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Rishikesh News: आठ महीने बाद भी शुरू नहीं हुई हेली एंबुलेंस सेवा
Thu, 11 Dec 2025 01:20 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Thu, 11 Dec 2025 01:20 AM IST
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उत्तराखंड के पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए जीवन रेखा मानी जाने वाली ऋषिकेश एम्स की हेली एंबुलेंस सेवा पिछले आठ महीनों से ठप पड़ी है। मई 2025 में केदारनाथ में एक दुर्घटना के बाद से यह सेवा बहाल नहीं हो पाई है, जिसने गंभीर मरीजों की जान जोखिम में डाल दी है।
अनुबंध के नियमों के अनुसार, संबंधित एयरो कंपनी को दुर्घटना के मात्र तीन दिनों के भीतर एक नई हेली एंबुलेंस उपलब्ध करानी थी। हैरत की बात यह है कि कंपनी ने न केवल नई एंबुलेंस देने में घोर लापरवाही बरती है, बल्कि दुर्घटनाग्रस्त हेलिकॉप्टर को भी आठ महीने बाद तक केदारनाथ से हटाया नहीं है।
बीते 17 मई को एम्स की हेली एंबुलेंस केदारनाथ में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हेली एंबुलेंस यहां एक महिला मरीज को लेने गई थी। पायलट सुरक्षित है। दुर्घटना हार्ड लैंडिंग के दौरान हुई थी। उसके बाद से एम्स की महत्वपूर्ण एयरो मेडिकल सेवा ठप हो गई। जबकि अनुबंध के अनुसार हेली एंबुलेंस के खराब होने या दुर्घटनाग्रस्त होने पर संबंधित कंपनी को तीन दिन के भीतर नई एंबुलेंस उपलब्ध करानी थी।
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घोषणा के दो साल बाद हुई थी शुरू, सात माह भी नहीं चली
एम्स की हेली एंबुलेंस सेवा घोषणा के दो साल बाद शुरू हो पाई थी। 20 सितंबर 2022 को तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में हेली एंबुलेंस सेवा शुरू किए जाने की घोषणा की थी। 29 अक्तूबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सेवा का वर्चुअल उद्घाटन किया था। लेकिन सात माह बाद हेली एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
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पहाड़ी क्षेत्रों के लिए साबित हो रही थी काफी फायदेमंद
एम्स की हेली एंबुलेंस सेवा सरकारी चिकित्सा संस्थान में पहली हेली एंबुलेंस सेवा थी। उत्तराखंड के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों के लिए यह काफी फायदेमंद साबित हो रही थी। इस सेवा का सर्वाधिक फायदा उत्तरकाशी और चमोली जिले के लोगों को मिला था। उत्तरकाशी की कई गर्भवती महिलाओं की जान बचाने में यह सेवा सफल रही थी।
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- सेना के सहयोग से हेली एंबुलेंस संचालित किए जाने की योजना है। इस संबंध में बात की जा रही है। - संदीप कुमार, पीआरओ, एम्स
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अनुबंध के नियमों के अनुसार, संबंधित एयरो कंपनी को दुर्घटना के मात्र तीन दिनों के भीतर एक नई हेली एंबुलेंस उपलब्ध करानी थी। हैरत की बात यह है कि कंपनी ने न केवल नई एंबुलेंस देने में घोर लापरवाही बरती है, बल्कि दुर्घटनाग्रस्त हेलिकॉप्टर को भी आठ महीने बाद तक केदारनाथ से हटाया नहीं है।
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बीते 17 मई को एम्स की हेली एंबुलेंस केदारनाथ में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हेली एंबुलेंस यहां एक महिला मरीज को लेने गई थी। पायलट सुरक्षित है। दुर्घटना हार्ड लैंडिंग के दौरान हुई थी। उसके बाद से एम्स की महत्वपूर्ण एयरो मेडिकल सेवा ठप हो गई। जबकि अनुबंध के अनुसार हेली एंबुलेंस के खराब होने या दुर्घटनाग्रस्त होने पर संबंधित कंपनी को तीन दिन के भीतर नई एंबुलेंस उपलब्ध करानी थी।
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घोषणा के दो साल बाद हुई थी शुरू, सात माह भी नहीं चली
एम्स की हेली एंबुलेंस सेवा घोषणा के दो साल बाद शुरू हो पाई थी। 20 सितंबर 2022 को तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में हेली एंबुलेंस सेवा शुरू किए जाने की घोषणा की थी। 29 अक्तूबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सेवा का वर्चुअल उद्घाटन किया था। लेकिन सात माह बाद हेली एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
पहाड़ी क्षेत्रों के लिए साबित हो रही थी काफी फायदेमंद
एम्स की हेली एंबुलेंस सेवा सरकारी चिकित्सा संस्थान में पहली हेली एंबुलेंस सेवा थी। उत्तराखंड के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों के लिए यह काफी फायदेमंद साबित हो रही थी। इस सेवा का सर्वाधिक फायदा उत्तरकाशी और चमोली जिले के लोगों को मिला था। उत्तरकाशी की कई गर्भवती महिलाओं की जान बचाने में यह सेवा सफल रही थी।
- सेना के सहयोग से हेली एंबुलेंस संचालित किए जाने की योजना है। इस संबंध में बात की जा रही है। - संदीप कुमार, पीआरओ, एम्स