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Pithoragarh News: मलबा हटाने से खैंचवा की ओर मुड़ी रामगंगा, बढ़ा खतरा

Mon, 27 Jul 2026 10:24 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Mon, 27 Jul 2026 10:24 PM IST
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Ramganga diverted towards Khainchwa following debris removal; risk increases
नाचनी(पिथौरागढ़)। हरड़िया के पास रामगंगा में बनी कृत्रिम झील अब आसपास के गांवों के लिए गंभीर खतरा बन गई है। प्रशासन और सिंचाई विभाग की ओर से झील को हटाने की पहल के बीच रामगंगा नदी ने अपना रुख बदलकर बागेश्वर जिले के कालापैर कापड़ी गांव के खैंचवा तोक की तरफ कटाव शुरू कर दिया है जिससे वहां नौ से अधिक मकानों पर ढहने का खतरा मंडराने लगा है। सहमे ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा की गुहार लगाई है।
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हरड़िया नाले के मलबे ने रामगंगा के प्रवाह को रोक दिया तो बीते दिनों वहां एक किलोमीटर से अधिक लंबी कृत्रिम झील बन गई। बमुश्किल मलबा हटाकर मुहाने को खोलकर रामगंगा का प्रवाह पूर्व की तरह करने और खतरा बनी कृत्रिम झील को खत्म करने की पहल शुरू हुई तो एक और नई मुसीबत पैदा हो गई है।
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बागेश्वर जिले के कालापैर कापड़ी के प्रधान नंदन दशौनी, भगवती प्रसाद पाठक, मनोज कोश्यारी सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि मलबा हटाने से रामगंगा ने खैंचवा की तरफ रुख कर लिया है। तीन मीटर चौड़े हिस्से में ही नदी का बहाव होने से किनारे ने नौ घर खतरे में आ गए हैं। यदि नदी का जलस्तर बढ़ा तो ये मकान आपदा की भेंट चढ़ सकते हैं। ऐसे में ग्रामीण दहशत में हैं और घरों के भीतर जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं।
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पोकलेन ऑपरेटरों ने ग्रामीणों पर लगाया अभद्रता का आरोप, काम किया बंद
नदी का रुख गांव की तरफ होने से नाराज बागेश्वर के कालापैर कापड़ी के ग्रामीण हरड़िया के पास पहुंचे। रामगंगा के मुहाने को खोलने में लगी पोकलेन मशीनों के ऑपरेटरों ने ग्रामीणों पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए काम बंद कर दिया। काम बंद होने से खतरे में आए पिथौरागढ़ जिले के भैसखाल, बासगुन के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। भैसखाल के प्रधान बहादुर राम ने सिंचाई विभाग और पुलिस को सूचना दी। थानाध्यक्ष मंगल सिंह ने पोकलेन ऑपरेटरों को समझाते हुए काम शुरू करने को कहा। कालापैर कापड़ी के ग्रामीणों ने हरड़िया नाले का चैनलाइजेशन खैंचवा गांव की तरफ करने पर आपत्ति जताई।
तीन मीटर ऊपर बह रही नदी
नाचनी व्यापार मंडल के अध्यक्ष लाल सिंह कोश्यारी ने कहा कि मलबा भरने से नदी तीन मीटर ऊपर बह रही है। ऐसे में यदि तटबंध टूटे तो नाचनी बाजार को खतरा पैदा होगा। उन्होंने झील खोलने के दौरान निकलने वाले मलबे को डंपरों के जरिये डंपिंग जोन में डालने की मांग की ताकि पिथौरागढ़ और बागेश्वर गांव सुरक्षित बच सकें। संवाद


कोट- बुधवार को उच्चाधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंच रहे हैं। इसके बाद उचित निर्णय लिया जाएगा। पिथौरागढ़ और बागेश्वर के गांवों की लगातार निगरानी की जा रही है।-संदीप यादव, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग, मुनस्यारी
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