Pithoragarh: पहाड़ के गांव तो खूबसूरत...लेकिन वहां के हालात बयां करते हैं लोगों का दर्द, जानिए पभ्या का हाल
गणाई गंगोली में एक तरफ सरकार रिवर्स पलायन की बात करती है लेकिन इससे पहले ज्यादा जरूरी है कि जो लोग गांव में हैं, उन्हें पलायन करने से रोका जाए। यह तब संभव है जब उन्हें गांव में ही सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य बिजली पानी की सुविधाएं मिलेंगी।
विस्तार
पिथौरागढ़ जिले के गणाई गंगोली में एक तरफ सरकार रिवर्स पलायन की बात करती है लेकिन इससे पहले ज्यादा जरूरी है कि जो लोग गांव में हैं, उन्हें पलायन करने से रोका जाए। यह तब संभव है जब उन्हें गांव में ही सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य बिजली पानी की सुविधाएं मिलेंगी। इन सुविधाओं के अभाव में ही लोग अपना घरबार छोड़ रहे हैं।
गणाई गंगोली के पभ्या गांव की ही बात करें तो इन सुविधाओं के अभाव में 104 परिवारों वाले इस गांव से 60 परिवार पलायन कर चुके हैं। इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी कि इस गांव के लोगों ने आज तक अपने विधायक या सांसद को नहीं देखा है।
पभ्या गांव में मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण एक-एक कर लोगों ने गांव छोड़ना शुरू किया तो यह सिलसिला फिर थमा नहीं। जो परिवार गांव में रह रहे हैं, उन्हें तमाम परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव से पहले वोट के लिए कई नेता तो आते हैं लेकिन चुनाव के बाद न तो कोई विधायक और ना ही कोई सांसद यहां आया। बलवंत डोबाल, केशर सिंह और बबलू सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पभ्या गांव में किसी तरह की सुविधा नहीं है। वर्षों से मांग करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई है।
तीन किमी दूर से ढोते हैं पानी
पभ्या गांव में पानी नहीं आता है। 1988 में 25 किलोमीटर दूर बासीखेत से बनीं पेयजल योजना जगह-जगह टूट चुकी है। ग्रामीण अपने संसाधनों से पानी की लाइन की मरम्मत करते हैं। अगर पेयजल लाइन टूट जाती है तो गांव में 20 से 25 दिनों तक पानी नहीं आता है। इस दौरान ग्रामवासियों को तीन किलोमीटर दूर से पानी ढोना पड़ता है।
गांव का प्राइमरी स्कूल हो चुका बंद
गांव का प्राथमिक विद्यालय इस वर्ष बंद हो चुका है। जो बच्चे हैं उन्हें पढ़ाई के लिए 13 किलोमीटर दूर गणाई गंगोली जाना पड़ रहा है। रोज आवागमन नहीं हो सकने से लोग किराए के कमरों में रहने के लिए मजबूर हैं। इससे खेतीबाड़ी भी छूट गई है।
पैदल रास्ते से गिरकर दो की जा चुकी जान
पभ्या गांव तक जाने के लिए सड़क तो दूर, पैदल रास्ता तक नहीं है। खतरनाक पहाड़ी से होकर लोगों को आवाजाही करनी पड़ती है। चट्टानी मार्ग से गिरकर अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। दर्जनों मवेशी मर चुके हैं। नायल सड़क से मात्र तीन किलोमीटर सड़क बनने पर पभ्या गांव भी यातायात सुविधा से जुड़ जाता लेकिन 2006 से स्वीकृत भुनेड़ा- पभ्या सड़क आज तक नहीं बन पाई है।
जनप्रतिनिधियों का तर्क
भुनेड़ा -पभ्या सड़क पूर्व में स्वीकृत थी। जमीनी विवाद के कारण सड़क नहीं कट पाई। अब भालूगाड़ा से पभ्या के लिए नई डीपीआर बनवाई है। पभ्या गांव तक जल्द ही सड़क बनेगी।
- दीपक मेहरा, विधायक प्रतिनिधि, गणाई गंगोली।