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भारतीय योग और संस्कृति के कायल हुए विदेशी जिज्ञासु
ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश
Updated Tue, 08 Mar 2016 01:50 AM IST
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सारा
- फोटो : amar ujala
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पर्यटन विभाग, गढ़वाल मंडल विकास निगम और परमार्थ निकेतन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के सप्ताहव्यापी कार्यक्रम में शामिल हुए विदेशी साधकों ने योगा वीक के अंतिम दिन अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि काश, यह योग महोत्सव महज सात दिन का न होकर सात महीने का होता तो उन्हें भारतीय योग और यहां की संस्कृति, परंपरा से और करीब से रूबरू होने का अवसर मिलता।
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इंटरनेशनल योगा वीक-2016 में प्रतिभागी रहे विदेशी साधकों को भारतीय योग की तालीम और वैदिक मंत्रों का ज्ञान प्राप्त करने के साथ ही भारत की धरती से इस कदर प्रेम उमड़ पड़ा कि मंगलवार को महोत्सव की समाप्ति पर विदाई की बेला में कई जिज्ञासु, साधक भावुक हो उठे।
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मैं भारत पहली बार आया हूं। यहां आकर भारतीय योग और आध्यात्मिक ज्ञान के बारे में पता चला। मुझे यहां से जाने का बहुत दुख हो रहा है, लेकिन मैं अपने साथ यहां की यादें और भारतीय विचारों को ले जा रहा हूं। - मैल, आस्ट्रेलिया
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भारत आना और यहां से आध्यात्मिक योग की तालीम लेना मेरे लिए गर्व की बात है। ‘योग फेस्टिवल सात दिन की बजाय सात महीने का होता’ तो मुझे भारत में रहने और इसे करीब से जानने का ज्यादा मौका मिलता। मैं यहां से तुलसी चाय अपने साथ ले जा रहा हूं। - डीमाही, यूक्रेन
भारत आकर योगा फेस्टिवल में बिताए गए 7 दिन मेरे जीवन के सबसे अच्छे दिनों में से हैं। यहां आकर मुझे जीवन के उद्देश्य के बारे में पता चला। यहां से विदा लेने पर मुझे कितना दुख हो रहा है, उसे मैं शब्दाें में बयां नहीं कर सकता। - सोन, साउथ अफ्रीका
आध्यात्मिक योग से जुड़ने के बाद मुझे पहली बार अपने जीवन के उद्देश्य का पता चला। भारतीय आध्यात्मिक योग में नकारात्मक विचार को नष्ट करने की शक्ति निहित है। यहां से जाने का दुख मैं बयां नहीं कर सकती, लेकिन मैं भारत वापस जरूर आऊंगी। मैं भारत को विश्व गुरु मानती हूं।
सारा, स्वीडन
योगा फेस्टिवल में बिताए गए हरेक पल मेरे जीवन का महत्वपूर्ण भाग रहेगा। मैं यहां से जाना तो नहीं चाहती हूं, लेकिन समय की बाध्यता के आगे में बेबस हूं। यहां आकर और भारतीय संस्कृति को करीब से जानने के बाद मैं कह सकती हूं कि भारत एक महान देश है। - चींग, चीन
साधक बोले
-सात दिन नहीं सात महीने का महोत्सव होता तो भारतीय संस्कृति को करीब से समझ पाते
-हमें भारत छोड़ने पर दुख हो रहा है, मगर क्या करें समय की मर्यादा है
-यह सात दिन हमारे जीवन के सबसे अच्छे दिन
-भारतीय आध्यात्मिक योग में नकारात्मक विचार को नष्ट करने की शक्ति निहित
-भारत को विश्व गुरु मानते हैं महोत्सव में शामिल कई विदेशी साधक
-भारतीय संस्कृति को करीब से जानने के बाद हम कह सकते हैं भारत एक महान देश है