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बमकांड को साल बीता, तुषार को नहीं मिला इंसाफ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेहताब आलम
Updated Sat, 05 Dec 2015 11:15 PM IST
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तारीख: छह दिसंबर 2014, दिन शनिवार, समय: सुबह 11:25 मिनट। शहर की कृष्णानगर कालोनी में सतीश धीमान को उनके पड़ोसी प्रेम धीमान घबराई आवाज में घर के बाहर बुलाते हैं। खाना बीच मेें छोड़कर सतीश दूसरी मंजिल से जैसे ही नीचे गली में पहुंचते हैं, छठी में पढ़ने वाले बेटे तुषार के चोट लगने पर अस्पताल में भर्ती होने की बात सुनकर उनका दिल बैठने लगता है।
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आनन फानन में सिविल अस्पताल पहुंचने पर पुलिस उन्हें मोर्चरी की ओर ले जाने लगी तो कदम खुद ब खुद भारी होने लगते हैं। बेटे का लहूलुहान शव देखकर तो जैसे सतीश की आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है। तुषार के परिवार समेत पूरे रुड़की शहर को झकझोर देने वाले बम कांड को रविवार को एक साल पूरा हो गया। अभी तक पुलिस, एटीएस व एनआईए की जांच बेनतीजा रही है।
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साल भर में परिवार की आंखों से न आंसू ही सूखे और न इंसाफ की आस खत्म हुई। तुषार मां किरन धीमान आज भी उस मनहूस घड़ी को कोसती है, जब उन्होंने छह दिसंबर के दिन तुषार को अपने हाथों से तैयार कर स्कूल भेजा था। लौटते वक्त बम धमाके ने हमेशा के लिए उनका लाल छीन लिया। वहीं तुषार के साथ ही राजकीय इंटर कालेज में पढ़ने वाले बड़े भाई विशाल को उस दिन छोटे के साथ स्कूल न जा पाने का मलाल है।
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पहली बरसी पर परिवार का गम ताजा होने के साथ ही उस दिन का पूरा मंजर आंखों के सामने तैर रहा है। शनिवार को घर में परिवार के सदस्य एक दूसरे को संभालने के लिए ऊपर से हंसने बोलने की कोशिश करते तो नजर आए, लेकिन तुषार का चेहरा आंखों के सामने आने पर बहते आंसुओं का वह नहीं रोक पाए। तुषार का फोटो निहारते हुए पिता सतीश कुमार कहते हैं कि परिवार को इंसाफ उसी दिन मिलेगा, जब तुषार के हत्यारों को सजा मिलेगी।
जांच एजेंसियों का तरीका भी ‘सरकारी’
पुलिस से लेकर एटीएस व एनआईए समेत जांच करने वाली एजेंसियां सरकारी होने पर जांच का अंदाज भी ‘सरकारी’ निकला। घटना के बाद कई राज्यों की एटीएस टीमों ने मौका ए वारदात का मुआयना किया। फरवरी 2015 में बम धमाके की जांच एनआईए को ट्रांसफर कर दी गई।
इसके बाद से एनआईए की टीम कई बार रुड़की आकर छानबीन कर चुकी है। लेकिन, राज से पर्दा नहीं उठ पाया। हालांकि जांच जारी होने पर परिवार को एक न एक दिन खुलासे की उम्मीद है। वहीं एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल का कहना है कि फरवरी के बाद बम कांड की जांच एनआईए की टीम कर रही है। टीम यहां कई बार संदिग्धों से भी पूछताछ कर चुकी है।
पहले संवेदनाओं का मेला, अब सूनापन
परिवार के मुताबिक उनके घर पर संवेदना जताने के लिए दो महीने तक पुलिस प्रशासन, राजनेताओं, सामाजिक संगठनों का मेला लगा रहा। लेकिन, उसके बाद कोई अधिकारी तो दूर जनप्रतिनिधियों ने भी आकर नहीं देखा। मुख्यमंत्री की ओर से लगाई गई घोषणाओं की झड़ी सिर्फ 10 लाख और एक अदद गेट ही बनवा पाई। नौकरी का वायदा भी सरकार पूरा नहीं कर पाई। जबकि बेटे के गम में उनकी प्राइवेट नौकरी भी चली गई।
आज श्रद्धांजलि देगा परिवार
तुषार की याद में कालोनी के बाहर बने प्रवेश द्वार पर श्रद्धांजलि दी जाएगी। परिवार ने बताया कि विश्वकर्मा समिति की ओर से हो रहे कार्यक्रम में कुछ लोगों को उन्होंने निमंत्रण दिया है, बाकी जो लोग आने चाहें वह खुद आ सकते हैं।