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Uraine Crisis : बॉर्डर पार करने की मारामारी, तीन दिन की इंतजारी, रुड़की के छात्र ने बताए हालात

Fri, 04 Mar 2022 01:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 04 Mar 2022 01:33 AM IST
सार

घर लौटे शुभम ने साझा किए अनुभव, कहा- यूक्रेन की सेना अपने लोगों को दे रही तरजीह। एक घंटे में केवल 10 से 15 लोग निकाल रहे, भारत की एंबेसी की ओर से दी गईं सुविधाएं।

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The student who came home from Ukraine told how difficult it was to cross the border
रोमानिया से लौटते छात्र... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रोमानिया बॉर्डर पार करने के लिए भारतीय छात्रों को भारी जद्दोजहद का सामना करना पड़ रहा है। यहां व्यवस्थाएं ध्वस्त हैं। छात्रों की लाइन तक नहीं लग रही है। छात्रों का हुजूम बॉर्डर पार करने के लिए मारामारी कर रहा है। इसके चलते एक घंटे में दस से 15 छात्रों को ही एंट्री मिल पा रही है। यह कहना है कि रुड़की लौटे छात्र शुभम चौहान का। वहीं, तेलपुरा लौटे आफताब का गांव के लोगों ने स्वागत किया। साथ ही एसडीएम भी उनसे मिलने पहुंचे। आफताब ने भारत सरकार से खारकीव में फंसे अपने दोस्तों को निकालने की अपील की है। 

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रुड़की के आदर्श नगर निवासी शुभम चौहान यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी यूनिवर्सिटी कीव से 650 किमी दूर है। उन्होंने बताया कि वे 25 फरवरी को ही हॉस्टल से निकल गए थे। 28 फरवरी को सुबह एंट्री के लिए उनका नंबर आया। उन्होंने बताया कि बॉर्डर पर व्यवस्थाएं ध्वस्त हैं। यूक्रेन की सेना बॉर्डर पार कराने में काफी समय लगा रही है। इसके पीछे का कारण यह भी है कि वे अपने लोगों को तरजीह दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि बॉर्डर पार करने के बाद किसी तरह की समस्या नहीं है। भारतीय एंबेसी की ओर से सभी तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं। 
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खानेपीने के अलावा कपड़े भी मुहैया कराए जा रहे हैं। घर पहुंचने पर आसपास के लोगों और परिवार के लोगों में उत्साह है। वहीं, बुग्गावाला क्षेत्र के तेलपुरा निवासी आफताब आजम भी सुरक्षित घर लौट आए हैं। उन्होंने खारकीव में फंसे अपने दोस्तों को लेकर चिंता जाहिर की है और सरकार से उनकी सुरक्षित वापसी की अपील की है। उन्होंने हंगरी बॉर्डर से वापसी की है, जो कि उनकी यूनिवर्सिटी से करीब 25 किमी दूर है। घर लौटने पर पूरे गांव में खुशी का माहौल है। एसडीएम बृजेश तिवारी ने भी उन्हें घर पहुंचकर शुभकामनाएं दी हैं। 
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चालक की सूझबूझ से महज पांच किमी पैदल चले 
शुभम चौहान ने बताया कि जो गाड़ी उन्होंने किराये पर की थी, उसके चालक सूझबूझ से गाड़ी चलाई और लंबी लाइन के बीच से होते हुए बॉर्डर से महज पांच किमी दूर उतारा। इसके चलते उन्हें अन्य छात्रों के मुकाबले कम पैदल दूरी तय करनी पड़ी। 

घर लौटा मंगलौर का एक छात्र, तीन रोमानिया में 
मंगलौर। यूक्रेन में फंसा मंगलौर का एक और छात्र घर लौट आया जबकि तीन अन्य छात्र हंगरी पहुंच चुके हैं। इनके भी शुक्रवार तक भारत वापसी की संभावना जताई जा रही है।

बृहस्पतिवार को मोहल्ला किला निवासी मोहम्मद राहिम घर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि पांच दिनों से वह रोमानिया बॉर्डर पर फंसे थे। इस दौरान उन्हें काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ा। घर पहुंचने पर छात्र राहिम का परिजनों ने स्वागत किया और भारत सरकार का आभार जताया। छात्र के पिता नदीम ने बताया कि वह लगातार सरकार से छात्र की सकुशल वापसी के लिए प्रयासरत थे। 

इसके अलावा यूक्रेन में फंसे मोहल्ला मलकपुरा निवासी अरीब अंसारी, लहबोली निवासी नूर आलम और गदरजुड्डा निवासी शुभम देशवाल बृहस्पतिवार को यूक्रेन से निकलकर हंगरी पहुंच चुके हैं। छात्रों ने अपने परिजनों को बताया कि हंगरी में वह एक होटल में रुके हैं। जैसे ही दूतावास की ओर से उन्हें फ्लाइट के बारे में अवगत कराया जाएगा वह एयरपोर्ट जाएंगे। अरीब के पिता जमीर हसन अंसारी ने बताया कि तीनों छात्रों के शुक्रवार देर शाम तक दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचने की संभावना है। 


लक्सर के चार छात्र सकुशल यूक्रेन से निकले
यूक्रेन में एमबीबीएस कर रहे लक्सर के चारों छात्र सकुशल बाहर निकल आए हैं। दो छात्र अभी रोमानिया में हैं जबकि तीसरे ने पोलैंड में और चौथे छात्र ने हंगरी में शरण ली है। यूक्रेन में खराब हालात को देखते हुए परिजन बेहद चिंतित थे। यूक्रेन के खारकीव में रह रहे आदर्श नगर निवासी आशुतोष बुधवार रात पोलैंड में और अकोट डाकला निवासी देवानिक पोल्टावा से निकलकर हंगरी में शरण ले चुके हैं। सिधडू गांव निवासी देवासी देवांश और लक्सर निवासी परमेश्वर कीव से निकलकर रोमानिया में शरण ले चुके हैं। यूक्रेन की सीमा से बाहर निकलने के बाद छात्रों के परिजनों ने राहत की सांस ली है। 

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