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ठुलीगाड़ पंपिंग पेयजल योजना का पानी सूखा
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sun, 24 Apr 2016 10:08 PM IST
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पानी सूखा
- फोटो : अमर उजाला
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ठुलीगाड़ पंपिंग पेयजल योजना का पानी इस बार अप्रैल में ही सूख गया है। इस पंपिंग योजना के ठीक ऊपर सेना की आवासीय कालोनी का निर्माण हो रहा है। निर्माण के काम के लिए पंपिंग योजना को आने वाला पानी पहले ही रोक दिया गया है। इस समय ठुलीगाड़ पंपिंग योजना को पानी नहीं मिल पा रहा है। रात के समय थोड़ा पानी मिलने पर सिर्फ एक पंप चलाया जा रहा है और पूरे 24 घंटे में एक लाख लीटर पानी भी एकत्र नहीं हो पा रहा है। योजना से नगर के 40 फीसदी हिस्से को पानी मिलता था। अब इनके लिए वैकल्पिक इंतजाम करने पड़ रहे हैं।
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ठुलीगाड़ पंपिंग पेयजल योजना पर मंडरा रहे इन खतरों को लेकर अमर उजाला ने करीब छह माह पहले ही आगाह कर दिया था। बारिश के सीजन में ठुलीगाड़ में पर्याप्त पानी रहता है। इससे सेना के निर्माण कार्य और पंपिंग योजना का संचालन आसानी से हो जाता है। गर्मियों के सीजन में एक तो ठुलीगाड़ का पानी कम हो जाता है दूसरा सेना को अपने निर्माण कार्य के लिए ज्यादा जरूरत रहती है। प्रशासन ने इस मुद्दे को लेकर सेना के अधिकारियों के साथ दो बार बैठकें भी की, लेकिन ठोस समाधान नहीं निकल पाया। सेना के अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि वह पंपिंग योजना को जाने वाले पानी में किसी तरह की रुकावट नहीं डालेंगे पर व्यवहार में ऐसा नहीं हो रहा है।
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जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आरके वर्मा ने बताया कि ठुलीगाड़ पंपिंग पेयजल योजना को पानी नहीं मिल रहा है। उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कहा है कि इस समस्या का समाधान निकाला जाए और पंपिंग योजना को पानी उपलब्ध कराया जाए।
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योजना निर्माण के समय ध्यान नहीं दिया
ठुलीगाड़ पंपिंग पेयजल योजना का निर्माण वर्ष 2000 में किया गया था। सैन्य क्षेत्र में बहने वाली ठुलीगाड़ से इस योजना के निर्माण के समय योजनाकारों ने यह ध्यान नहीं दिया कि सेना भविष्य में अपनी जरूरतों के लिए पानी का उपयोग कर सकती है। ठुलीगाड़ पंपिंग योजना से ठीक ऊपर का इलाका सेना के अधीन है और ठुलीगाड़ उसी इलाके से बहकर आती है। यदि प्रशासन इस समस्या का समाधान नहीं निकाल पाया तो पंपिंग योजना को मृतप्राय घोषित करने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा।
अब घाट पंपिंग योजना पर निर्भरता बढ़ी
पिथौरागढ़ नगर के लिए बनी घाट पेयजल पंपिंग योजना काफी पहले दम तोड़ चुकी थी। इस योजना से पानी को जुगाड़ से जुटाया जाता है। कभी इस योजना की पाइप फट जाती है तो कभी बिजली की लाइन टूट जाती है। इस कारण महीने में दो-चार बार योजना से पानी की सप्लाई ठप होती रहती है। इसी जर्जर हालत में पहुंच चुकी पेयजल योजना पर ही अब नगर की एक लाख आबादी का भार आ गया है।