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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Possible to predict flash floods

अब 24 घंटे पहले बादल फटने की भविष्यवाणी संभव

Tue, 10 May 2016 04:02 PM IST
अंकित कुमार गर्ग / अमर उजाला, रुड़की
अंकित कुमार गर्ग / अमर उजाला, रुड़की Updated Tue, 10 May 2016 04:02 PM IST
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Possible to predict flash floods
बादल - फोटो : demo

वैज्ञानिकों की माने तो उपग्रह तकनीक से 24 घंटे पहले भारी बारिश और बादल फटने की सटीक भविष्यवाणी संभव है।

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अंतरराष्ट्रीय सेटेलाइट की मदद से इसमें लगे माइक्रोवेव सेंसर प्रत्येक आधा घंटे के अंतराल में अलग-अलग फ्रिक्वेंसी और वेवलैंथ पर बादलों के बीच से भी डाटा उपलब्ध कराते हैं। जिसके जरिए सटीक भविष्यवाणी संभव है। इस तकनीक के इस्तेमाल के लिए हाल ही में आईआईटी वैज्ञानिक की ओर से केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय को एक प्रस्ताव भी भेजा गया है।

आईआईटी के वैज्ञानिक प्रो. नयन शर्मा ने बताया कि विगत 14 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन विभाग ने अर्ली वार्निंग सिस्टम तैयार करने पर बैठक हुई थी। जिसमें उन्होंने जापान और नासा के अंतरराष्ट्रीय सेटेलाइट मिशन जीपीएम (ग्लोबल प्रेसीपिटेशन मीजरमेंट) की मदद से भारी बारिश और बादल फटने के पूर्वानुमान की जानकारी दी थी।
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इस तकनीक से अंतरितक्ष में स्थित नौ सेटेलाइट के माइक्रोवेव सेंसर से प्रत्येक आधा घंटे में डाटा मिलेगा। जिसका विशेषण कर बाढ़ और बादल फटने की घटना की एक दिन पहले जानकारी दी जा सकती है। इसके लिए सेटेलाइट डाटा को भारत के एल्गोरिद्म के अनुरूप डिजाइन किया जाएगा।
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जो उत्तराखंड, हिमाचल, काश्मीर सहित पूरे देश में बादल फटने जैसी घटनाओं से आगह कर सकेगा। वैज्ञानिक के अनुसार यह तकनीक आईएमडी से एडवांस होगी। क्योंकि आईएमडी दिन में तीन बार लिए गए डाटा की माडलिंग पर अनुमान जारी करती है।

जबकि जीपीएम तकनीक से किसी भी क्षेत्र में प्रत्येक चार किलोमीटर दिन में 48 बार भी डाटा हासिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि संबंधित तकनीक के बाबत एक प्रस्ताव 29 मार्च को केंद्र सरकार को भेजा गया था। अभी तक केंद्र की ओर से जवाब नहीं मिला है।

चार किलोमीटर ऊंचाई के बादल मचाते हैं तबाही
मौसम की प्रकृति में तीव्र अंतर आने के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में इस घटना की आशंका बढ़ती है। वैज्ञानिक प्रो. नयन शर्मा के अनुसार आकाश में चार से किलोमीटर ऊंचाई तक अधिक नमी वाले बादलों का जमा होना और ऊंचाई के साथ तापमान में गिरावट के कारण तीव्र बारिश बादल फटने की घटना होती है।


पहाड़ी क्षेत्र में बादल फटने की घटना का एक कारण यह भी है कि हवा के पहाड़ से टकराने के कारण ज्यादा नमी वाले बादलों में विक्षोभ उत्पन्न हो जाता है। जो अचानक नीचे की ओर पानी के रूप में फट जाता है।

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