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Rishikesh News: युवाओं की सोच और नवाचार से संवरेगा उत्तराखंड का भविष्य
Wed, 28 Oct 2026 07:13 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Wed, 28 Oct 2026 07:13 PM IST
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जौलीग्रांट। लेखक गांव में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महोत्सव के चौथे दिन युवा उत्तराखंड, नई सोच और नई चेतना विषय पर आयोजित सत्र में प्रदेश के भविष्य, युवा नेतृत्व, सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और नवाचार की संभावनाओं पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि युवाओं की रचनात्मक ऊर्जा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव उत्तराखंड के विकास को नई दिशा दे सकता है। महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों और करीब 60 देशों से जुड़े प्रतिभागियों व विद्यार्थियों ने भाग लिया।
मुख्य अतिथि हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं और भविष्य की दिशा तय करते हैं। सकारात्मक सोच, नवाचार और परिश्रम के साथ उत्तराखंड के युवा प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता, औषधीय वनस्पतियों और प्राकृतिक संपदा में रोजगार और उद्यमिता की व्यापक संभावनाएं हैं।
मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन ने उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक समृद्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और संस्कारों से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी ने कहा कि विकास की सार्थकता आर्थिक प्रगति के साथ संस्कृति और पर्यावरण के संरक्षण में निहित है। वहीं, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दशक को उत्तराखंड का दशक बताया है। देवभूमि के साथ वीरभूमि के रूप में पहचाने जाने वाले उत्तराखंड की हिमालयी विरासत, प्राकृतिक संपदा, आध्यात्मिक परंपराएं और लोक संस्कृति इसकी विशिष्ट पहचान हैं।
लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महोत्सव साहित्य, कला और संस्कृति के माध्यम से देश-विदेश के विचारों को जोड़ने का सशक्त मंच बन रहा है।
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मुख्य अतिथि हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं और भविष्य की दिशा तय करते हैं। सकारात्मक सोच, नवाचार और परिश्रम के साथ उत्तराखंड के युवा प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता, औषधीय वनस्पतियों और प्राकृतिक संपदा में रोजगार और उद्यमिता की व्यापक संभावनाएं हैं।
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मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन ने उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक समृद्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और संस्कारों से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी ने कहा कि विकास की सार्थकता आर्थिक प्रगति के साथ संस्कृति और पर्यावरण के संरक्षण में निहित है। वहीं, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दशक को उत्तराखंड का दशक बताया है। देवभूमि के साथ वीरभूमि के रूप में पहचाने जाने वाले उत्तराखंड की हिमालयी विरासत, प्राकृतिक संपदा, आध्यात्मिक परंपराएं और लोक संस्कृति इसकी विशिष्ट पहचान हैं।
लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महोत्सव साहित्य, कला और संस्कृति के माध्यम से देश-विदेश के विचारों को जोड़ने का सशक्त मंच बन रहा है।