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Pithoragarh News: पहाड़ की बेटी शीतल ने तिब्बत की माउंट चो आयु की फतह
Fri, 11 Oct 2024 10:17 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 11 Oct 2024 10:17 PM IST
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तिब्बत की माउंट चो आयु पर तिरंगा फहराती पिथौरागढ़ की पर्वतारोही शीतल। संवाद
पिथौरागढ़। सीमांत जिले की प्रसिद्ध पर्वतारोही शीतल ने नेपाल और चीन के मध्य तिब्बत स्थित 26,864 फुट ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराकर जिला, प्रदेश के साथ ही देश का नाम रोशन किया है। वह दुनिया की छठी सबसे ऊंची चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचीं हैं।
माउंट चो आयु चोटी फतह करने के लिए शीतल ने पांच सितंबर को अभियान शुरू किया। नेपाल के काठमांडो पहुंचने के बाद उन्होंने चीन के वीजा के लिए आवेदन किया लेकिन उन्हें इसके लिए 20 दिन का इंतजार करना पड़ा। किसी तरह वीजा मिला और शीतल 24 सितंबर को बेस कैंप पहुंचीं। आठ अक्तूबर की सुबह आठ बजे उन्होंने माउंट चो आयु की चोटी फतह कर यहां तिरंगा लहराते हुए देश का मान बढ़ाया। शीतल पूर्व में विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर भी तिरंगा फहरा चुकी हैं। संवाद
एवरेस्ट से 20 किमी दूर है माउंट चो आयु
माउंट चो आयु एवरेस्ट से 20 किमी दूर पश्चिम की ओर महालंगुर हिमालय के खुम्बू उपखंड का सबसे ऊंचा शिखर है। शिखर के दक्षिण में दर्रा है, जो तिब्बत और खुम्बू घाटी के बीच व्यापार का प्रमुख मार्ग है।
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पर्वत सी मजबूत हैं महिलाएं
पिथौरागढ़। प्रसिद्ध पर्वतारोही शीतल ने कहा कि यह जीत उनकी अकेले की नहीं बल्कि देश की हर महिला की है। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं और बेटियां खुद पर विश्वास कर आगे बढ़ें तो हर मुकाम हासिल कर सकती हैं। पहाड़ की बेटियों की ही देख लीजिए दुरूह हालात में भी हर मुश्किल को आसानी से पार कर लेती हैं।
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माउंट चो आयु चोटी फतह करने के लिए शीतल ने पांच सितंबर को अभियान शुरू किया। नेपाल के काठमांडो पहुंचने के बाद उन्होंने चीन के वीजा के लिए आवेदन किया लेकिन उन्हें इसके लिए 20 दिन का इंतजार करना पड़ा। किसी तरह वीजा मिला और शीतल 24 सितंबर को बेस कैंप पहुंचीं। आठ अक्तूबर की सुबह आठ बजे उन्होंने माउंट चो आयु की चोटी फतह कर यहां तिरंगा लहराते हुए देश का मान बढ़ाया। शीतल पूर्व में विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर भी तिरंगा फहरा चुकी हैं। संवाद
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एवरेस्ट से 20 किमी दूर है माउंट चो आयु
माउंट चो आयु एवरेस्ट से 20 किमी दूर पश्चिम की ओर महालंगुर हिमालय के खुम्बू उपखंड का सबसे ऊंचा शिखर है। शिखर के दक्षिण में दर्रा है, जो तिब्बत और खुम्बू घाटी के बीच व्यापार का प्रमुख मार्ग है।
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पर्वत सी मजबूत हैं महिलाएं
पिथौरागढ़। प्रसिद्ध पर्वतारोही शीतल ने कहा कि यह जीत उनकी अकेले की नहीं बल्कि देश की हर महिला की है। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं और बेटियां खुद पर विश्वास कर आगे बढ़ें तो हर मुकाम हासिल कर सकती हैं। पहाड़ की बेटियों की ही देख लीजिए दुरूह हालात में भी हर मुश्किल को आसानी से पार कर लेती हैं।