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Pithoragarh News: मोदी ने दिया देश के पहले गांव का नाम, धामी मैराथन कराकर देंगे माणा गांव को नई पहचान
Sun, 25 Oct 2026 11:09 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 25 Oct 2026 11:09 PM IST
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पिथौरागढ़। जिस गांव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के पहले गांव का नाम दिया अब उसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नई पहचान दिलाएंगे। यह संभव होगा उत्तराखंड के पहले गांव के नाम से प्रसिद्ध चमोली गढ़वाल के माणा गांव में 100 माइल्स हिमालय एंड्योरेंस अल्ट्रा मैराथन से।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अक्तूबर 2022 को उत्तराखंड के सीमांत गांव माणा पहुंचे थे जो चमोली जिले का सबसे दूरस्थ गांव है। पीएम मोदी ने तब कहा था कि सीमाओं में बसे गांवों को अंतिम गांव नहीं बल्कि पहले गांव के रूप में पहचान मिलेगी। उन्होंने माणा गांव को उत्तराखंड के पहले गांव के रूप में पहचान दी। बाकायदा सीमा सड़क संगठन ने माणा गांव के प्रवेश द्वार पर देश के अंतिम गांव के स्थान पर पहले गांव का साइन बोर्ड भी लगा दिया। भले ही प्रधानमंत्री मोदी ने माणा गांव को पहले गांव को नाम दिया लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इसे अब नई पहचान दिलाएंगे। पिथौरागढ़ के व्यास घाटी के आदि कैलाश क्षेत्र में हुई अल्ट्रा मैराथन के समापन पर पहुंचे धामी ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि देश के पहले गांव माणा में अगले वर्ष मई के प्रथम सप्ताह में 100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन यानी मैराथन का आयोजन होगा। आदि कैलाश में हुई अल्ट्रा मैराथन में देश भर के धावक हिस्सा ले रहे हैं लेकिन माणा गांव से शुरू होने वाली मैराथन में देश के साथ ही विदेशों के धावक शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने माणा गांव को देश के पहले गांव का नाम दिया है। उन्हीं के नक्शे-कदम पर चलकर उत्तराखंड की सरकार और वह करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर माणा गांव से मैराथन कराकर इसे नई पहचान दिलाएंगे। पिथौरागढ़ के आदि कैलाश क्षेत्र में 15,000 फीट की ऊंचाई पर अल्ट्रा मैराथन आयोजित हुई है। अब देश-विदेश के धावक इससे अधिक ऊंचाई पर होने वाली मैराथन का रोमांच उठा सकेंगे।
बद्रीनाथ और जोशीमठ से होकर औली तक होगी मैराथन
पिथौरागढ़। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि 100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन का 5,600 मीटर यानी 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित माणा गांव से शुरू होगा। बद्रीनाथ और जोशीमठ होते हुए औली तक मैराथन का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से देश-विदेश के धावकों को उत्तराखंड की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, हिमालयी भूगोल और साहसिक खेलों की संभावनाओं से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इससे सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को विस्तार मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अक्तूबर 2022 को उत्तराखंड के सीमांत गांव माणा पहुंचे थे जो चमोली जिले का सबसे दूरस्थ गांव है। पीएम मोदी ने तब कहा था कि सीमाओं में बसे गांवों को अंतिम गांव नहीं बल्कि पहले गांव के रूप में पहचान मिलेगी। उन्होंने माणा गांव को उत्तराखंड के पहले गांव के रूप में पहचान दी। बाकायदा सीमा सड़क संगठन ने माणा गांव के प्रवेश द्वार पर देश के अंतिम गांव के स्थान पर पहले गांव का साइन बोर्ड भी लगा दिया। भले ही प्रधानमंत्री मोदी ने माणा गांव को पहले गांव को नाम दिया लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इसे अब नई पहचान दिलाएंगे। पिथौरागढ़ के व्यास घाटी के आदि कैलाश क्षेत्र में हुई अल्ट्रा मैराथन के समापन पर पहुंचे धामी ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि देश के पहले गांव माणा में अगले वर्ष मई के प्रथम सप्ताह में 100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन यानी मैराथन का आयोजन होगा। आदि कैलाश में हुई अल्ट्रा मैराथन में देश भर के धावक हिस्सा ले रहे हैं लेकिन माणा गांव से शुरू होने वाली मैराथन में देश के साथ ही विदेशों के धावक शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने माणा गांव को देश के पहले गांव का नाम दिया है। उन्हीं के नक्शे-कदम पर चलकर उत्तराखंड की सरकार और वह करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर माणा गांव से मैराथन कराकर इसे नई पहचान दिलाएंगे। पिथौरागढ़ के आदि कैलाश क्षेत्र में 15,000 फीट की ऊंचाई पर अल्ट्रा मैराथन आयोजित हुई है। अब देश-विदेश के धावक इससे अधिक ऊंचाई पर होने वाली मैराथन का रोमांच उठा सकेंगे।
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बद्रीनाथ और जोशीमठ से होकर औली तक होगी मैराथन
पिथौरागढ़। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि 100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन का 5,600 मीटर यानी 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित माणा गांव से शुरू होगा। बद्रीनाथ और जोशीमठ होते हुए औली तक मैराथन का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से देश-विदेश के धावकों को उत्तराखंड की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, हिमालयी भूगोल और साहसिक खेलों की संभावनाओं से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इससे सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को विस्तार मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
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