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हड़ताल खत्म कर निजी चिकित्सकों ने खोले क्लीनिक
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ब्यूरो /अमर उजाला, ऋषिकेश। सरकार से वार्ता के बाद निजी चिकित्सकों ने अपनी नौ दिन से चली आ रही हड़ताल आखिरकार खत्म कर दी है। रविवार को कुछ क्लीनिक खुले जबकि कुछ बंद थे। आईएमए के पदाधिकारी मुख्यमंत्री से वार्ता करने गए थे, जहां मुख्यमंत्री ने आईएमए की मांगों का परीक्षण करने के लिए वित्त मंत्री की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने को कहा है। इस पर आईएमए ने अपनी हड़ताल वापस ली है।
बीती 15 फरवरी से क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को हटाने की मांग को लेकर निजी चिकित्सकों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे। तीन दिन पूर्व त्रिवेणी घाट स्थित गांधी स्तंभ पर निजी चिकित्सकों ने सरकार के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था। निजी चिकित्सकों की मांग की तरफ सरकार ने ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण आंदोलन कहीं न कहीं कमजोर पड़ने लगा। इसी बीच सरकार ने हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में गैर पंजीकृत अस्पतालों पर सील की प्रक्रिया शुरू कर दी।
आईएमए के नगर अध्यक्ष डॉ. हरिओम प्रसाद ने बताया कि शनिवार को एक्शन कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजेश तिवारी के नेतृत्व में एक दल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया कि आईएमए से प्रस्ताव मांगा गया है, जिस पर विचार करने का आश्वासन दिया गया है। इसके लिए एक महीने की मोहलत दी गई है। इस बीच सभी चिकित्सकों को अस्थाई पंजीकरण कराना होगा।
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एक भी नर्सिंग होम एक्ट के मानकों पर फिट नहीं
आईएमए के नगर अध्यक्ष डॉ. हरिओम प्रसाद ने बताया कि तीर्थनगरी में स्थापित अस्पतालों में से एक भी संस्थान क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के मानकों को पूरा नहीं करता है। ये मानक इतने कठोर हैं कि नए सिरे से करोड़ों के निवेश का बोझ पड़ेगा। इसके अलावा बेरोजगारी भी बढ़ेगी। मसलन एक्ट के अनुसार नर्सिंग होम के लिए 5000 वर्ग फिट की भूमि आवश्यक है। इसके अलावा सभी स्टाफ का पंजीकरण कराना होगा। ऐसी सूरत में अस्पताल चलाना महंगा ही नहीं नामुमकिन सा हो गया है।
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बीती 15 फरवरी से क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को हटाने की मांग को लेकर निजी चिकित्सकों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे। तीन दिन पूर्व त्रिवेणी घाट स्थित गांधी स्तंभ पर निजी चिकित्सकों ने सरकार के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था। निजी चिकित्सकों की मांग की तरफ सरकार ने ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण आंदोलन कहीं न कहीं कमजोर पड़ने लगा। इसी बीच सरकार ने हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में गैर पंजीकृत अस्पतालों पर सील की प्रक्रिया शुरू कर दी।
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आईएमए के नगर अध्यक्ष डॉ. हरिओम प्रसाद ने बताया कि शनिवार को एक्शन कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजेश तिवारी के नेतृत्व में एक दल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया कि आईएमए से प्रस्ताव मांगा गया है, जिस पर विचार करने का आश्वासन दिया गया है। इसके लिए एक महीने की मोहलत दी गई है। इस बीच सभी चिकित्सकों को अस्थाई पंजीकरण कराना होगा।
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एक भी नर्सिंग होम एक्ट के मानकों पर फिट नहीं
आईएमए के नगर अध्यक्ष डॉ. हरिओम प्रसाद ने बताया कि तीर्थनगरी में स्थापित अस्पतालों में से एक भी संस्थान क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के मानकों को पूरा नहीं करता है। ये मानक इतने कठोर हैं कि नए सिरे से करोड़ों के निवेश का बोझ पड़ेगा। इसके अलावा बेरोजगारी भी बढ़ेगी। मसलन एक्ट के अनुसार नर्सिंग होम के लिए 5000 वर्ग फिट की भूमि आवश्यक है। इसके अलावा सभी स्टाफ का पंजीकरण कराना होगा। ऐसी सूरत में अस्पताल चलाना महंगा ही नहीं नामुमकिन सा हो गया है।