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मुफलिसी में जी रहा देश की आजादी के लिए

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 12 Dec 2019 10:24 PM IST
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Son of fighter
ताम्रपत्र के साथ सेनानी पुत्र फकीर सिंह। - फोटो : PITHORAGARH
देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले स्वाधीनता सेनानी दीवान सिंह ने कभी सोचा नहीं होगा कि उनके बेटे को परिवार पालने के लिए मजदूरी करनी पड़ेगी। आजादी के आंदोलन में आठ माह का कठोर कारावास भुगतने वाले सेनानी का एकलौता बेटा आज परिवार पालने के लिए मजदूरी को विवश है।
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वल्ली अठीगांव के भुनेड़ा निवासी दीवान सिंह का आजादी के आंदोलन में अहम योगदान रहा। सरकारी रिकार्ड के अनुसार वर्ष 1942 के स्वाधीनता आंदोलन में दीवान सिंह की सक्रियता को देखते हुए अंग्रेज हुकूमत ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने आठ माह का कठोर कारावास भोगा। स्वाधीनता आंदोलन में दीवान सिंह के योगदान को देखते हुए 15 अगस्त 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें तामपत्र देकर सम्मानित किया।
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आजादी के इस दीवाने की 10 दिसंबर 1978 को मृत्यु हो गई। सेनानी की मृत्य के बाद उनकी पत्नी विष्णुली देवी को सरकार की ओर से पेंशन मिलती रही। 12 अक्तूबर 1989 को विष्णुली देवी की मृत्यु के बाद यह परिवार सड़क पर आ गया। उस समय उनके बेटे फकीर सिंह मात्र 16 वर्ष के थे। नाते, रिश्तेदारों की मदद से किसी तरह फकीर सिंह ने जीवन की गाड़ी आगे बढ़ाई। रोजगार के लिए उन्होंने कई जगह कोशिश की लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। 46 वर्षीय फकीर सिंह के एक लड़का और 5 लड़कियां हैं। रोजगार का कोई साधन नहीं है। वह खेतीबाड़ी और मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। कहते हैं कि कई बार आर्थिक मदद की गुहार सरकार से लगा चुके हैं, कोई मदद नहीं मिली।
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कुदरत की भी पड़ी है मार
स्वाधीनता सेनानी के पुत्र पर सरकारी उपेक्षा के साथ कुदरत की भी मार पड़ी। इस वर्ष की बरसात में 14 अगस्त को फकीर सिंह का मकान ध्वस्त हो गया। मकान बनाने के लिए आपदा मद से एक लाख रुपये मिले हैं। मकान मरम्मत का कार्य चल रहा है। फकीर सिंह का परिवार गांव में ही किसी अन्य व्यक्ति के वहां रह रहा है।

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सेनानी के पुत्र के माली हालत के बारे में मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी। सेनानी पुत्र को मुख्यमंत्री राहत कोष से वाजिब आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी। - मीना गंगोला विधायक गंगोलीहाट
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