फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Room off 'antique' sculptures, people are not allowed to watch

कमरे में बंद है 'एंटीक' मूर्तियां, नहीं है देखने की इजाजत

Wed, 25 Sep 2013 06:17 PM IST
आनंद नेगी/अमर उजाला, बागेश्वर
आनंद नेगी/अमर उजाला, बागेश्वर Updated Wed, 25 Sep 2013 06:17 PM IST
विज्ञापन
Room off 'antique' sculptures, people are not allowed to watch

बैजनाथ में आठवीं शताब्दी की मूर्तियों को बंद कमरे से मुक्ति मिलने की उम्मीद है। यहां संग्रहालय बनाने के लिए राज्य सरकार ने भूमि की तलाश शुरू कर दी है।

विज्ञापन


इधर बागेश्वर में भगवान बागनाथ की धरोहरों को संवारने का मामला अभी तक हल नहीं हो सका है। इसके लिए पुरातत्व विभाग को भूमि और भवन की तलाश है।

पढ़ें, संवारने के चक्कर में बिगाड़ दी 'केदारनाथ' की सूरत
विज्ञापन


आठवीं और नौंवी शताब्दी में हुई स्थापना
गरुड़ में बैजनाथ मंदिर समूह की स्थापना आठवीं और नौवीं शताब्दी में हुई यहां उसी वक्त की भगवान शिव, गणेश और सूर्य भगवान सहित तमाम देवी-देवताओं की 108 मूर्तियां हैं। ये मूर्तियां पहले परिसर में बिखरी थीं। 1984 में इन्हें कमरे में रख दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


उधर बागनाथ मंदिर में नौवीं शताब्दी और इसके बाद निर्मित 57 पाषाण प्रतिमाएं हैं। इनमें भगवान शिव, गणेश, विष्णु नाग, सूर्य आदि देवी-देवताओं की मूर्तियां शामिल हैं।

पढ़ें, ...यहां पिंडदान से धुलेंगे 21 जन्मों के पाप

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग करता है देखरेख
इनमें कुछ मूर्तियां दुलर्भ श्रेणी की भी हैं। 1980 तक यह मूर्तियां भी मंदिर परिसर में बिखरी थीं। बाद में नुकसान से बचाने के उद्देश्य से इन्हें वहां एक कक्ष में रख दिया गया। इस कक्ष पर जालीदार शटर लगा है और मूर्तियों को बाहर से ही देखा जा सकता है।

बागनाथ और बैजनाथ के ऐतिहासिक मंदिरों की तरह यहां की मूर्तियां भी पुरातत्व की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण हैं। बैजनाथ की मूर्तियां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के सीधे नियंत्रण में और बागनाथ की धरोहरें उत्तराखंड संस्कृति विभाग की देखरेख में हैं।


लंबे समय से हो रही मांग
इन धरोहरों को संग्रहालयों में रखकर पर्यटन के साथ जोड़ने की मांग काफी पुरानी है। बैजनाथ की मूर्तियों के संग्रहालय बनाने का मामला कपकोट के विधायक ललित फर्स्वाण ने गत दिनों विधान सभा में रखा।

पढ़ें, केदारनाथः मिल गया भोले का नाग...

संस्कृति और पर्यटन मंत्री अमृता रावत ने सदन में बताया कि इसके लिए भूमि की तलाश चल रही है। तीन माह पूर्व अमृता रावत के बागेश्वर प्रवास के वक्त बागनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पूरन रावल आदि ने यहां संग्रहालय की मांग रखी थी। किंतु यह मामला अभी तक आगे नहीं बढ़ सका है।

इनकी भी सुनिए
बागनाथ मंदिर परिसर में प्राचीन निष्प्रयोज्य धर्मशालाओं के स्थान पर संग्रहालय बनाया जा सकता है। इसके लिए मंदिर समिति और आम लोगों की पहल जरूरी है। संग्रहालय बनने पर बागेश्वर के पर्यटन व्यवसाय को गति मिलेगी।
- डा. पीएस चौहान, अन्वेषण सहायक, संस्कृति विभाग अल्मोड़ा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed