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नववर्ष आ रहा हो तो ले आओ नव क्रांति

Tue, 01 Jan 2019 02:02 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 01 Jan 2019 02:02 AM IST
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नववर्ष आ रहा हो तो ले आओ नव क्रांति
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । आवाज साहित्यिक संस्था की ओर से नववर्ष के उपलक्ष्य में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर कवियों ने नववर्ष की मंगल कामनाओं के साथ सामाजिक विषमताओं पर अपनी रचना प्रस्तुत की। आवास विकास कॉलोनी में नववर्ष की पूर्व बेला पर वरिष्ठ कवि महेश चिटकारिया के नेतृत्व में आयोजित कवि गोष्ठी में कवि आलम मुसाफिर ने ‘सोचता हूं खत उनके सारे बहा दूं पानी में, जी चाहता है अब तो आग लगा दूं पानी’ में कविता प्रस्तुत की
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वहीं कवि रामकृष्ण पोखरियाल ने ‘नववर्ष आ रहा है तो ले आओ नव क्रांति, मानव दानवता की मिट जाए भ्रांति’ कविता, कवि धनेश कोठारी ने ‘तय मानों देश लूटेगा बार बार हर बार, तब तक जब तक खड़े रहोगे चुनाव के दिन अंधों की कतारों में’, कवि नरेंद्र रयाल ने ‘हाथ बांध कर सैनिक यूं कब तक मन मचलाओगे’ कविता और कवि महेश चिटकारिया ने ‘उम्र के ढलान का एहसास दिलाता है’ कविता पेश की। इस अवसर पर शिव प्रसाद बहुगुणा, नवीन सकलानी, सतेंद्र चौहान, अशोक क्रेजी, प्रबोध उनियाल, ज्याति चिटकारिया आदि कवि मौजूद थे।
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