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विज्ञान में रुचि बढ़ाने के लिए प्रयोगात्मक दृष्टि अपनाना जरूरी
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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
सीबीआरआई रुड़की में जिज्ञासा कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय विद्यालय संगठन, रुड़की के चार मंडलों के भौतिक विज्ञान के स्नातकोत्तर शिक्षकों के लिए एक शिक्षक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें व्याख्यान के जरिए शिक्षकों को विज्ञान क्षेत्र में सीएसआईआर और सीबीआरआई की नवीनतम तकनीकियों से भी रूबरू कराया गया।
संस्थान के निदेशक डॉ. एन गोपालकृष्णन ने शिक्षकों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। सभी प्रतिभागियों ने संस्थान के रूरल पार्क, अग्नि अनुसंधान, पर्यावरण विज्ञान प्रौद्योगीकी, भवन दक्षता आदि प्रयोगशालाओं का दौरा किया। संस्थान के वैज्ञानिकों से वार्तालाप में अपने संशयों को दूर किया। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एलपी सिंह ने भवनों में नैनो प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग, नैनो तकनीक द्वारा कंक्रीट को मॉडिफाई करने और भवनों में लोडिंग क्षमता को अनुकूलित करने के विषय में जानकारी दी। संस्थान के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं जिज्ञासा कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अतुल कुमार अग्रवाल ने कहा कि आमतौर पर विद्यार्थी विज्ञान विषय को अन्य विषयों की तुलना में नीरस मानते हैं। शिक्षण में पाठ्य चर्चा के दौरान नीरसता को कम करने के लिए शिक्षकों को विज्ञान पर आधारित चुटकुलों आदि से माहौल को जीवंत बनाने का प्रयास करना चाहिए। इस कार्यक्रम में केंद्रीय विद्यालय देहरादून, जम्मू, लखनऊ और जयपुर क्षेत्र के लगभग 40 भौतिक विज्ञान के स्नातकोत्तर शिक्षकों तथा प्रधानाचार्य विपिन त्यागी ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर आरएस चिमोटे, डॉ. रजनी लखानी, डॉ. एलपी सिंह, चंदन स्वरुप मीणा, नरेश गुप्ता, पलक गोयल, दिलशाद, किरणपाल आदि मौजूद रहे।
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सीबीआरआई रुड़की में जिज्ञासा कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय विद्यालय संगठन, रुड़की के चार मंडलों के भौतिक विज्ञान के स्नातकोत्तर शिक्षकों के लिए एक शिक्षक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें व्याख्यान के जरिए शिक्षकों को विज्ञान क्षेत्र में सीएसआईआर और सीबीआरआई की नवीनतम तकनीकियों से भी रूबरू कराया गया।
संस्थान के निदेशक डॉ. एन गोपालकृष्णन ने शिक्षकों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। सभी प्रतिभागियों ने संस्थान के रूरल पार्क, अग्नि अनुसंधान, पर्यावरण विज्ञान प्रौद्योगीकी, भवन दक्षता आदि प्रयोगशालाओं का दौरा किया। संस्थान के वैज्ञानिकों से वार्तालाप में अपने संशयों को दूर किया। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एलपी सिंह ने भवनों में नैनो प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग, नैनो तकनीक द्वारा कंक्रीट को मॉडिफाई करने और भवनों में लोडिंग क्षमता को अनुकूलित करने के विषय में जानकारी दी। संस्थान के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं जिज्ञासा कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अतुल कुमार अग्रवाल ने कहा कि आमतौर पर विद्यार्थी विज्ञान विषय को अन्य विषयों की तुलना में नीरस मानते हैं। शिक्षण में पाठ्य चर्चा के दौरान नीरसता को कम करने के लिए शिक्षकों को विज्ञान पर आधारित चुटकुलों आदि से माहौल को जीवंत बनाने का प्रयास करना चाहिए। इस कार्यक्रम में केंद्रीय विद्यालय देहरादून, जम्मू, लखनऊ और जयपुर क्षेत्र के लगभग 40 भौतिक विज्ञान के स्नातकोत्तर शिक्षकों तथा प्रधानाचार्य विपिन त्यागी ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर आरएस चिमोटे, डॉ. रजनी लखानी, डॉ. एलपी सिंह, चंदन स्वरुप मीणा, नरेश गुप्ता, पलक गोयल, दिलशाद, किरणपाल आदि मौजूद रहे।
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