की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत जिलों में अधिग्रहित की गई भूमि का सीमांकन शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार अधिग्रहित की गई भूमि का 90 फीसदी मुआवजा दिया जा चुका है, इसलिए अब रेलवे भूमि अपने कब्जे में ले रहा है। साथ ही जिन स्थानों पर काश्तकारों द्वारा भूमि पर फसल बोई गई है, वहां, फसल कटान के बाद सीमांकन कर दिया जाएगा, ताकि आगे काश्तकार यहां फसल न बोएं।
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आरवीएनएल के अधिकारियों के अनुसार 2020 से रेल लाइन पर प्रस्तावित सुरंगों का निर्माण कार्य एजेंसियों द्वारा शुरू कर दिया जाएगा। भारत सरकार द्वारा आरवीएनएल को 2029 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। पहले चरण में वीरभद्र-न्यू ऋषिकेश रेलवे लाइन विकसित की जा रही है। अंडर ब्रिज रोड, ओवर ब्रिज रोड और चंद्रभागा नदी पर पुल का निर्माण जोरों पर है। अगले वर्ष के शुरू तक इस पुल का कार्य पूरा होने की उम्मीद है। कर्णप्रयाग के निकट कालेश्वर में सिवाई स्टेशन के लिए प्रस्तावित पुल का डिजायन लगभग तैयार हो चुका है। पुल निर्माण की निविदाएं आमंत्रित भी कर दी गई हैं। गौचर-रानो, धारी देवी, शिवपुरी में बनने वाले पुलों का डिजायन भी तैयार किया जा रहा है। इन स्थानों पर निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए एप्रोच रोड बनाई जा रही हैं। 126 किमी लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर 16 पुलों व 16 सुरंगों का निर्माण होना है। साथ ही 12 स्टेशनों का निर्माण होना है। रेल लाइन का 85 फीसदी हिस्सा यानी 105 किमी भूमिगत है।
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इनका कहना है --
अधिग्रहित की गई भूमि का सीमांकन कर प्रस्तावित स्टेशनों पर साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं। पुलों के निर्माण के लिए जरूरी औपचारिकताएं त्वरित गति से निस्तारित की जा रही हैं। 2029 तक रेल लाइन बनकर तैयार हो जाएगी।
-बीपी बडोगा, डीजीएम (प्रोजेक्ट), आरवीएनएल