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निलंबन के विरोध में आमरण अनशन पर बैठा वन दरोगा
Updated Fri, 03 Aug 2018 10:45 PM IST
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गुप्तकाशी। चोपता, दुगलबिट्टा, बनियाकुंड में हुए अवैध अतिक्रमण के मामले में निलंबित चल रहे केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के वन दरोगा रघुवीर सिंह पंवार ने बीते बृहस्पतिवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया है। वन दरोगा ने अकारण उन्हें फंसाए जाने का आरोप लगाया है।
रेंज कार्यालय गुप्तकाशी में अनशन पर बैठे रघुवीर सिंह पंवार का कहना है कि बिना किसी जांच के विभाग व प्रशासन द्वारा उन्हें निलंबित किया गया है। उन्होंने तहसीलदार ऊखीमठ जयवीर राम बधाणी और वन पंचायत सरपंच मक्कूमठ पर निशाना साधते हुए अकारण मामले में फंसाने का आरोप भी लगाया है। कहा कि उनके क्षेत्र में कोई अवैध अतिक्रमण नहीं है। बावजूद उन्हें मोहरा बनाकर दोषियों को बचाने की साजिश की गई है। कहा कि जब, तक उन्हें उचित न्याय नहीं मिलता वह आंदोलनरत रहेंगे। कहना है कि उनका निलंबित आदेश 28 जून को जारी किया गया था, लेकिन उन्हें एक माह बाद 28 जुलाई को यह पत्र मिला है। साथ ही उन्होंने कहा कि वन पंचायत सरपंच मक्कूमठ द्वारा क्षेत्र में 2500 रुपये तक की रसीदें जारी की गई हैं। जबकि सरपंच को सिर्फ 500 रुपये तक रसीद जारी करने का अधिकार है। आरोप लगाया कि वन पंचायत सरपंच की अतिक्रमण कराने में बड़ी भूमिका रही है। इधर, रेंजर राजेंद्र प्रसाद डिमरी का कहना है कि वन दरोगा के मामले में कार्रवाई ऊपरी स्तर पर हुई है। रेंज स्तर पर जो भी तथ्य मिले हैं, उसमें पंवार पूरी तरह से निर्दोष पाए गए हैं।
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रेंज कार्यालय गुप्तकाशी में अनशन पर बैठे रघुवीर सिंह पंवार का कहना है कि बिना किसी जांच के विभाग व प्रशासन द्वारा उन्हें निलंबित किया गया है। उन्होंने तहसीलदार ऊखीमठ जयवीर राम बधाणी और वन पंचायत सरपंच मक्कूमठ पर निशाना साधते हुए अकारण मामले में फंसाने का आरोप भी लगाया है। कहा कि उनके क्षेत्र में कोई अवैध अतिक्रमण नहीं है। बावजूद उन्हें मोहरा बनाकर दोषियों को बचाने की साजिश की गई है। कहा कि जब, तक उन्हें उचित न्याय नहीं मिलता वह आंदोलनरत रहेंगे। कहना है कि उनका निलंबित आदेश 28 जून को जारी किया गया था, लेकिन उन्हें एक माह बाद 28 जुलाई को यह पत्र मिला है। साथ ही उन्होंने कहा कि वन पंचायत सरपंच मक्कूमठ द्वारा क्षेत्र में 2500 रुपये तक की रसीदें जारी की गई हैं। जबकि सरपंच को सिर्फ 500 रुपये तक रसीद जारी करने का अधिकार है। आरोप लगाया कि वन पंचायत सरपंच की अतिक्रमण कराने में बड़ी भूमिका रही है। इधर, रेंजर राजेंद्र प्रसाद डिमरी का कहना है कि वन दरोगा के मामले में कार्रवाई ऊपरी स्तर पर हुई है। रेंज स्तर पर जो भी तथ्य मिले हैं, उसमें पंवार पूरी तरह से निर्दोष पाए गए हैं।
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