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मिलावटी तेल बेचने पर दो साल की सजा
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मिलावटी तेल के मामले में दुकानदार को 15 साल बाद दो साल की सजा सुनवाई गई है। सजा न्यायिक मजिस्ट्रेट रुड़की प्रथम कोर्ट में सुनाई गई है। यह सैंपल 2004 में मंगलौर बाजार में दुकान से लेकर जांच के लिए भेजे गए थे।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि 2004 में खाद्य निरीक्षक चरण सिंह ने मंगलौर में एक दुकान पर छापेमारी की थी। यहां पर तेल में बड़े स्तर पर गड़बड़ी करने की शिकायत मिल रही थी। मौके प पहुंची टीम ने दुकानदार राकेश कुमार की दुकान से एक तेल का सैंपल लिया था। इस तेल को मिलावटी रंगों का प्रयोग होने का अंदेशा होने के कारण जांच के लिए लैब में भेजा गया था। यह सैंपल जांच में पूरी तरह से फेल हो गया था, लेकिन जांच रिपोर्ट आने तक खाद्य निरीक्षक चरण सिंह का स्थानांतरण हो गया था। इस कारण महिमा नंद जोशी की ओर से कोर्ट में वाद दायर किया गया था। इसमें दोनों पक्षों की ओर से अपना-अपना पक्ष रखा गया। मामले की पैरवी कर रहे खाद्य सुरक्षा अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट रुड़की प्रथम में मामले की सुनवाई की जा रही थी। इसमें न्यायिक मजिस्ट्रेट रुड़की प्रथम विशाल वशिष्ठ ने दुकानदार राकेश कुमार को दोषी मानते हुए दो साल की सजा व पांच हजार का जुर्माना लगाया है।
... इधर सोडावाटर का नमूना फेल होने पर जुर्माना
न्यायिक मजिस्ट्रेट रुड़की प्रथम की कोर्ट ने सोडावाटर का नमूना फेल होने पर दुकानदार पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। सोडावाटर का सैंपल वर्ष 2000 में लिया गया था।
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खाद्य सुरक्षा अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि 2000 में खाद्य निरीक्षक चित्ररंजन कुमार ने नारसन में दुकानदार राजेंद्र की दुकान पर छापा मारा था। उस दौरान जांच में सोडावाटर पर चस्पा की गई लिस्ट में स्क्रीन को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई थी। जबकि शिकायत थी कि सोडावाटर में स्क्रीन मिली हुई है। इसके चलते सोडावाटर का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में सोडावाटर में स्क्रीन की मात्रा मिलने की पुष्टि हुई थी। इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट रुड़की प्रथम कोर्ट में वाद दायर किया था। खाद्य सुरक्षा अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट रुड़की प्रथम विशाल वशिष्ठ के द्वारा दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाया है। इसमें दुकानदार राजेंद्र को दोषी मानते हुए उसपर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
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खाद्य सुरक्षा अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि 2004 में खाद्य निरीक्षक चरण सिंह ने मंगलौर में एक दुकान पर छापेमारी की थी। यहां पर तेल में बड़े स्तर पर गड़बड़ी करने की शिकायत मिल रही थी। मौके प पहुंची टीम ने दुकानदार राकेश कुमार की दुकान से एक तेल का सैंपल लिया था। इस तेल को मिलावटी रंगों का प्रयोग होने का अंदेशा होने के कारण जांच के लिए लैब में भेजा गया था। यह सैंपल जांच में पूरी तरह से फेल हो गया था, लेकिन जांच रिपोर्ट आने तक खाद्य निरीक्षक चरण सिंह का स्थानांतरण हो गया था। इस कारण महिमा नंद जोशी की ओर से कोर्ट में वाद दायर किया गया था। इसमें दोनों पक्षों की ओर से अपना-अपना पक्ष रखा गया। मामले की पैरवी कर रहे खाद्य सुरक्षा अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट रुड़की प्रथम में मामले की सुनवाई की जा रही थी। इसमें न्यायिक मजिस्ट्रेट रुड़की प्रथम विशाल वशिष्ठ ने दुकानदार राकेश कुमार को दोषी मानते हुए दो साल की सजा व पांच हजार का जुर्माना लगाया है।
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... इधर सोडावाटर का नमूना फेल होने पर जुर्माना
न्यायिक मजिस्ट्रेट रुड़की प्रथम की कोर्ट ने सोडावाटर का नमूना फेल होने पर दुकानदार पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। सोडावाटर का सैंपल वर्ष 2000 में लिया गया था।
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खाद्य सुरक्षा अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि 2000 में खाद्य निरीक्षक चित्ररंजन कुमार ने नारसन में दुकानदार राजेंद्र की दुकान पर छापा मारा था। उस दौरान जांच में सोडावाटर पर चस्पा की गई लिस्ट में स्क्रीन को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई थी। जबकि शिकायत थी कि सोडावाटर में स्क्रीन मिली हुई है। इसके चलते सोडावाटर का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में सोडावाटर में स्क्रीन की मात्रा मिलने की पुष्टि हुई थी। इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट रुड़की प्रथम कोर्ट में वाद दायर किया था। खाद्य सुरक्षा अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट रुड़की प्रथम विशाल वशिष्ठ के द्वारा दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाया है। इसमें दुकानदार राजेंद्र को दोषी मानते हुए उसपर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।