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अध्ययन से ज्यादा व्यावहारिक ज्ञान जरूरी : प्रो. रविकांत
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
बच्चा किसी भी विषय की पढ़ाई क्यों न कर ले, जब तक उसे व्यावहारिक ज्ञान नहीं होगा वह भविष्य में आगे नहीं बढ़ सकेगा। इसलिए किताबी अध्ययन के साथ ही व्यावहारिक ज्ञान होना भी आवश्यक है।
यह बात एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बुधवार को एम्स में आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रशिक्षण कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा कि मेडिकल की शिक्षा में नॉलेज पर तो पूरा जोर दिया जा रहा है, लेकिन विद्यार्थियों में स्किल डेवलपमेंट व मरीजों से कैसा व्यवहार किया जाए, इस ओर अपेक्षाकृत गौर नहीं किया जा रहा है। हेल्थ के परिप्रेक्ष्य में चिकित्सक व मरीज के मध्य मतभेद भी मेडिकल स्टूडेंट्स में व्यावहारिक शिक्षा के विकास को नजरअंदाज करने की मुख्य वजह है। लिहाजा इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। कार्यशाला में समन्वयक डॉ. सौरभ वार्ष्णेमय, डॉ. गीता नेगी, डीन नर्सिंग डॉ. सुरेश के शर्मा, मेडिकल एजुकेशन विभागाध्यक्ष प्रो. शालिनी राव, डॉ. अनुपमा बहादुर, डॉ. मनीषा नैथानी, डॉ. मनीषा बिष्ट, डॉ. प्रतिमा गुप्ता ने व्याख्यान दिए। कार्यशाला में पीजी स्टूडेंट्स व फैकल्टी सदस्य प्रतिभाग कर रहे हैं। इस अवसर पर डॉ. शशि प्रतीक, डॉ. पीके पांडा, डॉ. वेंकटेश एस. पाई, डॉ. मोहित आदि उपस्थित रहे।
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बच्चा किसी भी विषय की पढ़ाई क्यों न कर ले, जब तक उसे व्यावहारिक ज्ञान नहीं होगा वह भविष्य में आगे नहीं बढ़ सकेगा। इसलिए किताबी अध्ययन के साथ ही व्यावहारिक ज्ञान होना भी आवश्यक है।
यह बात एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बुधवार को एम्स में आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रशिक्षण कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा कि मेडिकल की शिक्षा में नॉलेज पर तो पूरा जोर दिया जा रहा है, लेकिन विद्यार्थियों में स्किल डेवलपमेंट व मरीजों से कैसा व्यवहार किया जाए, इस ओर अपेक्षाकृत गौर नहीं किया जा रहा है। हेल्थ के परिप्रेक्ष्य में चिकित्सक व मरीज के मध्य मतभेद भी मेडिकल स्टूडेंट्स में व्यावहारिक शिक्षा के विकास को नजरअंदाज करने की मुख्य वजह है। लिहाजा इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। कार्यशाला में समन्वयक डॉ. सौरभ वार्ष्णेमय, डॉ. गीता नेगी, डीन नर्सिंग डॉ. सुरेश के शर्मा, मेडिकल एजुकेशन विभागाध्यक्ष प्रो. शालिनी राव, डॉ. अनुपमा बहादुर, डॉ. मनीषा नैथानी, डॉ. मनीषा बिष्ट, डॉ. प्रतिमा गुप्ता ने व्याख्यान दिए। कार्यशाला में पीजी स्टूडेंट्स व फैकल्टी सदस्य प्रतिभाग कर रहे हैं। इस अवसर पर डॉ. शशि प्रतीक, डॉ. पीके पांडा, डॉ. वेंकटेश एस. पाई, डॉ. मोहित आदि उपस्थित रहे।
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