यारसागंबू खोजने वालों की डर से नीचे उतरे जंगली जानवर
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यारसागंबू की तलाश के लिए हिमालयी बुग्यालों में पहुंचे हजारों लोगों की वजह से सबसे बड़ा खतरा जंगली जानवरों के लिए होने लगा है। उनके प्रवास पर बेतहाशा ढंग से मानव हस्तक्षेप होने के कारण बुग्यालों में रहने वाले जानवर अपना घर छोड़कर भागने लगे हैं। इनको पहली बार निचली घाटियों में देखा गया है। गोरीपार के आलमदारमा में जब करीब एक दर्जन से ज्यादा थार (झालर) जानवरों का झुंड दिखाई दिया तो लोग हैरत में आ गए। यह जानवर बेहद शर्मीला होता है और लोगों को देखकर भागता है। यारसागंबू की खोज करने वाले थार के आवास वाले इलाकों तक पहुंच जाते हैं। थार को स्थानीय लोग झालर के नाम से भी जानते हैं। यह मृग का ही एक प्रकार होता है। बुग्यालों में हरी पत्तियों और बर्फ में उगने वाली पत्तियों को खाते हैं।
मुनस्यारी तहसील में आलमदारमा, रालम और बुईपातो इलाके में पहली बार लोगों ने थार जानवरों का झुंड देखा है। लोगों ने बताया कि इतनी नीचे तक कभी भी इन जीवों को नहीं देखा गया है। इससे साफ है कि इन जीवों को अपने परंपरागत आवास में खतरा होने लगा है। यह भी बताया गया कि कुछ जीव तो बुग्यालों से ऊपर हिमालयी क्षेत्रों को निकल जाते हैं, जबकि कुछ जीव चारे और भोजन की तलाश में निचले इलाकों में उतर आते हैं। आलमदारमा में इन जीवों को सामने से देखने वाले युवा हीरा सिंह चिराल का कहना है कि करीब छह हजार फीट तक पहली बार थार जीव नजर आया है, जबकि इनका आवास आठ से दस हजार फीट की ऊंचाई पर होता है।
यह गंभीर खतरे का संकेत
उच्च हिमालयी क्षेत्रों के बारे में जानकारी रखने वाले मोनाल संस्था के सचिव सुरेंद्र पंवार ने कहा कि यारसागंबू खोजने के लिए भारी संख्या में लोगों के जाने से जंगली जानवरों को खतरा होता है। कई जानवरों को तो लोग मार देते हैं, जबकि कुछ जानवर भागकर अन्यत्र निकल जाते हैं। वह कहते हैं कि बुग्यालों में मानव हस्तक्षेप बढ़ना अच्छे लक्षण नहीं हैं। यह आने वाले समय के लिए गंभीर खतरे का संकेत हैं।
बुग्यालों में सुरक्षा के इंतजाम नहीं
छिपलाकेदार, नागनीधूरा, रालम, गोल्फा के बुग्यालों में इस समय हजारों लोग यारसागंबू की खोज में गए हैं, लेकिन वहां तक प्रशासन की कोई पहुंच नहीं होती। इन इलाकों में मानव और जीवों के बीच संघर्ष होता रहता है। अक्सर लोग भी आपस में भिड़ जाते हैं, लेकिन वहां पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।