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असंक्रामक बीमारियों पर योग से करें प्रहार : प्रो. मीनू
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आयुष विभाग और इंटीग्रेटिव मेडिसिन के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय सम्मेलन और कार्यशाला का आयोजन हुआ। संस्थान के हेल्थकेयर वर्करों और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा और टीकाकरण से जीवन प्रत्याशा तो बढ़ी है, लेकिन अब मोटापा, मधुमेह और हाई बीपी जैसी असंक्रामक बीमारियां नई चुनौती हैं। इनसे निपटने के लिए योग सबसे प्रभावी साधन है।
उन्होंने बच्चों को शुरू से योग से जोड़ने और स्वस्थ समाज बनाने के लिए योग को व्यवहार में अपनाने पर जोर दिया। डीन एकेडमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय ने कहा कि 2047 तक भारत की लगभग 18 प्रतिशत आबादी वृद्ध वर्ग में होगी। ऐसे में हेल्दी एजिंग आज की सबसे प्रासंगिक जरूरत है। डीन रिसर्च प्रो. शैलेंद्र हांडू ने स्वस्थ वृद्धावस्था और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने में योग की भूमिका रेखांकित करते हुए योग पर साक्ष्य आधारित शोध की जरूरत बताई।
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एसएसआईएआर बंगलूरू की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. छाया ने क्रोनोलॉजिकल और बायोलॉजिकल एज का फर्क समझाते हुए कहा कि योगिक अभ्यासों से तनाव घटता है, मानसिक संतुलन बढ़ता है और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र बेहतर होता है, जिससे बायोलॉजिकल उम्र धीमी पड़ती है।
स्कूल ऑफ योगा एंड नेचुरोपैथी बंगलूरू के प्रिंसिपल डॉ. अपार अविनाश ने कहा कि योग सिर्फ आसन नहीं, बल्कि व्यवहार परिवर्तन और आत्मबोध का माध्यम है जो संतुलित जीवन देता है। आयुष विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका पठानिया ने योग कक्षा के परिदृश्य और सावधानियों पर दो सत्र लिए।
डॉ. श्वेता मिश्रा ने प्रतिभागियों को आसन, प्राणायाम और योगनिद्रा का अभ्यास कराया। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीलोय मोहंती ने पैनल चर्चा का संचालन करते हुए योग को स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र बताया। समापन पर बेस्ट ओरल और बेस्ट पोस्टर प्रेजेंटेशन देने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर डीएमएस डॉ. रवि कुमार, डॉ. अनिता रानी कंसल, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के डॉ. असीम, डॉ. सुबोध सौरभ सिंह आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आयुष विभाग और इंटीग्रेटिव मेडिसिन के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय सम्मेलन और कार्यशाला का आयोजन हुआ। संस्थान के हेल्थकेयर वर्करों और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा और टीकाकरण से जीवन प्रत्याशा तो बढ़ी है, लेकिन अब मोटापा, मधुमेह और हाई बीपी जैसी असंक्रामक बीमारियां नई चुनौती हैं। इनसे निपटने के लिए योग सबसे प्रभावी साधन है।
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उन्होंने बच्चों को शुरू से योग से जोड़ने और स्वस्थ समाज बनाने के लिए योग को व्यवहार में अपनाने पर जोर दिया। डीन एकेडमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय ने कहा कि 2047 तक भारत की लगभग 18 प्रतिशत आबादी वृद्ध वर्ग में होगी। ऐसे में हेल्दी एजिंग आज की सबसे प्रासंगिक जरूरत है। डीन रिसर्च प्रो. शैलेंद्र हांडू ने स्वस्थ वृद्धावस्था और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने में योग की भूमिका रेखांकित करते हुए योग पर साक्ष्य आधारित शोध की जरूरत बताई।
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एसएसआईएआर बंगलूरू की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. छाया ने क्रोनोलॉजिकल और बायोलॉजिकल एज का फर्क समझाते हुए कहा कि योगिक अभ्यासों से तनाव घटता है, मानसिक संतुलन बढ़ता है और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र बेहतर होता है, जिससे बायोलॉजिकल उम्र धीमी पड़ती है।
स्कूल ऑफ योगा एंड नेचुरोपैथी बंगलूरू के प्रिंसिपल डॉ. अपार अविनाश ने कहा कि योग सिर्फ आसन नहीं, बल्कि व्यवहार परिवर्तन और आत्मबोध का माध्यम है जो संतुलित जीवन देता है। आयुष विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका पठानिया ने योग कक्षा के परिदृश्य और सावधानियों पर दो सत्र लिए।
डॉ. श्वेता मिश्रा ने प्रतिभागियों को आसन, प्राणायाम और योगनिद्रा का अभ्यास कराया। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीलोय मोहंती ने पैनल चर्चा का संचालन करते हुए योग को स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र बताया। समापन पर बेस्ट ओरल और बेस्ट पोस्टर प्रेजेंटेशन देने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर डीएमएस डॉ. रवि कुमार, डॉ. अनिता रानी कंसल, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के डॉ. असीम, डॉ. सुबोध सौरभ सिंह आदि मौजूद रहे।