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बुर्के में चार संदिग्धों ने उड़ाए पुलिस के होश
ब्यूरो, अमर उजाला/रुड़की
Updated Sat, 23 Jan 2016 12:09 AM IST
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रुड़की। शहर के पॉश इलाके में शुक्रवार दोपहर दिखे चार संदिग्धों ने पुलिस की नींद उड़ा दी है। सूचना फ्लैश होने के बाद जगह-जगह नाकेबंदी भी की गई। लेकिन शहर के बीच बाजार से चारों का यह पता नहीं चला कि वह कहां गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चारों ने बुर्के में मास्क पहन रखा था। इनमें दो पुरुष और दो महिलाएं थीं।
रुड़की में सुबह दिल्ली से आई आईबी स्पेशल ब्रांच की टीम आतंक की साजिश रचने में गिरफ्तार किए गए चार में से दो युवकों से पड़ताल कर रही थी। उसी बीच चार अन्य संदिग्धों ने स्थानीय पुलिस की नींद उड़ा दी। दोपहर करीब दो बजे जादूगर रोड पर सेंटेंस सेंक डरी स्कूल की छुट्टी हुई थी। तभी स्कूल के बाहर आई लड़कियों ने चार संदिग्धों को देखा। इनमें दो अलग-अलग युगल शामिल थे। सभी ने काला बुर्का पहन हुआ था। चारों की गतिविधियां संदिग्ध होने पर लड़कियों ने काफी देर तक उन्हें वॉच किया। इस पर संदिग्धों ने अभद्र कमेंट किए और वहां से गायब हो गए। लड़कियों के अनुसार बुर्के के अंदर भी संदिग्धों ने मास्क पहना हुआ था। इससे उनकी केवल आंखें दिख रही थी। तभी किसी ने सिविल लाइंस कोतवाली पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने तुरंत सूचना फ्लैश कर दी। उसके बाद शहर की नाकेबंदी शुरू हो गई। लेकिन घंटों खोजबीन के बाद भी बुर्काधारियों का पता नहीं चल पाया।
बेटियों के वेश में छिपे संदिग्धों को बेटियों ने पहचाना
विनोद कुमार सिंह
रुड़की। जहां हम लोग छोटी-छोटी घटनाओं को नजरअंदाज कर मुंह मोड़ लेते हैं वहीं समाज की यह बेटियां लोगों के लिए मिसाल हैं जो बुर्के में मास्क लगाए संदिग्धों को देखकर न घबराई और न सहमी बल्कि पुलिस को तत्काल सूचना दी। छात्राओं के इस जज्बे और हौसले का पुलिस ने भी लोहा माना।
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जादूगर रोड पर बुर्के में मास्क पहने चार संदिग्ध स्कूल के बाहर मंडरा रहे थे। लेकिन किसी का ध्यान इनकी ओर नहीं गया। बेटियों ने ही बुर्के में छिपे पुरुषों को पहचाना। इतना ही नहीं लगातार उन पर नजर रखते हुए बुर्के में छिपे मास्क को भी देखा। उसके बाद भी यह बेटियां सहमी नहीं। उन्होंने तत्काल पहले ट्रैफिक पुलिस को इसकी जानकारी दी। फिर सिविल लाइंस कोतवाली पहुंच कोतवाली प्रभारी योगेंद्र पाल सिंह भदौरिया को विस्तार से जानकारी दी। हालांकि इससे पहले पुलिस ने वायरलेस सेट पर सूचना फ्लैश कर दी थी। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर शहर में नाकेबंदी की गई। सिविल लाइंस कोतवाली प्रभारी भी धरपकड़ के लिए निकले लेकिन चारों संदिग्ध कहां चले गए। इसका किसी को भी पता नहीं चला। पुलिस अधिकारियों का भी कहना है कि आम आदमी की मदद से ही आतंकी घटनाओं को नाकाम किया जा सकता है। उन्होंने छात्राओं के प्रयास की सराहना की।
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रुड़की में सुबह दिल्ली से आई आईबी स्पेशल ब्रांच की टीम आतंक की साजिश रचने में गिरफ्तार किए गए चार में से दो युवकों से पड़ताल कर रही थी। उसी बीच चार अन्य संदिग्धों ने स्थानीय पुलिस की नींद उड़ा दी। दोपहर करीब दो बजे जादूगर रोड पर सेंटेंस सेंक डरी स्कूल की छुट्टी हुई थी। तभी स्कूल के बाहर आई लड़कियों ने चार संदिग्धों को देखा। इनमें दो अलग-अलग युगल शामिल थे। सभी ने काला बुर्का पहन हुआ था। चारों की गतिविधियां संदिग्ध होने पर लड़कियों ने काफी देर तक उन्हें वॉच किया। इस पर संदिग्धों ने अभद्र कमेंट किए और वहां से गायब हो गए। लड़कियों के अनुसार बुर्के के अंदर भी संदिग्धों ने मास्क पहना हुआ था। इससे उनकी केवल आंखें दिख रही थी। तभी किसी ने सिविल लाइंस कोतवाली पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने तुरंत सूचना फ्लैश कर दी। उसके बाद शहर की नाकेबंदी शुरू हो गई। लेकिन घंटों खोजबीन के बाद भी बुर्काधारियों का पता नहीं चल पाया।
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बेटियों के वेश में छिपे संदिग्धों को बेटियों ने पहचाना
विनोद कुमार सिंह
रुड़की। जहां हम लोग छोटी-छोटी घटनाओं को नजरअंदाज कर मुंह मोड़ लेते हैं वहीं समाज की यह बेटियां लोगों के लिए मिसाल हैं जो बुर्के में मास्क लगाए संदिग्धों को देखकर न घबराई और न सहमी बल्कि पुलिस को तत्काल सूचना दी। छात्राओं के इस जज्बे और हौसले का पुलिस ने भी लोहा माना।
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जादूगर रोड पर बुर्के में मास्क पहने चार संदिग्ध स्कूल के बाहर मंडरा रहे थे। लेकिन किसी का ध्यान इनकी ओर नहीं गया। बेटियों ने ही बुर्के में छिपे पुरुषों को पहचाना। इतना ही नहीं लगातार उन पर नजर रखते हुए बुर्के में छिपे मास्क को भी देखा। उसके बाद भी यह बेटियां सहमी नहीं। उन्होंने तत्काल पहले ट्रैफिक पुलिस को इसकी जानकारी दी। फिर सिविल लाइंस कोतवाली पहुंच कोतवाली प्रभारी योगेंद्र पाल सिंह भदौरिया को विस्तार से जानकारी दी। हालांकि इससे पहले पुलिस ने वायरलेस सेट पर सूचना फ्लैश कर दी थी। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर शहर में नाकेबंदी की गई। सिविल लाइंस कोतवाली प्रभारी भी धरपकड़ के लिए निकले लेकिन चारों संदिग्ध कहां चले गए। इसका किसी को भी पता नहीं चला। पुलिस अधिकारियों का भी कहना है कि आम आदमी की मदद से ही आतंकी घटनाओं को नाकाम किया जा सकता है। उन्होंने छात्राओं के प्रयास की सराहना की।