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बालिका शिक्षा के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत
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ब्यूरो/अमर उजाला, मुनिकीरेती । महिला सशक्तीकरण के लिए बालिकाओं का शिक्षित होना आवश्यक है। इसके लिए शासन स्तर पर बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए विशेष कदम उठाने की जरूरत है। वर्तमान में लड़कियां शिक्षा के क्षेत्र में लड़कों की अपेक्षा ज्यादा परचम लहरा रही हैं। मंगलवार को ढालवाला में आयोजित अमर उजाला की ओर से मिशन अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत बालिका शिक्षा को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ समाजसेवी उर्मिला कोहली ने किया।
उन्होंने कहा कि बालिका की शिक्षा की बुनियाद मजबूत होगी तो आगे चलकर वह अपने अधिकारों के प्रति सजगता के साथ सामना करेगी। अक्सर देखा जाता है कि अनपढ़ महिलाएं ज्यादातर शोषण का शिकार होती हैं। उन्हें अपने अधिकारों का ज्ञान नहीं होता है। तीर्थनगरी क्षेत्र की वर्तमान में आबादी काफी हद तक बढ़ गई है, लेकिन इस क्षेत्र में बालिकाओं के लिए एक भी कन्या महाविद्यालय नहीं है। विगत कई वर्षों से क्षेत्र में कन्या महाविद्यालय खोलने की मांग की जा रही है। इतने बड़े क्षेत्र में कन्या महाविद्यालय न होने यहां की बालिकाओं को दूर दराज के महाविद्यालयों में शरण लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का खामियाजा यहां की बालिकाओं को भुगतना पड़ रहा है।
- वर्तमान में लड़कियां शिक्षा के प्रति ज्यादा गंभीर हैं, जो पढ़ लिखकर हर क्षेत्र में अपना सहयोग देकर देश को मजबूत करने का काम कर रही हैं। लड़कियां शिक्षित होकर विभिन्न क्षेत्रों सहित देश की सीमाओं पर भी पहरा दे रही हैं। यह हम सब के लिए गौरव की बात है।
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- निसी बलूनी गृहणी
- बालिका शिक्षा के लिए शासन स्तर पर बड़े-बड़े दावे तो किए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं हो पाता है। सरकार को बालिका शिक्षा के प्रति गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है। इससे अधिक से अधिक बालिकाएं शिक्षित हो सकेंगी।
- रेखा देवी गृहणी
- सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत सबको शिक्षा देने के लिए योजना तो बनाई है। हकीकत में इसका पालन कितना हो रहा है इससे सरकार खुद अनभिज्ञ है। अभी गरीब तबके की बालिकाएं अक्सर कूड़ा बीनते और मजदूरी करते आमतौर पर देखी जा सकती हैं।
- मीना देवी गृहणी
- जनजागरुकता के अभाव में अभी कई परिवार अपनी बेटियों को ज्यादा पढ़ाने से हिचकिचाते हैं। कई लोगों की अभी भी सोच है कि बेटी पढ़ लिखकर क्या करेगी, जब उसे घर का ही काम करना है। हमको यह सोच बदलने की खास जरूरत है।
- सरिता देवी गृहणी
- तीर्थनगरी क्षेत्र तीन जिलों का संगम है। वर्तमान में यहां की आबादी लगभग तीन लाख से ऊपर हो गई है। इतनी बड़ी आबादी के बीच एक भी कन्या महाविद्यालय न होना यहां की बालिकाओं के साथ अन्याय है।
- चंद्रेश्वरी देवी गृहणी
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उन्होंने कहा कि बालिका की शिक्षा की बुनियाद मजबूत होगी तो आगे चलकर वह अपने अधिकारों के प्रति सजगता के साथ सामना करेगी। अक्सर देखा जाता है कि अनपढ़ महिलाएं ज्यादातर शोषण का शिकार होती हैं। उन्हें अपने अधिकारों का ज्ञान नहीं होता है। तीर्थनगरी क्षेत्र की वर्तमान में आबादी काफी हद तक बढ़ गई है, लेकिन इस क्षेत्र में बालिकाओं के लिए एक भी कन्या महाविद्यालय नहीं है। विगत कई वर्षों से क्षेत्र में कन्या महाविद्यालय खोलने की मांग की जा रही है। इतने बड़े क्षेत्र में कन्या महाविद्यालय न होने यहां की बालिकाओं को दूर दराज के महाविद्यालयों में शरण लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का खामियाजा यहां की बालिकाओं को भुगतना पड़ रहा है।
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- वर्तमान में लड़कियां शिक्षा के प्रति ज्यादा गंभीर हैं, जो पढ़ लिखकर हर क्षेत्र में अपना सहयोग देकर देश को मजबूत करने का काम कर रही हैं। लड़कियां शिक्षित होकर विभिन्न क्षेत्रों सहित देश की सीमाओं पर भी पहरा दे रही हैं। यह हम सब के लिए गौरव की बात है।
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- निसी बलूनी गृहणी
- बालिका शिक्षा के लिए शासन स्तर पर बड़े-बड़े दावे तो किए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं हो पाता है। सरकार को बालिका शिक्षा के प्रति गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है। इससे अधिक से अधिक बालिकाएं शिक्षित हो सकेंगी।
- रेखा देवी गृहणी
- सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत सबको शिक्षा देने के लिए योजना तो बनाई है। हकीकत में इसका पालन कितना हो रहा है इससे सरकार खुद अनभिज्ञ है। अभी गरीब तबके की बालिकाएं अक्सर कूड़ा बीनते और मजदूरी करते आमतौर पर देखी जा सकती हैं।
- मीना देवी गृहणी
- जनजागरुकता के अभाव में अभी कई परिवार अपनी बेटियों को ज्यादा पढ़ाने से हिचकिचाते हैं। कई लोगों की अभी भी सोच है कि बेटी पढ़ लिखकर क्या करेगी, जब उसे घर का ही काम करना है। हमको यह सोच बदलने की खास जरूरत है।
- सरिता देवी गृहणी
- तीर्थनगरी क्षेत्र तीन जिलों का संगम है। वर्तमान में यहां की आबादी लगभग तीन लाख से ऊपर हो गई है। इतनी बड़ी आबादी के बीच एक भी कन्या महाविद्यालय न होना यहां की बालिकाओं के साथ अन्याय है।
- चंद्रेश्वरी देवी गृहणी