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Rishikesh News: गिनीज बुक में एम्स ऋषिकेश का नाम दर्ज, 35 किलो का बोन ट्यूमर हटाया
Sat, 04 Jul 2026 02:11 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 04 Jul 2026 02:11 AM IST
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एम्स के चिकित्सकों ने दुनिया के अब तक के सबसे अधिक वजनी 35 किलोग्राम के बोन ट्यूमर की सफल सर्जरी कर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है।
9 जून 2025 को संस्थान के शल्य चिकित्सकों की टीम ने एक 27 वर्षीय व्यक्ति के बाएं पैर की जांघ से लगभग 35 किलोग्राम के भारी ट्यूमर को सर्जरी की मदद से हटाने में सफलता हासिल की थी। टीम में हड्डी रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहित धींगरा, सीटीवीएस विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अंशुमान दरबारी एवं बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मधुवरी वाथुल्या शामिल रही।
संस्थान की ओर से इस सबसे अधिक वजनी ट्यूमर की सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिए जाने के बाद चिकित्सकीय दल की इस उपलब्धि से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस प्रकाशन को अवगत कराया गया था। जिसके बाद इंग्लैंड, लंदन से प्रकाशित गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस की ओर से इस जानकारी का संज्ञान लिया गया और अपने स्तर से परीक्षण किया गया।
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एम्स प्रशासन ने बताया कि परीक्षण में उक्त जानकारी सही पाए जाने पर इस रिकाॅर्ड को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। इसके लिए एम्स ऋषिकेश की चिकित्सकीय टीम को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से प्रशस्तिपत्र दिया गया है। इससे पूर्व भारत के ही चिकित्सकों के एक दल ने वर्ष 2002 में 16.5 किलोग्राम के ट्यूमर की सर्जरी की थी।
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यह केवल एम्स ऋषिकेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। संस्थान हर मरीज को सर्वोत्तम और अत्याधुनिक चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। - प्रो. मीनू सिंह, निदेशक, एम्स ऋषिकेश
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9 जून 2025 को संस्थान के शल्य चिकित्सकों की टीम ने एक 27 वर्षीय व्यक्ति के बाएं पैर की जांघ से लगभग 35 किलोग्राम के भारी ट्यूमर को सर्जरी की मदद से हटाने में सफलता हासिल की थी। टीम में हड्डी रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहित धींगरा, सीटीवीएस विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अंशुमान दरबारी एवं बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मधुवरी वाथुल्या शामिल रही।
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संस्थान की ओर से इस सबसे अधिक वजनी ट्यूमर की सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिए जाने के बाद चिकित्सकीय दल की इस उपलब्धि से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस प्रकाशन को अवगत कराया गया था। जिसके बाद इंग्लैंड, लंदन से प्रकाशित गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस की ओर से इस जानकारी का संज्ञान लिया गया और अपने स्तर से परीक्षण किया गया।
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एम्स प्रशासन ने बताया कि परीक्षण में उक्त जानकारी सही पाए जाने पर इस रिकाॅर्ड को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। इसके लिए एम्स ऋषिकेश की चिकित्सकीय टीम को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से प्रशस्तिपत्र दिया गया है। इससे पूर्व भारत के ही चिकित्सकों के एक दल ने वर्ष 2002 में 16.5 किलोग्राम के ट्यूमर की सर्जरी की थी।
यह केवल एम्स ऋषिकेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। संस्थान हर मरीज को सर्वोत्तम और अत्याधुनिक चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। - प्रो. मीनू सिंह, निदेशक, एम्स ऋषिकेश