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Roorkee News: धान की फसल में यूरिया डालने के बाद भी फसल का रंग पीला
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धान की फसल में पहली उर्वरक की खुराक में खाली यूरिया डालने से फसल को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। खाद डालने के बावजूद भी धान के पौधों का रंग पीला ही बना हुआ है। कृषि विशेषज्ञ फसल को हरा-भरा रखने के लिए यूरिया के साथ सूक्ष्म पोषक तत्व डालने की सलाह दे रहे हैं।
झबरेड़ा, इकबालपुर और लखनौता क्षेत्र में खरीफ की मुख्य फसल धान की रोपाई का काम अंतिम चरण में चल रहा है। बासमती की प्रजातियों की रोपाई क्षेत्र में बीस, 25 दिन पूर्व शुरू कर दी गई थी। 20 दिन पहले रोपाई वाले खेत में पहली खाद डालने का समय अब चल रहा है। कुछ किसान जानकारी के अभाव में पहली खाद के रूप में केवल यूरिया का प्रयोग कर रहे हैं।
खाली यूरिया से किसानों की फसल को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। खाद डालने के बाद भी फसल का रंग गाढ़ा हरा नहीं बन पाया है। इसको लेकर किसान चिंतित है। कृषि विशेषज्ञ व पूर्व कृषि सहायक विकास अधिकारी राजबीर सिंह ने बताया कि धान की फसल में पहली खाद रोपाई के 15 से 25 दिन बाद डाली जाती है। पहली खाद में यूरिया की साथ जिंक सल्फेट, फेरस सल्फेट मैग्नीशियम सल्फेट मिलाकर डालना चाहिए।
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इससे कल्ले ज्यादा फूटेंगे और नतीजतन उत्पादन भी बढ़ जाएगा। धान की फसल में सूक्ष्म पोषक तत्वों की बहुत जरूरत पड़ती है। बासमती धान की फसल में बीमारी जल्दी लगती है। किसानों को बासमती लगे खेतों पर जाकर पौधों की पत्तियों की निगरानी करते रहना चाहिए। शरबती और मोटे धान में बीमारी बहुत कम लगती है।
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झबरेड़ा, इकबालपुर और लखनौता क्षेत्र में खरीफ की मुख्य फसल धान की रोपाई का काम अंतिम चरण में चल रहा है। बासमती की प्रजातियों की रोपाई क्षेत्र में बीस, 25 दिन पूर्व शुरू कर दी गई थी। 20 दिन पहले रोपाई वाले खेत में पहली खाद डालने का समय अब चल रहा है। कुछ किसान जानकारी के अभाव में पहली खाद के रूप में केवल यूरिया का प्रयोग कर रहे हैं।
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खाली यूरिया से किसानों की फसल को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। खाद डालने के बाद भी फसल का रंग गाढ़ा हरा नहीं बन पाया है। इसको लेकर किसान चिंतित है। कृषि विशेषज्ञ व पूर्व कृषि सहायक विकास अधिकारी राजबीर सिंह ने बताया कि धान की फसल में पहली खाद रोपाई के 15 से 25 दिन बाद डाली जाती है। पहली खाद में यूरिया की साथ जिंक सल्फेट, फेरस सल्फेट मैग्नीशियम सल्फेट मिलाकर डालना चाहिए।
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इससे कल्ले ज्यादा फूटेंगे और नतीजतन उत्पादन भी बढ़ जाएगा। धान की फसल में सूक्ष्म पोषक तत्वों की बहुत जरूरत पड़ती है। बासमती धान की फसल में बीमारी जल्दी लगती है। किसानों को बासमती लगे खेतों पर जाकर पौधों की पत्तियों की निगरानी करते रहना चाहिए। शरबती और मोटे धान में बीमारी बहुत कम लगती है।