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Pithoragarh News: बंद सड़कें खोलने में सिस्टम लाचार, ग्रामीणों की दुश्वारियां बरकरार
Sun, 05 Oct 2025 11:08 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 05 Oct 2025 11:08 PM IST
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बोल्डर गिरने से बंद जिमिघाट-बुई सड़क। संवाद
पिथौरागढ़। मानसूनकाल में बंद सड़कों को जल्द खोलने के खूब दावे हुए। आपदाकाल शुरू होने से पहले बंद सड़कों को खोलने की बैठकों में तैयारी भी की गई लेकिन हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। मानसून बीत चुका है और जिले में अब भी 14 सड़कें बंद हैं। इन सड़कों को खोलने में सिस्टम लाचार नजर आ रहा है और हजारों लोग परेशान हैं।
मानसून की शुरुआत में ही मुनस्यारी, धारचूला, डीडीहाट, बिण और मूनाकोट में कई ग्रामीण सड़कें बंद हो गईं थी, जिन्हें अब तक नहीं खोला जा सका है। इन विकासखंडों में कुल 14 ग्रामीण सड़कें बंद हैं। इन सड़कों पर आवाजाही शुरू न होने से बोना, तोमिक, मल्ला भैंसकोट, हुनेरा, देवीसूना, पातों, कटौजिया सहित 50 से अधिक गांवों की 15 हजार से ज्यादा की आबादी परेशान है।
ग्रामीणों को गांवों से बाहर निकलने के लिए पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। बीमारों और गर्भवतियों को भी कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ रहा है। तब जाकर वे प्रसव, इलाज और जांच के लिए अस्पताल पहुंच पा रहे हैं। दो से तीन महीने बाद भी बंद सड़कों को नहीं खोले जाने से सिस्टम के दावे हवाई साबित हो रहे हैं।
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सड़कों के बंद होने की तिथि सही, खोलने की संभावित तारीख खिसक रही
आपदा प्रबंधन विभाग की सूची में हर सड़क के बंद होने की तिथि और समय दर्ज किया जा रहा है। सूची में सड़क के बंद होने की तिथि तो स्थायी है लेकिन इनके खुलने की संभावित तिथि लगातार खिसक रही है। ऐसे में साफ है कि इन सड़कों के जल्द खुलने की उम्मीद कम ही है।
रसोई गैस सिलिंडर और राशन पीठ ढोने की मजबूरी
सड़कों के न खुलने से बड़ी आबादी को दिक्कत झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों के लिए रसोई गैस सिलिंडर, राशन सहित अन्य दैनिक जरूरत के सामान की व्यवस्था करना चुनौती बना हुआ है। ग्रामीण पैदल आवाजाही कर स्थानीय बाजारों और मुख्य सड़कों तक पहुंच रहे हैं। तब जाकर यहां से सिलिंडर, राशन सहित अन्य सामग्री पीठ पर ढोकर घर पहुंचा रहे हैं।
बोले ग्रामीण
दो महीने से सड़क बंद है। हमारा गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। सबसे अधिक दिक्कत बीमार और गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचाने में हो रही है। न जाने सड़क कब खुलेगी। - बाला सिंह, प्रधान, बुई
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मानसूनकाल में बंद सड़कों को जल्द खोलने के सभी दावे हवाई साबित हुए हैं। मानसूनकाल बीतने के बाद भी सड़क न खुलना गंभीर है। वाहनों की आवाजाही थमने से हमें पैदल चलना पड़ रहा है। - लक्ष्मी देवी, बीडीसी सदस्य, पातों
कोट
भारी बारिश से कई सड़कों को काफी नुकसान पहुंचा है। बंद सड़कों को खोलने का कार्य जारी है। जल्द ही जिले की सभी सड़कों पर आवाजाही सुचारु करा दी जाएगी। - भूपेंद्र महर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, पिथौरागढ़
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ये सड़कें हैं बंद
मुनस्यारी-मिलम, पांगला-जयकोट, बगीचा-सिनियाखोला, मुनस्यारी-मिलम-बुई, एलागाड़-जुम्मा, रई-मढ़-रोढ़ी, ड्योड़ा-बारमौ, हुनेरा-आदिचौरा, देवीसूना-खेतारकन्याल, खुमती-कटौजिया, मदकोट-बोना, बलतिर-अल्काथल, अंबेडकर गांव-तोमिक और बलतिर-अल्मियागांव।
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मानसून की शुरुआत में ही मुनस्यारी, धारचूला, डीडीहाट, बिण और मूनाकोट में कई ग्रामीण सड़कें बंद हो गईं थी, जिन्हें अब तक नहीं खोला जा सका है। इन विकासखंडों में कुल 14 ग्रामीण सड़कें बंद हैं। इन सड़कों पर आवाजाही शुरू न होने से बोना, तोमिक, मल्ला भैंसकोट, हुनेरा, देवीसूना, पातों, कटौजिया सहित 50 से अधिक गांवों की 15 हजार से ज्यादा की आबादी परेशान है।
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ग्रामीणों को गांवों से बाहर निकलने के लिए पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। बीमारों और गर्भवतियों को भी कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ रहा है। तब जाकर वे प्रसव, इलाज और जांच के लिए अस्पताल पहुंच पा रहे हैं। दो से तीन महीने बाद भी बंद सड़कों को नहीं खोले जाने से सिस्टम के दावे हवाई साबित हो रहे हैं।
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सड़कों के बंद होने की तिथि सही, खोलने की संभावित तारीख खिसक रही
आपदा प्रबंधन विभाग की सूची में हर सड़क के बंद होने की तिथि और समय दर्ज किया जा रहा है। सूची में सड़क के बंद होने की तिथि तो स्थायी है लेकिन इनके खुलने की संभावित तिथि लगातार खिसक रही है। ऐसे में साफ है कि इन सड़कों के जल्द खुलने की उम्मीद कम ही है।
रसोई गैस सिलिंडर और राशन पीठ ढोने की मजबूरी
सड़कों के न खुलने से बड़ी आबादी को दिक्कत झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों के लिए रसोई गैस सिलिंडर, राशन सहित अन्य दैनिक जरूरत के सामान की व्यवस्था करना चुनौती बना हुआ है। ग्रामीण पैदल आवाजाही कर स्थानीय बाजारों और मुख्य सड़कों तक पहुंच रहे हैं। तब जाकर यहां से सिलिंडर, राशन सहित अन्य सामग्री पीठ पर ढोकर घर पहुंचा रहे हैं।
बोले ग्रामीण
दो महीने से सड़क बंद है। हमारा गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। सबसे अधिक दिक्कत बीमार और गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचाने में हो रही है। न जाने सड़क कब खुलेगी। - बाला सिंह, प्रधान, बुई
मानसूनकाल में बंद सड़कों को जल्द खोलने के सभी दावे हवाई साबित हुए हैं। मानसूनकाल बीतने के बाद भी सड़क न खुलना गंभीर है। वाहनों की आवाजाही थमने से हमें पैदल चलना पड़ रहा है। - लक्ष्मी देवी, बीडीसी सदस्य, पातों
कोट
भारी बारिश से कई सड़कों को काफी नुकसान पहुंचा है। बंद सड़कों को खोलने का कार्य जारी है। जल्द ही जिले की सभी सड़कों पर आवाजाही सुचारु करा दी जाएगी। - भूपेंद्र महर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, पिथौरागढ़
ये सड़कें हैं बंद
मुनस्यारी-मिलम, पांगला-जयकोट, बगीचा-सिनियाखोला, मुनस्यारी-मिलम-बुई, एलागाड़-जुम्मा, रई-मढ़-रोढ़ी, ड्योड़ा-बारमौ, हुनेरा-आदिचौरा, देवीसूना-खेतारकन्याल, खुमती-कटौजिया, मदकोट-बोना, बलतिर-अल्काथल, अंबेडकर गांव-तोमिक और बलतिर-अल्मियागांव।