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Uttarakhand: आग की चपेट में उत्तराखंड के जंगल, पिथौरागढ़ में 33 हेक्टेयर वन जलकर खाक; जानें इसके पीछे का कारण
Sat, 13 Apr 2024 07:21 PM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
Published by: हीरा मेहरा
Updated Sat, 13 Apr 2024 07:21 PM IST
सार
पिथौरागढ़ जिले में लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ती जा रही है। जिले में चारों ओर जंगल आग से धधक रहे हैं।
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आग की चपेट में उत्तराखंड के जंगल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पिथौरागढ़ जिले में लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ती जा रही है। जिले में चारों ओर जंगल आग से धधक रहे हैं। जिससे धुंध छाई हुई है। धुंध के कारण अस्पताल में आंखों में एलर्जी और दमा के रोगियों की संख्या बढ़ रही है।
पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय के आसपास, कनालीछीना, डीडीहाट, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट, थल, धारचूला और मुनस्यारी सहित कई अन्य क्षेत्रों में जंगल आग से धधक रहे हैं। जंगलों की आग से वन संपदा को नुकसान और जंगली जानवरों की मौत हो रही है। अभी तक जिले भर में 33 हेक्टेयर जंगल आग से प्रभावित हो गया है। जिसमें वन विभाग को करीब 85000 रुपये का नुकसान हो गया है। आग लगने की अधिकांश घटनाएं सिविल वनों में हुई है। आरक्षित वनों में घटनाएं अपेक्षाकृत कम हो रही है। वर्तमान में वन विभाग के 150 से अधिक कर्मचारियों के चुनाव ड्यूटी में होने के कारण जंगलों की आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। दिन में तेज हवाएं चलने के कारण आग और उग्र होती जा रही है। लोगों ने वन विभाग से जंगलों में लगी आग पर काबू पाने की मांग की है।
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पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय के आसपास, कनालीछीना, डीडीहाट, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट, थल, धारचूला और मुनस्यारी सहित कई अन्य क्षेत्रों में जंगल आग से धधक रहे हैं। जंगलों की आग से वन संपदा को नुकसान और जंगली जानवरों की मौत हो रही है। अभी तक जिले भर में 33 हेक्टेयर जंगल आग से प्रभावित हो गया है। जिसमें वन विभाग को करीब 85000 रुपये का नुकसान हो गया है। आग लगने की अधिकांश घटनाएं सिविल वनों में हुई है। आरक्षित वनों में घटनाएं अपेक्षाकृत कम हो रही है। वर्तमान में वन विभाग के 150 से अधिक कर्मचारियों के चुनाव ड्यूटी में होने के कारण जंगलों की आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। दिन में तेज हवाएं चलने के कारण आग और उग्र होती जा रही है। लोगों ने वन विभाग से जंगलों में लगी आग पर काबू पाने की मांग की है।
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इसी तरह लगी रही आग तो होगा चारे का संकट
पिथौरागढ़ जिले के पशु पालक चारे के लिए जंगलों पर निर्भर हैं। इसी तरह अगर आग लगी रही तो भविष्य में चारे का संकट पैदा हो सकता है। क्याेंकि बारिश नहीं होने के कारण जंगलों की हरियाली पूरी तरह सूख चुकी है। चीड़ के पत्तों के सूखकर गिरने से आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
पिथौरागढ़ जिले के पशु पालक चारे के लिए जंगलों पर निर्भर हैं। इसी तरह अगर आग लगी रही तो भविष्य में चारे का संकट पैदा हो सकता है। क्याेंकि बारिश नहीं होने के कारण जंगलों की हरियाली पूरी तरह सूख चुकी है। चीड़ के पत्तों के सूखकर गिरने से आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
वन कर्मियों के चुनाव ड्यूटी में होने से आग की घटनाओं पर रोक लगाने में दिक्क्त हो रही है। जहां भी आग की सूचना मिल रही है। वहां टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही है।
- आशुतोष सिंह, डीएफओ पिथौरागढ़।
- आशुतोष सिंह, डीएफओ पिथौरागढ़।