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दर्द भरी कहानी है, 10 साल पहले स्वीकृत सड़क आज भी गांव आनी है

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 22 Dec 2021 12:12 AM IST
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The road approved 10 years ago still has to come to the village
गिन्नी के ग्रामीणों ने एक सप्ताह पूर्व डोली के सहारे तीन किमी खड़ी चढ़ाई पार कर बुजुर्ग मरीज को ड? - फोटो : PITHORAGARH
नाचनी(पिथौरागढ़)। मुनस्यारी विकासखंड के तल्ला जोहार के गिन्नी ग्राम पंचायत के लोग सड़क नहीं होने से परेशान हैं। पूर्व विधायक निधि से गांव के लिए 10 वर्ष पूर्व सड़क स्वीकृत हुई थी लेकिन आज तक सड़क गांव नहीं पहुंच पाई है। 10 साल बाद भी गांव तक सड़क नहीं पहुंचने से लोग तीन किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर मरीज को डोली से अस्पताल पहुंचाने के लिए मजबूर हैं। अब तक कई मरीजों की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई है। ग्रामीणों ने शीघ्र गांव के लिए सड़क नहीं पहुंचाने पर आगामी चुनावों के बहिष्कार की चेतावनी दी है।
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गिन्नी गांव के लोग लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। इसके बाद भी उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता कमल राजन का कहना है कि सड़क नहीं होने का खामियाजा आपातकाल के दौरान भुगतना पड़ता है। सर्वाधिक दिक्कत बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने में होती है।
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उनका कहना है कि आधुनिक युग में भी गांव के लोगों का डोली सहारा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि 10 साल पूर्व विधायक निधि से गांव के लिए सड़क निर्माण का कार्य शुरू हुआ था लेकिन आज तक गांव के लिए सड़क नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने कहा कि गांव को जाने वाला रास्ता इतना बदहाल है कि लोगों को पैदल चलने में दिक्कतें होती हैं। ग्रामीण राजेंद्र राणा, जगत दानू, प्रमोद मेहरा ने आगामी विस चुनाव तक गांव तक सड़क नहीं पहुंचाने पर आगामी विस चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी दी है। संवाद
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केस- एक
एक सप्ताह पूर्व गांव के बुजुर्ग जय सिंह राणा बीमार पड़ गए थे। उनको ग्रामीणों ने काफी दिक्कतों के बाद तीन किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर अस्पताल पहुंचाया। तीन दिन तक अस्पताल में उपचार के बाद उनका निधन हो गया।
केस-दो
अप्रैल 2021 में गांव के सोबन सिंह अचानक बीमार पड़ गए थे। ग्रामीणों ने आनन-फानन में उन्हें मुख्य सड़क तक पहुंचाने के बाद उन्हें अस्पताल भिजवाया। कुछ दिन उपचार के बाद उनका निधन हो गया।

केस-तीन
20 जून गिन्नी गांव के केशर सिंह बीमार पड़ गए थे। उन्हें भी ग्रामीणों ने डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल तो ग्रामीणों ने उन्हें जैसे-तैसे पहुंचा दिया, लेकिन कुछ समय बाद उनकी भी मौत हो गई।
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