हाईस्कूल परीक्षा फीस 210 रुपये, ले रहे 450
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आपने यह तो सुना होगा कि प्राइवेट स्कूल शिक्षा के नाम पर अधिक शुल्क वसूली कर रहे हैं। लेकिन, यहां बोर्ड परीक्षा फीस के नाम पर पैसा वसूली करने का मामला सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालयों का है। शिक्षा के मंदिर आए दिन बिजनेस का रूप लेते जा रहे हैं। कम लागत पर ज्यादा मुनाफा की तर्ज पर शिक्षा से जुड़े कुछ संस्थान शिक्षा विभाग के नियमों की सारे आम धज्जियां उड़ा रहे हैं। उत्तराखंड बोर्ड के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा के निर्धारित शुल्क से अधिक पैसा वसूला जा रहा है। यहां हाईस्कूल में परीक्षा फीस के नाम पर 210 की जगह 450 रुपये वसूला रहा है। वहीं, इंटर में निर्धारित 410 के स्थान पर 650 रुपये वसूल किए जा रहे हैं।
शिक्षा के नाम पर किस तरह स्कूल प्रबंधक अभिभावकों से लूट खसोट कर रहा है। इसकी बानगी रायवाला और हरिपुकलां स्थित सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालय में देखने को मिल रही है। उक्त विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावकों ने आरोप लगाया कि विद्यालय प्रशासन हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा के निर्धारित शुल्क से अधिक फीस के नाम पर अवैध वसूली कर रहा है। इस संबंध में जब विद्यालय प्रबंधक से पूछा गया तो, उन्होने निर्धारित बोर्ड परीक्षा शुल्क से अधिक पैसा लेने की बात मानी। उनका कहना है कि निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क के पैसों से पेपर वर्क का कार्य किया जाता है।
ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि किस तरह शासनादेश दरकिनार कर स्कूल अभिभावकों के साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं। क्षेत्र के इन विद्यालयों पर हर साल सैकड़ों बच्चे बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन करते हैं। जिसकी आड़ में उक्त विद्यालय खूब लूट खसोट कर रहे हैं। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि परीक्षा शुल्क देने के बाद उन्हे परीक्षा शुल्क रशीद भी नहीं दी जाती है। अशासकीय विद्यालय शासनादेश का मखौल उड़ाकर दोगुनी फीस वसूल रहे हैं। परीक्षार्थियों द्वारा अधिक फीस लेने के सवाल पर गोलमोल जवाब दिया जाता है। जबकि सरकार बोर्ड परीक्षा शुल्क आवेदन पर प्रति परीक्षार्थी पांच रुपये पेपर वर्क के लिए स्कूल प्रबंधक को अलग से देती है। लेकिन उक्त विद्यालयों द्वारा अधिक पैसा पेपर वर्क के नाम पर ही लिया जा रहा है।
विद्यालय निर्धारित फीस से अधिक शुल्क जरूर ले रहा है। लेकिन, वह ज्यादा नहीं है। बोर्ड परीक्षा निर्धारित शुल्क से अधिक लिया जाने वाला पैसा पेपर वर्क में उपयोग किया जाता है। क्योंकि सरकार अशासकीय विद्यालयों को अन्य खर्चे के लिए कोई पैसा नहीं देती है। - प्रमोद कुमार बडोला, परीक्षा प्रभारी सत्येश्वरी देवी मैमोरियल स्कूल, इंटर कॉलेज
मामला संज्ञान में नहीं है। अगर कोई विद्यालय सरकार के बनाए नियम विरुद्ध अधिक बोर्ड परीक्षा फीस वसूल रहा है। तो निश्चित रूप से उक्त विद्यालय प्रबंधंकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अभिभावक और छात्रों की शिकायत के आधार पर विद्यालयों से रिकवरी कर उन्हें अधिक शुल्क वापस लौटा दिया जाएगा। -एसपी खाली, मुख्यशिक्षा अधिकारी, देहरादून