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गंगा दशहरा पर उमड़ा आस्था का सैलाब
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गंगा दशहरा पर योगनगरी के गंगा घाट और तटों पर श्रद्धालुओं सैलाब उमड़ा। सुबह से लेकर शाम तक गंगा में डुबकी लगाने के लिए लोगों की भीड़ रही। पर्वतीय क्षेत्रों से देव डोलियों ने भी आकर यहां गंगा स्नान किया। श्रद्धालुओं ने गंगा घाटों और तटों पर दीपदान कर आस्था की डुबकी लगाई। लोगों ने बाबाओं और जरूरतमंदों को अन्न, धन देकर पुण्य अर्जित किया।
बृहस्पतिवार को तड़के चार बजे से ही त्रिवेणी घाट, साईं घाट, 72 सीढ़ी घाट, नाव घाट, मुनि की रेती स्थित पूर्णानंद घाट, स्वामीनारायण, शत्रुघ्न घाट, हनुमान घाट, स्वर्गाश्रम स्थित नाव घाट, लक्ष्मी नारायण घाट, गीताभवन, परमार्थ निकेतन, वानप्रस्थ आदि गंगा घाट शंखनाद और घंटियों की आवाज से गूंजने लगा। तीर्थ यात्रियों, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने गंगा घाटों पर पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई। पौराणिक मान्यता है कि मां गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए राजा भागीरथ ने कठोर तपस्या की थी। इस दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरी थी। इसलिए इस दिन को गंगा दशहरा के नाम से भी जाना जाता है। जिसका अर्थ है गंगा का अवतरण। इसलिए इस दिन गंगा स्नान और गंगा पूजा का महत्व काफी बढ़ जाता है। गंगा दशहरा पर गंगा स्नान, पूजा और दान करने से मनुष्य को तीन तरह के दैहिक पाप, चार तरह के वाणी द्वारा किए पाप और तीन तरह के मानसिक पाप जैसे 10 पापों से मुक्ति मिलती है।
पुलिस प्रशासन का यातायात प्लान हुआ फेल
योगनगरी में गंगा दशहरा पर बढ़ती भीड़ ने शहर में पुलिस प्रशासन का यातायात प्लान फेल कर दिया है। नेपाली फार्म से लेकर तपोवन तक दिनभर लोगों को जाम से जूझना पड़ा। चंद्रभागा से लेकर श्यामपुर चौकी तक सुबह पांच से रात 10 बजे तक पुलिस प्रशासन का जीरो जोन ट्रैफिक प्लान धरातल पर लागू नहीं हुआ। कोयलघाटी से लेकर चंद्रभागा तक दिन भर बाहरी वाहनों की आवाजाही देखने को मिली।
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संगठनों ने बांटा छबील
गंगा दशहरा पर्व पर त्रिवेणी घाट रोड, मुख्य बाजार, आईडीपीएल, हरिद्वार रोड, रेलवे रोड आदि जगहों पर विभिन्न संगठनों के लोगों ने छबील लगाई। गर्मी से निजात पाने के लिए लोगों ने शरबत पीकर प्यास बुझाई।
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बृहस्पतिवार को तड़के चार बजे से ही त्रिवेणी घाट, साईं घाट, 72 सीढ़ी घाट, नाव घाट, मुनि की रेती स्थित पूर्णानंद घाट, स्वामीनारायण, शत्रुघ्न घाट, हनुमान घाट, स्वर्गाश्रम स्थित नाव घाट, लक्ष्मी नारायण घाट, गीताभवन, परमार्थ निकेतन, वानप्रस्थ आदि गंगा घाट शंखनाद और घंटियों की आवाज से गूंजने लगा। तीर्थ यात्रियों, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने गंगा घाटों पर पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई। पौराणिक मान्यता है कि मां गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए राजा भागीरथ ने कठोर तपस्या की थी। इस दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरी थी। इसलिए इस दिन को गंगा दशहरा के नाम से भी जाना जाता है। जिसका अर्थ है गंगा का अवतरण। इसलिए इस दिन गंगा स्नान और गंगा पूजा का महत्व काफी बढ़ जाता है। गंगा दशहरा पर गंगा स्नान, पूजा और दान करने से मनुष्य को तीन तरह के दैहिक पाप, चार तरह के वाणी द्वारा किए पाप और तीन तरह के मानसिक पाप जैसे 10 पापों से मुक्ति मिलती है।
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पुलिस प्रशासन का यातायात प्लान हुआ फेल
योगनगरी में गंगा दशहरा पर बढ़ती भीड़ ने शहर में पुलिस प्रशासन का यातायात प्लान फेल कर दिया है। नेपाली फार्म से लेकर तपोवन तक दिनभर लोगों को जाम से जूझना पड़ा। चंद्रभागा से लेकर श्यामपुर चौकी तक सुबह पांच से रात 10 बजे तक पुलिस प्रशासन का जीरो जोन ट्रैफिक प्लान धरातल पर लागू नहीं हुआ। कोयलघाटी से लेकर चंद्रभागा तक दिन भर बाहरी वाहनों की आवाजाही देखने को मिली।
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संगठनों ने बांटा छबील
गंगा दशहरा पर्व पर त्रिवेणी घाट रोड, मुख्य बाजार, आईडीपीएल, हरिद्वार रोड, रेलवे रोड आदि जगहों पर विभिन्न संगठनों के लोगों ने छबील लगाई। गर्मी से निजात पाने के लिए लोगों ने शरबत पीकर प्यास बुझाई।