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जागरुकता से नियंत्रित किया जा सकता है भूस्खलन
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । पीजी ऑटोनोमस महाविद्यालय में भू-विज्ञान विभाग की ओर से भूस्खलन व न्यूनीकरण विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस मौके पर छात्रों को भूस्खलन के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी गई। मंगलवार को महाविद्यालय सभागार हॉल में आयोजित कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ प्रो. विजय कुमार गैरोला ने भूस्खलन व न्यूनीकरण विषय पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक व मानवीय दोनों कारणों से होने वाले भूस्खलन और उनसे होने वाले जन धन का नुकसान अति चिंतनीय विषय है।
प्राकृतिक कारणों से होने वाले नुकसान को कई उपायों जैसे रिटेनिंग वाल, उचित जल निकासी, एंकरिंग, राक बोल्टिंग आदि से कम किया जा सकता है। मानवीय कारणों से होने वाले भूस्खलन को लोगों को जागरूक करके व नियमों की जानकारी देकर कम किया जा सकता है। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एनपी माहेश्वरी ने बताया कि यह व्याख्यान समाज को जागरूक करने के लिए बहुत उपयोगी है। कहा कि भविष्य में भी महाविद्यालय में इस तरह के व्याख्यान कराए जाएंगे।
भू विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आरए सिंह ने बताया कि संपूर्ण हिमालय क्षेत्र जहां भूगर्भीय प्रक्रियाएं सक्रिय हैं, वहां पर भूस्खलन के कारणों का विस्तृत सर्वेक्षण कर भौतिक जैविक व तकनीकी उपाय करने के बाद ही कोई निर्माण कार्य कराना चाहिए। इस अवसर पर डॉ. दयाधर दिक्षित, प्रो. आरडी गौड़, यूएस रावत, किरन त्रिपाठी, शरद त्रिपाठी, आरएस राणा, डीआर जोशी, यशोदा बौंठियाल, राजेश्वरी आदि मौजूद थे।
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प्राकृतिक कारणों से होने वाले नुकसान को कई उपायों जैसे रिटेनिंग वाल, उचित जल निकासी, एंकरिंग, राक बोल्टिंग आदि से कम किया जा सकता है। मानवीय कारणों से होने वाले भूस्खलन को लोगों को जागरूक करके व नियमों की जानकारी देकर कम किया जा सकता है। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एनपी माहेश्वरी ने बताया कि यह व्याख्यान समाज को जागरूक करने के लिए बहुत उपयोगी है। कहा कि भविष्य में भी महाविद्यालय में इस तरह के व्याख्यान कराए जाएंगे।
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भू विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आरए सिंह ने बताया कि संपूर्ण हिमालय क्षेत्र जहां भूगर्भीय प्रक्रियाएं सक्रिय हैं, वहां पर भूस्खलन के कारणों का विस्तृत सर्वेक्षण कर भौतिक जैविक व तकनीकी उपाय करने के बाद ही कोई निर्माण कार्य कराना चाहिए। इस अवसर पर डॉ. दयाधर दिक्षित, प्रो. आरडी गौड़, यूएस रावत, किरन त्रिपाठी, शरद त्रिपाठी, आरएस राणा, डीआर जोशी, यशोदा बौंठियाल, राजेश्वरी आदि मौजूद थे।
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