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Pithoragarh News: दूरस्थ गांव कनार के ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधा से वंचित
Sun, 29 Jun 2025 10:42 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 29 Jun 2025 10:42 PM IST
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पिथौरागढ़। बंगापानी तहसील के दूरस्थ कनार गांव के ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधा से वंचित हैं। दो हजार से अधिक की आबादी वाले इस गांव के ग्रामीणों को बीमार होने पर इलाज के लिए आठ से 16 किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचना पड़ता है, तब जाकर कहीं वे वाहन से अस्पताल पहुंचते हैं। कई बार गंभीर बीमार या घटना में घायल व्यक्ति अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
आजादी के 76 साल बाद भी बंगापानी तहसील क्षेत्र का कनार गांव सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाया है। क्षेत्र के अत्यधिक दुर्गम में बसे इस गांव के ग्रामीणों को आए दिन तमाम दिक्कतों से जूझना पड़ता है। गांव तक पहुंचने के लिए एकमात्र पैदल मार्ग है। बरसात के दिनों इस मार्ग से आवाजाही कठिन हो जाती है। पहाड़ियों से पत्थर गिरने का भय लगातार बना रहता है।
सड़क नहीं हाेने से किसी के बीमार या घायल होने पर डोली से सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। कई गांवों में डोली ढोने के लिए भी लोग नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में जान पर बन आती है। पिछले चार वर्षों में समय पर इलाज नहीं मिलने से चार लोगों की रास्ते में ही मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में एक स्वास्थ्य उप केंद्र खोला जाना चाहिए ताकि आपात स्थिति में प्राथमिक इलाज की सुविधा मिल सके।
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कोट
स्वास्थ्य सेवाओं के हाल बेहाल हैं। शासन-प्रशासन को सीमांत के लोगों की चिंता नहीं है। अगर स्वास्थ्य व्यवस्थाएं होतीं तो शायद लोगों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। - केदार परिहार
शासन-प्रशासन और विभाग से लगातार क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने की मांग करते आए हैं। भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए यहां पर स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए। - नरेंद्र परिहार
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आजादी के 76 साल बाद भी बंगापानी तहसील क्षेत्र का कनार गांव सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाया है। क्षेत्र के अत्यधिक दुर्गम में बसे इस गांव के ग्रामीणों को आए दिन तमाम दिक्कतों से जूझना पड़ता है। गांव तक पहुंचने के लिए एकमात्र पैदल मार्ग है। बरसात के दिनों इस मार्ग से आवाजाही कठिन हो जाती है। पहाड़ियों से पत्थर गिरने का भय लगातार बना रहता है।
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सड़क नहीं हाेने से किसी के बीमार या घायल होने पर डोली से सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। कई गांवों में डोली ढोने के लिए भी लोग नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में जान पर बन आती है। पिछले चार वर्षों में समय पर इलाज नहीं मिलने से चार लोगों की रास्ते में ही मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में एक स्वास्थ्य उप केंद्र खोला जाना चाहिए ताकि आपात स्थिति में प्राथमिक इलाज की सुविधा मिल सके।
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स्वास्थ्य सेवाओं के हाल बेहाल हैं। शासन-प्रशासन को सीमांत के लोगों की चिंता नहीं है। अगर स्वास्थ्य व्यवस्थाएं होतीं तो शायद लोगों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। - केदार परिहार
शासन-प्रशासन और विभाग से लगातार क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने की मांग करते आए हैं। भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए यहां पर स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए। - नरेंद्र परिहार