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पानी की समस्या का त्वरित निदान जरूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sat, 04 Mar 2017 10:42 PM IST
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पिथौरागढ़ में जल संरक्षण कार्यशाला में मौजूद अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
पानी की रोकथाम, स्रोतों के संरक्षण और पानी को सीवर से प्रदूषित होने से बचाने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। जिलाधिकारी डा. रंजीत कुमार सिन्हा ने जल संरक्षण के उपायों पर चर्चा की। कहा कि भविष्य में पानी की गंभीर समस्या होने को ध्यान में रखते हुए इसके त्वरित निदान की जरूरत है।
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उन्होंने कहा कि स्रोतों के संवर्धन के साथ ही स्रोतों के व्यापक विस्तार के लिए स्रोतों के पास चौड़ी पत्ती वाले पौधों का रोपण करना होगा। जिलाधिकारी ने पौधों के रोपण के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए। कहा कि पानी के स्रोत क्यों सूख रहे हैं, इसका कारण जानना होगा। उन्होंने कहा बारिश के पानी को अधिक से अधिक रोकना होगा। इसके लिए जल संग्रहण टैंक, चाल, खाल और बरसाती टैंकों का निर्माण करना होगा। कहा कि भविष्य में बनने वाली सिंचाई योजनाओं में बरसाती पानी संग्रह करने के लिए टैंकों का निर्माण करना होगा।
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जिलाधिकारी ने कहा कि पिथौरागढ़ नगर के साथ ही अन्य नगरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों में नदी, नाले, गधेरों में सीवर या गंदा पानी अथवा कचरा डाला जा रहा है, उनकी रिपोर्ट एक महीने में प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि वन विभाग और सेना की पर्यावरण बटालियन को पौधरोपण की अनुमति उनसे लेनी होगी, ताकि योजना के अनुसार पौधरोपण किया जा सके। हिमालयन ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट ने गंगोलीहाट, नाचनी, मुनस्यारी के विभिन्न क्षेत्रों में चलाए गए वर्षाजल संग्रह योजनाओं के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला में मुख्य विकास अधिकारी आशीष चौहान, 130 पर्यावरण बटालियन के मेजर बीएस मान, एसएसबी के सहायक सेनानी मोहित वर्मा, प्रभागीय वनाधिकारी विनय भार्गव, पेयजल निगम के एसई एलएम कर्नाटक, आईटीबीपी के उप सेनानी केएस रावत आदि ने विचार रखे।
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