परमार्थ निकेतन में गांधीवादी दर्शन पर दो दिवसीय गंगा गांधी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें साबरमती आश्रम के व्यवस्थापक जयेश भाई के नेतृत्व में साबरमती आश्रम से आए गांधीवादी कार्यकर्ताओं, परमार्थ निकेतन के सदस्यों और परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने भाग लिया। स्वामी चिदानंद सरस्वती के सानिध्य में गांधीवादी कार्यकर्ताओं ने महामंडलेश्वर स्वामी शुकदेवानंद सरस्वती की तपस्थली पर ध्यान, सत्संग और भजन किया। इसके साथ ही गांधीवादी दर्शन के परिप्रेक्ष्य में प्रयोग पर चिंतन किया गया।
इस दौरान स्वामी चिदानंद सरस्वती, साबरमती आश्रम के व्यवस्थापक जयेश भाई, देवेंद्र भाई, गंगा नंदिनी और परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने स्वच्छता अभियान चलाया। स्वामी ने कहा कि सत्य और अहिंसा दो आधारभूत सिद्धांत हैं, जहां सत्य है वहां पर ईश्वर है। अहिंसा को मानने वाला व्यक्ति कभी भी किसी को मानसिक और शारीरिक पीड़ा नहीं पहुंचाता। सत्याग्रह से तात्पर्य अन्याय, शोषण, उत्पीड़न के खिलाफ आत्मबल का प्रयोग करना, व्यक्तिगत पीड़ा सहन कर अधिकारों को सुरक्षित करना और दूसरों को चोट न पहुंचाने का प्रयत्न करना है। स्वामी ने छात्रों को भारतीय संस्कृति, संस्कारों और अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया।