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Roorkee News: रागी-सिंघाड़े के बिस्कुट ने बनाया मंजू को आत्मनिर्भर
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कभी घर की चहारदीवारी तक सीमित रहने वाली मंजू क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की बल्कि कई अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया। मंजू की ओर से तैयार किए जा रहे रागी और सिंघाड़े के बिस्कुट देहरादून समेत कई शहरों में भेजे जा रहे हैं। उनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
मंजू बताती हैं कि एक समय उनके परिवार के पास रहने के लिए छोटा सा घर था और अब अपने बूते उसे नया विस्तार दिया है। वर्ष 2018 में महिला समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बदलाव शुरू हुआ। समूह की बैठकों और गतिविधियों में भाग लेने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ना शुरू किया।
उन्होंने रुड़की में भगवती महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया और वर्ष 2025 में बेकरी का कार्य शुरू किया। वर्तमान में समूह से 10 महिलाएं जुड़ी हैं। गुणवत्ता बनाए रखने के कारण उत्पाद की लागत अधिक होने से बाजार विस्तार में चुनौतियां हैं लेकिन ऑर्डर लगातार बढ़ रहे हैं। लागत और अन्य खर्च निकालने के बाद समूह को प्रतिमाह करीब 30 हजार रुपये की बचत हो रही है। मंजू कहती हैं कि मेहनत और सामूहिक प्रयास से महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर परिवार और समाज में नई पहचान स्थापित कर सकती हैं।
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मंजू बताती हैं कि एक समय उनके परिवार के पास रहने के लिए छोटा सा घर था और अब अपने बूते उसे नया विस्तार दिया है। वर्ष 2018 में महिला समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बदलाव शुरू हुआ। समूह की बैठकों और गतिविधियों में भाग लेने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ना शुरू किया।
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उन्होंने रुड़की में भगवती महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया और वर्ष 2025 में बेकरी का कार्य शुरू किया। वर्तमान में समूह से 10 महिलाएं जुड़ी हैं। गुणवत्ता बनाए रखने के कारण उत्पाद की लागत अधिक होने से बाजार विस्तार में चुनौतियां हैं लेकिन ऑर्डर लगातार बढ़ रहे हैं। लागत और अन्य खर्च निकालने के बाद समूह को प्रतिमाह करीब 30 हजार रुपये की बचत हो रही है। मंजू कहती हैं कि मेहनत और सामूहिक प्रयास से महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर परिवार और समाज में नई पहचान स्थापित कर सकती हैं।
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