{"_id":"5c1d4b4bbdec2256986d1fff","slug":"31545423691-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर महिला अपराजिता, बशर्ते उसे सशक्त बनाएं : डॉ. अनिता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर महिला अपराजिता, बशर्ते उसे सशक्त बनाएं : डॉ. अनिता
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश। अपराजिता का अर्थ है जो कभी जीता न गया हो, अर्थात अजेय हो। अजेय है दुर्गा मां और दुर्गा मां भी एक नारी ही हैं। आज हर महिला अपराजिता है, बशर्ते उसे सशक्त बनाएं। महिला आज के दौर में सब कुछ कर सकती है। अमर उजाला ने अपराजिता मुहिम को देशभर में चलाया है। इसके लिए अमर उजाला परिवार का प्रयास वाकई काबिल ए तारीफ है। यह बात सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. अनिता चमोला ने मिशन अपराजिता-100 मिनियल स्माइल कार्यक्रम के दौरान कही।
शुक्रवार को मिशन अपराजिता के तहत ऋषिकेश पब्लिक स्कूल में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। प्रात: 11 बजे शुरू हुए कार्यक्रम में स्कूल की छात्राओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. अनिता चमोला, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका गोयल, समाजसेवी डॉ. राजे नेगी, स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर पंडित रवि शास्त्री, विद्यालय के प्रबंधक वीएन खन्ना, प्रधानाचार्य एसएस भंडारी, उप प्रधानाचार्य गीता बेदी ने संयुक्त रूप से मां शारदा के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान कक्षा सात, आठ और नौ की करीब 200 छात्राओं ने भाग लिया। इस दौरान पेटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसमें छात्राओं ने बढ़ चढ़कर प्रतिभाग करते हुए बेहद सारगर्भित चित्र उकेरे।
महिलाओं को नहीं दी जाती तवज्जो : डॉ. अनिता
ऋषिकेश। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. अनिता चमोला ने कहा कि पुराने समय से ही देखा जाता है, जिस सम्मान की हकदार महिलाएं होती है, उन्हें वह तवज्जो नहीं दी जाती है। आज देश के अंदर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की बात की जाती है, मगर बेटी को सुरक्षा कैसे मिले। इसकी बात कोई नहीं करता। उन्होंने कहा वह चार बहने और एक भाई है। माता-पिता ने कभी हम बहनों में भेदभाव नहीं किया। अक्सर देखा जाता है कि महिलाओं की क्षमता पर प्रश्नचिह्न लगाया जाता है जबकि वास्तविक सच्चाई यह है कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा एक महिला होते हुए उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने कहा कि हमें लड़का जैसा नहीं बनना, बल्कि एक अच्छा नागरिक बनना है।
विज्ञापन
समस्याएं छुपाएं नहीं, चुप्पी तोड़ें: डॉ. प्रियंका
ऋषिकेश। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका गोयल ने कहा कि अब वह समय बीत चुका है, जब लड़कियां गुप्तरोग होने पर किसी ने नहीं कहती थी। उन्होंने कहा कि मैं भी एक नारी हूं। एक डॉक्टर होने के नाते मैं कहूंगी कि लड़कियां मासिक धर्म या महावारी होने पर कपड़े की बजाए सेनेटरी नेपकिन का प्रयोग करें। आमतौर पर 10 से 13 आयुवर्ग की लड़कियों में हारमोन बदलते हैं। इस दौरान ऐसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में अपनी मां के साथ खुलकर बात करें। गुप्त रोग होने पर इसे नजर अंदाज करने की बजाए इस पर खुलकर बात करें। अपनी समस्या साझा करें।
छात्राओं के जीवंत मंचन से आंखें हुईं नम
मिशन अपराजिता कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं अनभुका भंडारी, अरुनिमा, स्वस्थिका, प्रज्ञा, आन्या, वैष्णवी, सृष्टि, संस्कृति, आकांक्षा, अनाहिता, प्रतिष्ठा ने नारी सशक्तीकरण पर नुक्कड़ नाटक पेश किया। करीब 15 से 20 मिनट के नाट्य मंचन में छात्राओं ने नारी जगत से जुड़ी हर समस्या को शिद्दत से व्यक्त किया। छात्राओं का अभिनय इतना प्रभावशाली रहा कि मंचासीन अतिथि भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। छात्राओं ने जब मंचन के दौरान सधे लहजे में... पानी से ज्यादा स्वच्छ होती हैं बेटियां, किसी भी मकान को घर बनाती है बेटियां...की संवाद अदायगी की तो तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साहवर्द्धन किया गया। नुक्कड़ नाटक के जरिए छात्राओं ने भाव उकेरा कि किस तरह समाज में नारियों को प्रताड़ना दी जाती है। नारियां जब सड़क पर चलती हैं, तो किस तरह से उन्हें फब्तियां और संदिग्ध निगाहों का सामना करना पड़ता है। नुक्कड़ नाटक की पटकथा, निर्देशन और संयोजन शिक्षिका चंद्रिका पुंज, अंजू, रूचिरा की ओर से दी गई।
पीड़िता के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की
प्रधानाचार्य एसएस भंडारी ने मिशन अपराजिता को चलाने के लिए अमर उजाला परिवार का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि अपराजिता कार्यक्रम के जरिये वाकई में समाज को नई दिशा देने की ओर अमर उजाला का प्रयास सराहनीय है। इस दौरान पौड़ी में पेट्रोल डालकर जलाई गई पीड़िता के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना के लिए सभी ने अपने स्थान से खड़े होकर ईश्वर से प्रार्थना की।
जिज्ञासा उमड़ी...सशक्तिकरण का समाधान मिला
मिशन अपराजिता के दौरान विद्यालय की छात्रा अरुनिका जोशी ने मुख्य अतिथियों से सवाल पूछा कि नारी सशक्तीकरण के लिए हमें अपने स्तर से क्या पहल करनी चाहिए। इस पर डॉ. अनिता चमोला ने कहा कि परिवार में विश्वास के जरिये आप स्वयं से पहल करें। यह जरूरी नहीं कि सशक्तीकरण के जरिये आप लड़कों जैसा बनें। आप खुद में और अपने इर्द गिर्द ऐसा माहौल तैयार करें कि लड़की होना अपने आप में विशेषता हो। इस रूप में भी आप बड़ी से बड़ी उपलब्धियों को हासिल कर सकती हैं। डा. प्रियंका गोयल ने सीधा जवाब दिया कि सर्वप्रथम आपको आत्मनिर्भर होना होगा। पूरी ताकत के साथ पढ़ाई करें। परिजनों को विश्वास दिलाएं कि आप जो भी राह चुन रही हैं या जो निर्णय ले रही हैं वह उचित है।
परिचर्चा
वर्तमान दौर में नारियां सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है। हम नारी सशक्तीकरण की बात तो करते है, मगर यहां नारियां भी कम नहीं है, नारियां उच्च पदस्थ होते हुए उसका दुरुपयोग कर रही हैं। टीवी धारावाहिक में गलत सामग्री परोसे जाने पर रोक लगनी चाहिए। इसी के माध्यम से आज नारियों में गलत संदेश जा रहा है।
- अर्चना थपलियाल, वरिष्ठ अध्यापिका, हिंदी
पुरुष प्रधान देश होने के चलते यहां महिलाओं को गलत निगाहों से देखा जाता है। नारी सशक्तीकरण की बात सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहती है, धरातल पर नहीं उतरती। हमें पहले अपने नजरिए को बदलना होगा। तभी समाज में महिलाएं भी सम्मान पा सकेंगी। उन्होंने कहा कि लड़कियों को परिधान गरिमा के अनुरूप पहनना चाहिए।
- गीता बेदी, उप प्रधानाचार्य आरपीएस
हमारे संविधान ने नागरिक को समान अधिकार दिए गए हैं। नारी को वास्तव में सशक्त करना है, तो इसके लिए स्त्री और पुरुष में अंतर से बचना होगा। यह अंतर ही लड़कियों में गलत धारणा पैदा करता है। संयुक्त परिवार को बनाए रखने में लड़कियों की अहम भूमिका होती है। इसलिए सर्वप्रथम संस्कार पर ध्यान देने की जरूरत है।
- कुसुम शास्त्री, अध्यापिका
स्वच्छता अभियान के साथ नजरिए को भी स्वच्छ बनाने की जरूरत है। मगर, इसके उलट ससुराल जाने के बाद लड़कियां दहेज अधिनियम का दुुरुपयोग कर रही हैं, जोकि बहुत गलत है। न्याय विभाग को कुछ ऐसा प्रावधान करना चाहिए, जिससे इस कानून का उल्लंघन करने पर लड़कियों को भी सजा मिल सके।
- मीनाक्षी मैठाणी, अध्यापिका
आज के समय में लड़कियां दोहरी चरित्र जी रही हैं। वह लड़की होने का गलत फायदा उठा रही हैं। वह स्वयं भले ही कुछ न हों, मगर उन्हें लड़का मोटे बैंक बैलेंस वाला चाहिए। संस्कार आज की पीढ़ी से दूूर होते जा रहे हैं। स्वतंत्रता का गलत फायदा उठाया जा रहा है। इस पर रोक लगनी चाहिए।
- सुधा वशिष्ट, अध्यापिका
नारी को लेकर हमें अपनी सोच बदलने की जरूरत है। वर्तमान में सशक्तीकरण का प्रचार-प्रसार बहुत है लेकिन उसका आउटपुट नहीं मिल पा रहा है। आज सब कहते तो हैं कि नारी का सम्मान करें मगर, प्रश्न यह उठता है कि क्या वो अपने परिवार की महिलाओं के प्रति अपना रवैया बदल रहे हैं।
- वैष्णवी बंसल, छात्रा
नारी सशक्तीकरण के प्रति जागरूक होने का समय आ गया है। हर क्षेत्र में महिलाएं बेहतर प्रदर्शन कर आसमां छू रही हैं। समाज को नारी को कमजोर नहीं समझना चाहिए। पिछड़े इलाकों में हो रहे महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों के लिए भी इस तरह की मुहिम अमर उजाला की ओर से चलाई जानी चाहिए।
- शृंगार ध्यानी, छात्रा
नारी प्रत्येक क्षेत्र में अपना पूर्ण योगदान दे रही हैं। समाज को नारी की योग्यता और क्षमता को बढ़ावा देना चाहिए न कि नारी को दुनिया के ताने-बाने के बीच उलझाकर रखना चाहिए। नारी से ही घर संसार होता है। नारी के बिना न समाज होता है और न संसार।
- प्रज्ञा शास्त्री, छात्रा
नारियों की स्थिति उभारने के लिए इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होता रहना चाहिए। इससे न केवल समाज बल्कि पूरे संसार का नारियों के प्रति दृष्टिकोण बदलेगा और लड़के-लड़कियों के बीच लोग भेदभाव करना छोड़ेंगे।
- संस्कृति ध्यानी, छात्रा
विज्ञापन
शुक्रवार को मिशन अपराजिता के तहत ऋषिकेश पब्लिक स्कूल में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। प्रात: 11 बजे शुरू हुए कार्यक्रम में स्कूल की छात्राओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. अनिता चमोला, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका गोयल, समाजसेवी डॉ. राजे नेगी, स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर पंडित रवि शास्त्री, विद्यालय के प्रबंधक वीएन खन्ना, प्रधानाचार्य एसएस भंडारी, उप प्रधानाचार्य गीता बेदी ने संयुक्त रूप से मां शारदा के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान कक्षा सात, आठ और नौ की करीब 200 छात्राओं ने भाग लिया। इस दौरान पेटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसमें छात्राओं ने बढ़ चढ़कर प्रतिभाग करते हुए बेहद सारगर्भित चित्र उकेरे।
विज्ञापन
महिलाओं को नहीं दी जाती तवज्जो : डॉ. अनिता
ऋषिकेश। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. अनिता चमोला ने कहा कि पुराने समय से ही देखा जाता है, जिस सम्मान की हकदार महिलाएं होती है, उन्हें वह तवज्जो नहीं दी जाती है। आज देश के अंदर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की बात की जाती है, मगर बेटी को सुरक्षा कैसे मिले। इसकी बात कोई नहीं करता। उन्होंने कहा वह चार बहने और एक भाई है। माता-पिता ने कभी हम बहनों में भेदभाव नहीं किया। अक्सर देखा जाता है कि महिलाओं की क्षमता पर प्रश्नचिह्न लगाया जाता है जबकि वास्तविक सच्चाई यह है कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा एक महिला होते हुए उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने कहा कि हमें लड़का जैसा नहीं बनना, बल्कि एक अच्छा नागरिक बनना है।
विज्ञापन
समस्याएं छुपाएं नहीं, चुप्पी तोड़ें: डॉ. प्रियंका
ऋषिकेश। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका गोयल ने कहा कि अब वह समय बीत चुका है, जब लड़कियां गुप्तरोग होने पर किसी ने नहीं कहती थी। उन्होंने कहा कि मैं भी एक नारी हूं। एक डॉक्टर होने के नाते मैं कहूंगी कि लड़कियां मासिक धर्म या महावारी होने पर कपड़े की बजाए सेनेटरी नेपकिन का प्रयोग करें। आमतौर पर 10 से 13 आयुवर्ग की लड़कियों में हारमोन बदलते हैं। इस दौरान ऐसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में अपनी मां के साथ खुलकर बात करें। गुप्त रोग होने पर इसे नजर अंदाज करने की बजाए इस पर खुलकर बात करें। अपनी समस्या साझा करें।
छात्राओं के जीवंत मंचन से आंखें हुईं नम
मिशन अपराजिता कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं अनभुका भंडारी, अरुनिमा, स्वस्थिका, प्रज्ञा, आन्या, वैष्णवी, सृष्टि, संस्कृति, आकांक्षा, अनाहिता, प्रतिष्ठा ने नारी सशक्तीकरण पर नुक्कड़ नाटक पेश किया। करीब 15 से 20 मिनट के नाट्य मंचन में छात्राओं ने नारी जगत से जुड़ी हर समस्या को शिद्दत से व्यक्त किया। छात्राओं का अभिनय इतना प्रभावशाली रहा कि मंचासीन अतिथि भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। छात्राओं ने जब मंचन के दौरान सधे लहजे में... पानी से ज्यादा स्वच्छ होती हैं बेटियां, किसी भी मकान को घर बनाती है बेटियां...की संवाद अदायगी की तो तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साहवर्द्धन किया गया। नुक्कड़ नाटक के जरिए छात्राओं ने भाव उकेरा कि किस तरह समाज में नारियों को प्रताड़ना दी जाती है। नारियां जब सड़क पर चलती हैं, तो किस तरह से उन्हें फब्तियां और संदिग्ध निगाहों का सामना करना पड़ता है। नुक्कड़ नाटक की पटकथा, निर्देशन और संयोजन शिक्षिका चंद्रिका पुंज, अंजू, रूचिरा की ओर से दी गई।
पीड़िता के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की
प्रधानाचार्य एसएस भंडारी ने मिशन अपराजिता को चलाने के लिए अमर उजाला परिवार का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि अपराजिता कार्यक्रम के जरिये वाकई में समाज को नई दिशा देने की ओर अमर उजाला का प्रयास सराहनीय है। इस दौरान पौड़ी में पेट्रोल डालकर जलाई गई पीड़िता के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना के लिए सभी ने अपने स्थान से खड़े होकर ईश्वर से प्रार्थना की।
जिज्ञासा उमड़ी...सशक्तिकरण का समाधान मिला
मिशन अपराजिता के दौरान विद्यालय की छात्रा अरुनिका जोशी ने मुख्य अतिथियों से सवाल पूछा कि नारी सशक्तीकरण के लिए हमें अपने स्तर से क्या पहल करनी चाहिए। इस पर डॉ. अनिता चमोला ने कहा कि परिवार में विश्वास के जरिये आप स्वयं से पहल करें। यह जरूरी नहीं कि सशक्तीकरण के जरिये आप लड़कों जैसा बनें। आप खुद में और अपने इर्द गिर्द ऐसा माहौल तैयार करें कि लड़की होना अपने आप में विशेषता हो। इस रूप में भी आप बड़ी से बड़ी उपलब्धियों को हासिल कर सकती हैं। डा. प्रियंका गोयल ने सीधा जवाब दिया कि सर्वप्रथम आपको आत्मनिर्भर होना होगा। पूरी ताकत के साथ पढ़ाई करें। परिजनों को विश्वास दिलाएं कि आप जो भी राह चुन रही हैं या जो निर्णय ले रही हैं वह उचित है।
परिचर्चा
वर्तमान दौर में नारियां सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है। हम नारी सशक्तीकरण की बात तो करते है, मगर यहां नारियां भी कम नहीं है, नारियां उच्च पदस्थ होते हुए उसका दुरुपयोग कर रही हैं। टीवी धारावाहिक में गलत सामग्री परोसे जाने पर रोक लगनी चाहिए। इसी के माध्यम से आज नारियों में गलत संदेश जा रहा है।
- अर्चना थपलियाल, वरिष्ठ अध्यापिका, हिंदी
पुरुष प्रधान देश होने के चलते यहां महिलाओं को गलत निगाहों से देखा जाता है। नारी सशक्तीकरण की बात सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहती है, धरातल पर नहीं उतरती। हमें पहले अपने नजरिए को बदलना होगा। तभी समाज में महिलाएं भी सम्मान पा सकेंगी। उन्होंने कहा कि लड़कियों को परिधान गरिमा के अनुरूप पहनना चाहिए।
- गीता बेदी, उप प्रधानाचार्य आरपीएस
हमारे संविधान ने नागरिक को समान अधिकार दिए गए हैं। नारी को वास्तव में सशक्त करना है, तो इसके लिए स्त्री और पुरुष में अंतर से बचना होगा। यह अंतर ही लड़कियों में गलत धारणा पैदा करता है। संयुक्त परिवार को बनाए रखने में लड़कियों की अहम भूमिका होती है। इसलिए सर्वप्रथम संस्कार पर ध्यान देने की जरूरत है।
- कुसुम शास्त्री, अध्यापिका
स्वच्छता अभियान के साथ नजरिए को भी स्वच्छ बनाने की जरूरत है। मगर, इसके उलट ससुराल जाने के बाद लड़कियां दहेज अधिनियम का दुुरुपयोग कर रही हैं, जोकि बहुत गलत है। न्याय विभाग को कुछ ऐसा प्रावधान करना चाहिए, जिससे इस कानून का उल्लंघन करने पर लड़कियों को भी सजा मिल सके।
- मीनाक्षी मैठाणी, अध्यापिका
आज के समय में लड़कियां दोहरी चरित्र जी रही हैं। वह लड़की होने का गलत फायदा उठा रही हैं। वह स्वयं भले ही कुछ न हों, मगर उन्हें लड़का मोटे बैंक बैलेंस वाला चाहिए। संस्कार आज की पीढ़ी से दूूर होते जा रहे हैं। स्वतंत्रता का गलत फायदा उठाया जा रहा है। इस पर रोक लगनी चाहिए।
- सुधा वशिष्ट, अध्यापिका
नारी को लेकर हमें अपनी सोच बदलने की जरूरत है। वर्तमान में सशक्तीकरण का प्रचार-प्रसार बहुत है लेकिन उसका आउटपुट नहीं मिल पा रहा है। आज सब कहते तो हैं कि नारी का सम्मान करें मगर, प्रश्न यह उठता है कि क्या वो अपने परिवार की महिलाओं के प्रति अपना रवैया बदल रहे हैं।
- वैष्णवी बंसल, छात्रा
नारी सशक्तीकरण के प्रति जागरूक होने का समय आ गया है। हर क्षेत्र में महिलाएं बेहतर प्रदर्शन कर आसमां छू रही हैं। समाज को नारी को कमजोर नहीं समझना चाहिए। पिछड़े इलाकों में हो रहे महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों के लिए भी इस तरह की मुहिम अमर उजाला की ओर से चलाई जानी चाहिए।
- शृंगार ध्यानी, छात्रा
नारी प्रत्येक क्षेत्र में अपना पूर्ण योगदान दे रही हैं। समाज को नारी की योग्यता और क्षमता को बढ़ावा देना चाहिए न कि नारी को दुनिया के ताने-बाने के बीच उलझाकर रखना चाहिए। नारी से ही घर संसार होता है। नारी के बिना न समाज होता है और न संसार।
- प्रज्ञा शास्त्री, छात्रा
नारियों की स्थिति उभारने के लिए इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होता रहना चाहिए। इससे न केवल समाज बल्कि पूरे संसार का नारियों के प्रति दृष्टिकोण बदलेगा और लड़के-लड़कियों के बीच लोग भेदभाव करना छोड़ेंगे।
- संस्कृति ध्यानी, छात्रा