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शिविर में 150 लोगों ने किया रक्तदान
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में विश्व थैलीसीमिया -डे के अवसर पर रक्तदान शिविर का आयेजन किया गया। शिविर में 150 लोगों ने रक्तदान महादान किया। बृहस्पतिवार को एम्स व डिस्ट्रिक्ट हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजित शिविर का एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत व सचिव रेडक्रॉस डॉ. एमएस अंसारी ने शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रो. रवि कांत ने बताया कि ग्लोबिन जीन में दोष के कारण हीमोग्लोबिन के लिए पर्याप्त मात्रा में ग्लोबिन की कमी हो जाती है। उन्होंने लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करते हुए बताया कि इस कमी की आपूर्ति केवल रक्त द्वारा ही हो सकती है।
उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया सबसे अधिक पाया जाने वाली अनुवांशिक अल्प रक्तता का रोग है। इस जटिल व गंभीर रोग का जल्द उपचार नहीं किया जाए तो इससे ग्रस्त व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। संस्थान में इस बीमारी के उपचार की सुविधा उपलब्ध है, इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की गई है, जिससे रोगियों को उपचार के लिए अन्यत्र परेशान नहीं होना पड़े।
डॉ. उत्तम कुमार नाथ ने लोगों को थैलीसीमिया बीमारी के बारे में जागरुक किया और उसकी टेस्टिंग संबंधी जानकारी दी। इस दौरान थैलीसीमिया से ग्रस्त बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों ने कई रचनात्मक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, संस्थान की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. गीता नेगी, प्रोफेसर मनोज गुप्ता, प्रो. लतिका मोहन, डॉ. प्रतिमा गुप्ता, डॉ. अनुभा अग्रवाल, सुषमा मल्होत्रा, केएस मर्तोलिया, डीईआईसी के प्रबंधक रत्नानिधि आदि मौजूद थे।
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उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया सबसे अधिक पाया जाने वाली अनुवांशिक अल्प रक्तता का रोग है। इस जटिल व गंभीर रोग का जल्द उपचार नहीं किया जाए तो इससे ग्रस्त व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। संस्थान में इस बीमारी के उपचार की सुविधा उपलब्ध है, इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की गई है, जिससे रोगियों को उपचार के लिए अन्यत्र परेशान नहीं होना पड़े।
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डॉ. उत्तम कुमार नाथ ने लोगों को थैलीसीमिया बीमारी के बारे में जागरुक किया और उसकी टेस्टिंग संबंधी जानकारी दी। इस दौरान थैलीसीमिया से ग्रस्त बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों ने कई रचनात्मक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, संस्थान की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. गीता नेगी, प्रोफेसर मनोज गुप्ता, प्रो. लतिका मोहन, डॉ. प्रतिमा गुप्ता, डॉ. अनुभा अग्रवाल, सुषमा मल्होत्रा, केएस मर्तोलिया, डीईआईसी के प्रबंधक रत्नानिधि आदि मौजूद थे।
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