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दो साल पांच महीने बाद बना झूलापुल
ब्यूरो/अमर उजाला, जौलजीबी/धारचूला, पिथौरागढ़
Updated Sun, 15 Nov 2015 03:30 PM IST
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शनिवार दोपहर 2.34 बजे का समय जौलजीबी क्षेत्र ही नहीं महाकाली के उस पार नेपाल के लोगों के लिए सुकून देने वाला रहा। नेपाल सरकार की ओर से 80 लाख (भारतीय मुद्रा करीब 50 लाख) रुपये की लागत से बनाए गए झूलापुल में आवाजाही शुरू हो गई। वर्ष 2013 की आपदा में यह पुल बह गया था, जो दो साल पांच महीने बाद बना है। पुल बनने पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नेपाल सरकार को बधाई दी। कहा कि नेपाल सरकार के सहयोग से एक और झूलापुल नेपाल सीमा पर बनाया जाएगा।
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जमीन से 60 फीट की ऊंचाई पर बना झूलापुल 180 मीटर लंबा और 4 फीट चौड़ा है। पुल को बनाने के लिए बेहतरीन तकनीक का प्रयोग किया गया है। पुल का आधार जौलजीबी बाजार के पास तो वहां नेपाल की पहाड़ी पर है, जिससे ये पुल भविष्य में कैसी भी आपदा आए, उसकी चपेट में नहीं आएगा।
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शनिवार सुबह से लोग पुल से आवाजाही शुरू होने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन दोपहर तक पुल से आवाजाही शुरू नहीं हुई। दोनों ओर लोगों की लंबी कतार लग गई थी। दोपहर में एसएसबी के कमांडेंट मानवेंद्र को नेपाल शासन की ओर से पुल से आवागमन शुरू करने का औपचारिक पत्र मिला, उसके बाद पुल पर आवागमन शुरू हुआ। पुल पर तैनात एसएसबी के एएसआई हरजीत सिंह ने बताया कि मेला अवधि में सुबह छह से रात 8 बजे तक, जबकि अन्य दिनों में सुबह 6 से शाम 6 बजे तक पुल खुला रहेगा।
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दोनों देशों के नागरिक थे परेशान
17 जून 2013 के जल प्रलय में जौलजीबी में महाकाली में भारत-नेपाल को जोड़ने के लिए नेपाल की ओर से बनाया गया झूलापुल बह गया था। तब से भारतीय क्षेत्र के लोगों के साथ ही नेपाल के नागरिकों को भी भारी दिक्कतें हो रही थी, इससे भारत-नेपाल का व्यापार भी प्रभावित हो रहा था। आवागमन के लिए लोगों को 9 किमी दूर बलुवाकोट से घूमकर जाना पड़ रहा था। समाजसेवी लीला बनग्याल ने कहा कि पुल से आवागमन शुरू होने से दोनों देशों के नागरिकों की दिक्कतें कम होंगी।