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किसानों के हितों को लेकर उतर प्रदेश से पिछड़ रही प्रदेश सरकार
Updated Fri, 18 May 2018 12:08 AM IST
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रुड़की। उत्तर प्रदेश की अपेक्षा किसानों की कर्जमाफी और गेहूं के बोनस के साथ ही अन्य सौगातें देने के मामले में उत्तराखंड सरकार फिसड्डी साबित हो रही है। इस मामले में यूपी सरकार बड़े भाई की तरह नजर आ रही है। यहां योगी सरकार ने किसानों के हित में कई अहम निर्णय लिए हैं।
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में एक साथ सरकार के गठन के बाद भी उत्तराखंड सरकार फैसले लेने के मामले में सुस्त दिख रही है। दोनों प्रदेशों में भाजपा का घोषणा पत्र करीब एक जैसा होने के बावजूद किसानों को फसलों का उचित मूल्य देने के साथ-साथ कर्जमाफी के मामले में त्रिवेंद्र सरकार अब तक कोई ठोस पहल कदमी नहीं कर पाई है। यही वजह है कि किसान संगठन आए दिन धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
किसान संगठनों का कहना है कि सरकार बनने के बाद जहां उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को कर्जमाफी की सौगात दे चुकी हैं, वहीं त्रिवेंद्र सरकार कर्जमाफी करने को सिरे से नकार चुकी है। किसानों का कहना है कि यूपी सरकार जहां न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ ही अपने किसानों को दस रुपये बोनस देने की घोषणा कर चुकी हैं, वहीं उत्तराखंड में इस वर्ष भी न्यूनतम समर्थन मूल्य तक घोषित नहीं किया गया।
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...तो गन्ना मूल्य भी मिल रहा किसानों को कम
त्रिवेंद्र सरकार का दावा है कि वह अपने गन्ना किसानों को उत्तर प्रदेश से एक रुपये प्रति क्विंटल अधिक दे रही हैं, लेकिन यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो यह भी प्रदेश के किसानों को कम मिल रहा हैं। जहां उत्तर प्रदेश में किसानों को तोल केंद्र से मिल तक गन्ना ढुलाई का शुल्क प्रति किलोमीटर और या फिर अधिकतम नौ रुपये क्विंटल देना पड़ रहा है, वहीं प्रदेश में यह ग्यारह रुपये क्विंटल ही े है। ऐसे में प्रदेश के किसानों को गन्ने का मूल्य एक रुपये कम ही मिल रहा है।
किसानों को सस्ते ऋण की सौगात
त्रिवेंद्र सरकार जहां गन्ने और बोनस आदि को लेकर पिछड़ रही है, वहीं सरकार ने किसानों को सस्ते ऋण उपलब्ध कराने के लिए पंडित दीनदयाल के नाम से योजना शुरू की है। इस मामले में वह कमोबेश आगे है।
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उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में एक साथ सरकार के गठन के बाद भी उत्तराखंड सरकार फैसले लेने के मामले में सुस्त दिख रही है। दोनों प्रदेशों में भाजपा का घोषणा पत्र करीब एक जैसा होने के बावजूद किसानों को फसलों का उचित मूल्य देने के साथ-साथ कर्जमाफी के मामले में त्रिवेंद्र सरकार अब तक कोई ठोस पहल कदमी नहीं कर पाई है। यही वजह है कि किसान संगठन आए दिन धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
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किसान संगठनों का कहना है कि सरकार बनने के बाद जहां उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को कर्जमाफी की सौगात दे चुकी हैं, वहीं त्रिवेंद्र सरकार कर्जमाफी करने को सिरे से नकार चुकी है। किसानों का कहना है कि यूपी सरकार जहां न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ ही अपने किसानों को दस रुपये बोनस देने की घोषणा कर चुकी हैं, वहीं उत्तराखंड में इस वर्ष भी न्यूनतम समर्थन मूल्य तक घोषित नहीं किया गया।
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...तो गन्ना मूल्य भी मिल रहा किसानों को कम
त्रिवेंद्र सरकार का दावा है कि वह अपने गन्ना किसानों को उत्तर प्रदेश से एक रुपये प्रति क्विंटल अधिक दे रही हैं, लेकिन यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो यह भी प्रदेश के किसानों को कम मिल रहा हैं। जहां उत्तर प्रदेश में किसानों को तोल केंद्र से मिल तक गन्ना ढुलाई का शुल्क प्रति किलोमीटर और या फिर अधिकतम नौ रुपये क्विंटल देना पड़ रहा है, वहीं प्रदेश में यह ग्यारह रुपये क्विंटल ही े है। ऐसे में प्रदेश के किसानों को गन्ने का मूल्य एक रुपये कम ही मिल रहा है।
किसानों को सस्ते ऋण की सौगात
त्रिवेंद्र सरकार जहां गन्ने और बोनस आदि को लेकर पिछड़ रही है, वहीं सरकार ने किसानों को सस्ते ऋण उपलब्ध कराने के लिए पंडित दीनदयाल के नाम से योजना शुरू की है। इस मामले में वह कमोबेश आगे है।