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सीमांत तक रोड पहुंचने में अभी पांच साल का इंतजार
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
Updated Tue, 31 Jan 2017 10:25 PM IST
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गर्ब्यांग से लखनपुर के लिए रोड की कटिंग करती जेसीबी
- फोटो : अमर उजाला
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सीमांत क्षेत्रों में मोटर रोड की बाट जोह रहे लोगों को अभी पांच वर्ष और इंतजार करना पड़ सकता है। 1991 से शुरू हुए तवाघाट-लिपुलेख मार्ग का निर्माण काम सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने 2012 में पूरा करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन गर्वाधार से लखनपुर तक सात किलोमीटर सड़क काटने में बीआरओ को 20 वर्ष का समय लग गया। अब भी लखनपुर तक सड़क नहीं पहुंच पाई है। अब बीआरओ के अधिकारियों ने यह तय किया है कि तिब्बत बार्डर लिपुलेख तक 2022 में सड़क पहुंचा दी जाएगी।
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राज्य बनने के बाद लगातार उत्तराखंड के तीन मुख्य सचिवों स्व. आरएस टोलिया, सुभाष कुमार और नृप सिंह नपलच्याल ने सड़क निर्माण की धीमी गति पर नाराजगी जताई थी और सामरिक महत्व की सड़क को तत्काल बनाने के निर्देश जारी किए थे, लेकिन बीआरओ पर इन निर्देशों का कोई असर नहीं पड़ा। इस बीच लगातार जनता और शासन के दबाव के बाद बीआरओ ने सड़कों का निर्माण कार्य अलग-अलग टुकड़ों में शुरू तो किया, लेकिन गर्वाधार से लखनपुर तक सात किलोमीटर सड़क अभी नहीं बन पाई है।
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इस समय सड़क निर्माण के कारण कई जगह पैदल रास्ते ध्वस्त हो गए हैं। इस कारण उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों को जाने वालों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। पिछले दिनों गुंजी के दौरे पर आए केंद्रीय गृहराज्य मंत्री किरन रिजिजू के सामने भी लोगों ने सड़क निर्माण में हो रही देरी का मुद्दा उठाया था। साथ ही सड़क का निर्माण कार्य जल्दी पूरा करने की मांग की थी, लेकिन बीआरओ के काम करने की धीमी गति से फिलहाल सड़क का निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद नहीं है।
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कैलाश यात्री इस बार भी पैदल जाएंगे
कैलाश मानसरोवर यात्रियों को इस बार भी नारायणआश्रम से लिपुलेख दर्रे तक पैदल सफर करना पड़ेगा। पिछले साल केएमवीएन ने गुंजी से नाभीढांग तक के हिस्से में यात्रियों को वाहन से लाने का ऐलान किया था, लेकिन यात्रा शुरू होने तक भी गुंजी में हेलीकॉप्टर से वाहन नहीं पहुंचाए जा सके।