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Pithoragarh News: कीड़ाजड़ी दोहन को बुग्यालों में गए ग्रामीण परेशान
Sun, 18 Jun 2023 10:56 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 18 Jun 2023 10:56 PM IST
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कीड़ाजड़ी दोहन को मुनस्यारी के नाग्निधुरा पहुंचे ग्रामीण। संवाद
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रही बर्फबारी के चलते कीड़ाजड़ी दोहन के लिए गए ग्रामीण काफी परेशान हैं। अब बरसात और आपदाकाल होने से उच्च हिमालयी क्षेत्रों के बुग्यालों में गए ग्रामीणों को मायूस हो लौटना पड़ेगा।
अमूमन मई में मुनस्यारी के मल्ला जोहार के मिलम, बुरफू, बिल्जू, मर्तोली, लास्पा, मापा, गनघर, खिलांच, टोला, सुमतु, रिलकोट, नहरदेवी, बुगडियार, बुईं पातों, रालम, साइंपोलो, क्वीरीजिमिया, लेंगा, कुल्थम, ढिलम, उछैती, फाफा, बसंतकोट, भटकूड़ा, बादनी, बोना, गोल्फा, तोमिक, रिंगु और चुलकोट के ग्रामीण कीड़ाजड़ी दोहन के लिए नाग्निधुरा के साथ ही अन्य बुग्यालों में जाते हैं। मई प्रथम सप्ताह में ये लोग खाद्यान्न सामग्री उचित स्थान पर पहुंचाते हैं। दूसरे हफ्ते में अधिकांश लोग मय परिवार कीड़ाजड़ी दोहन के लिए जाते हैं।
इस बार उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बारिश और बर्फबारी के चलते ग्रामीण कीड़ाजड़ी दोहन नहीं कर पाए हैं। अब बरसात का सीजन शुरू हो गया है ऐसे में इनको बैरंग लौटने को मजबूर होना पड़ेगा। इससे इनकी आजीविका भी प्रभावित होने की आशंका है। पिछले 20 वर्षों में उक्त गांवों के ग्रामीणों का आर्थिक स्तर कीड़ाजड़ी के चलते काफी सुदृढ़ हुआ है। स्थानीय स्तर पर पिछले वर्ष ठेकेदारों ने लगभग 10 लाख रुपये प्रति किलो के हिसाब से कीड़ाजड़ी ग्रामीणों से खरीदी थी। इस वर्ष क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता है क्योंकि अब तक कीड़ाजड़ी का दोहन नहीं हो पाया है।
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अमूमन मई में मुनस्यारी के मल्ला जोहार के मिलम, बुरफू, बिल्जू, मर्तोली, लास्पा, मापा, गनघर, खिलांच, टोला, सुमतु, रिलकोट, नहरदेवी, बुगडियार, बुईं पातों, रालम, साइंपोलो, क्वीरीजिमिया, लेंगा, कुल्थम, ढिलम, उछैती, फाफा, बसंतकोट, भटकूड़ा, बादनी, बोना, गोल्फा, तोमिक, रिंगु और चुलकोट के ग्रामीण कीड़ाजड़ी दोहन के लिए नाग्निधुरा के साथ ही अन्य बुग्यालों में जाते हैं। मई प्रथम सप्ताह में ये लोग खाद्यान्न सामग्री उचित स्थान पर पहुंचाते हैं। दूसरे हफ्ते में अधिकांश लोग मय परिवार कीड़ाजड़ी दोहन के लिए जाते हैं।
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इस बार उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बारिश और बर्फबारी के चलते ग्रामीण कीड़ाजड़ी दोहन नहीं कर पाए हैं। अब बरसात का सीजन शुरू हो गया है ऐसे में इनको बैरंग लौटने को मजबूर होना पड़ेगा। इससे इनकी आजीविका भी प्रभावित होने की आशंका है। पिछले 20 वर्षों में उक्त गांवों के ग्रामीणों का आर्थिक स्तर कीड़ाजड़ी के चलते काफी सुदृढ़ हुआ है। स्थानीय स्तर पर पिछले वर्ष ठेकेदारों ने लगभग 10 लाख रुपये प्रति किलो के हिसाब से कीड़ाजड़ी ग्रामीणों से खरीदी थी। इस वर्ष क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता है क्योंकि अब तक कीड़ाजड़ी का दोहन नहीं हो पाया है।
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