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Rishikesh News: रायपुर ब्लॉक में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में लाखों का घपला
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रायपुर ब्लॉक के अंतर्गत थानो न्याय पंचायत से जुड़ी करीब आधा दर्जन से अधिक ग्राम सभाओं में प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के अंतर्गत असिंचित भूमि को सिंचित करने के लिए किसानों को दिए जाने वाले सिंचाई पाइप, स्प्रंकलर सेट, एचडीईडी पाइप आदि में लाखों का घपला हुआ है। कृषि विभाग ने गांवों में जाकर मौके पर जाकर जांच की तो मामला सामने आया।
थानो क्षेत्र में 15 से अधिक गांवों के लगभग 200 किसानों को इस सिंचाई योजना का लाभ और प्रशिक्षण दिया जाना था। लेकिन रायपुर ब्लॉक के अधिकारियों ने सिर्फ कुछ किसानों के यहां सिंचाई पाइप ही पहुंचाए। जबकि मार्च में इस योजना के लिए धनराशि आवंटित हुई थी। रामनगर डांडा के प्रधान रविंद्र सिंह ने बीते 11 अक्तूबर को इस मामले की शिकायत मुख्य कृषि अधिकारी से की थी। किसानों ने भी इसकी उच्च अधिकारियों ने शिकायत की थी। जिसके बाद जिला कृषि अधिकारी लतिका सिंह ने मौके पर जाकर किसानों से बातचीत की तो पता चला कि यह योजना सिर्फ कागजों में ही पूरी कर ली गई है।
शपथ पत्र पर फर्जी तरीके से किए हस्ताक्षर
किसानों के शपथ पत्र पर भी फर्जी तरीके से साइन कर कहा गया कि किसानों को योजना का लाभ मिल चुका है। इस मामले में ब्लॉक स्तर के दो अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। मुख्य कृषि अधिकारी की ओर से अब तक कई बार मौके पर जाकर रामनगर डांडा, कोटिमयचक और बडासीग्रांट में जांच की जा चुकी है। जांच रिपोर्ट कृषि निदेशक को सौंपी गई है। जिसमें इस योजना में भारी गड़बड़ी पाई गई है। जिस कारण अब इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन भी कर दिया गया है। थानो के किसानों के लिए यह योजना करीब एक करोड़ से ऊपर की बताई जा रही है।
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एक अधिकारी रिटायर्ड हो गए, दूसरे मेडिकल लीव पर
रायपुर ब्लॉक के दो अधिकारियों की इसमें संदिग्ध भूमिका बताई जा रही है। इसमें वीके धस्माना 31 मार्च को रिटायर्ड हो गए हैं। जबकि भूमि संरक्षण अधिकारी राजदीप सिंह पंवार तीन अक्तूबर से मेडिकल लीव पर हैं। धस्माना ने 28 मार्च को एक ही दिन में 200 किसानों की जांच कर डाली थी। इस योजना में 55 प्रतिशत सब्सिडी केंद्र और 25 प्रतिशत राज्य कुल 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में घोटाला किया गया है। जिसकी शिकायत उन्होंने मुख्य कृषि अधिकारी से की थी। जिनकी जांच में भी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। उनके घर कुछ खराब क्वालिटी के सिंचाई पाइप के बंडल डाले गए हैं। जो किसी काम के नहीं हैं। - रविंद्र सिंह ग्राम प्रधान रामनगर डांडा
15 गांवों के करीब 200 किसानों को इस योजना का लाभ दिया जाना था। लेकिन शिकायत पर उन्होंने जांच करी तो पता चला कि यह योजना कागजों में ही पूरी कर दी गई है। मौके पर कुछ ही किसानों को सिर्फ पाइप आदि दिए गए हैं। जबकि सिंचाई का पूरा सेट और प्रशिक्षण दिया जाना था। अब इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी -लतिका सिंह, जिला कृषि अधिकारी, देहरादून
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थानो क्षेत्र में 15 से अधिक गांवों के लगभग 200 किसानों को इस सिंचाई योजना का लाभ और प्रशिक्षण दिया जाना था। लेकिन रायपुर ब्लॉक के अधिकारियों ने सिर्फ कुछ किसानों के यहां सिंचाई पाइप ही पहुंचाए। जबकि मार्च में इस योजना के लिए धनराशि आवंटित हुई थी। रामनगर डांडा के प्रधान रविंद्र सिंह ने बीते 11 अक्तूबर को इस मामले की शिकायत मुख्य कृषि अधिकारी से की थी। किसानों ने भी इसकी उच्च अधिकारियों ने शिकायत की थी। जिसके बाद जिला कृषि अधिकारी लतिका सिंह ने मौके पर जाकर किसानों से बातचीत की तो पता चला कि यह योजना सिर्फ कागजों में ही पूरी कर ली गई है।
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शपथ पत्र पर फर्जी तरीके से किए हस्ताक्षर
किसानों के शपथ पत्र पर भी फर्जी तरीके से साइन कर कहा गया कि किसानों को योजना का लाभ मिल चुका है। इस मामले में ब्लॉक स्तर के दो अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। मुख्य कृषि अधिकारी की ओर से अब तक कई बार मौके पर जाकर रामनगर डांडा, कोटिमयचक और बडासीग्रांट में जांच की जा चुकी है। जांच रिपोर्ट कृषि निदेशक को सौंपी गई है। जिसमें इस योजना में भारी गड़बड़ी पाई गई है। जिस कारण अब इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन भी कर दिया गया है। थानो के किसानों के लिए यह योजना करीब एक करोड़ से ऊपर की बताई जा रही है।
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एक अधिकारी रिटायर्ड हो गए, दूसरे मेडिकल लीव पर
रायपुर ब्लॉक के दो अधिकारियों की इसमें संदिग्ध भूमिका बताई जा रही है। इसमें वीके धस्माना 31 मार्च को रिटायर्ड हो गए हैं। जबकि भूमि संरक्षण अधिकारी राजदीप सिंह पंवार तीन अक्तूबर से मेडिकल लीव पर हैं। धस्माना ने 28 मार्च को एक ही दिन में 200 किसानों की जांच कर डाली थी। इस योजना में 55 प्रतिशत सब्सिडी केंद्र और 25 प्रतिशत राज्य कुल 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में घोटाला किया गया है। जिसकी शिकायत उन्होंने मुख्य कृषि अधिकारी से की थी। जिनकी जांच में भी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। उनके घर कुछ खराब क्वालिटी के सिंचाई पाइप के बंडल डाले गए हैं। जो किसी काम के नहीं हैं। - रविंद्र सिंह ग्राम प्रधान रामनगर डांडा
15 गांवों के करीब 200 किसानों को इस योजना का लाभ दिया जाना था। लेकिन शिकायत पर उन्होंने जांच करी तो पता चला कि यह योजना कागजों में ही पूरी कर दी गई है। मौके पर कुछ ही किसानों को सिर्फ पाइप आदि दिए गए हैं। जबकि सिंचाई का पूरा सेट और प्रशिक्षण दिया जाना था। अब इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी -लतिका सिंह, जिला कृषि अधिकारी, देहरादून