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लगने लगी कयासबाजियां दावेदार बदलेंगे या पुराने चेहरों पर ही लगेगा दांव
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Politics in Pithauragarh
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पिथौरागढ़। चुनावी आहट के साथ ही पिथौरागढ़ जिले की चार विधानसभा सीटों पर दावेदारों के बारे में चर्चा और कयासबाजियां तेज हो गईं हैं। हालांकि अभी टिकट के लिए प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस के दावेदारों की स्थिति साफ है लेकिन कुछ सीटों पर उम्मीदवार बदलने की चर्चाओं के बीच लोगों में संभावित दावेदारों को लेकर नई जिज्ञासा पनपने लगी है कि राजनीतिक दल आगामी चुनाव में दावेदार बदलेंगे या फिर पुराने चेहरों पर ही दांव खेला जाएगा।
वर्ष 2017 के चुनाव में पिथौरागढ़ सीट पर भाजपा के प्रकाश पंत और कांग्रेस के मयूख महर के बीच सीधी टक्कर हुई थी। तब भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में चुनावी सभा को संबोधित करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पिथौरागढ़ आए थे। पंत ने महर को 2694 मतों से हराया था। प्रकाश के निधन के बाद 2019 में उपचुुनाव हुए, जिसमें भाजपा की ओर से प्रकाश पंत की पत्नी चंद्रा पंत को टिकट दिया गया जबकि कांग्रेस से मयूख महर के उपचुनाव में उतरने से इनकार करने के बाद अंजू लुंठी को उम्मीदवार बनाया गया।
जनता ने चंद्रा के पक्ष में जनादेश देकर 3267 मतों के अंतर से विजयी बनाया। आगामी चुनावों में सीटिंग विधायक होने के नाते भाजपा से उन्हीं को प्रबल दावेदार माना जा रहा है जबकि कांग्रेस से मयूख महर का नाम तय माना जा रहा है। अपने भ्रमण के तहत पूर्व सीएम हरीश रावत मयूख महर को चारों सीटों को जिताने की जिम्मेदारी भी सौंप गए हैं।
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डीडीहाट सीट से 2017 में भाजपा से विशन सिंह चुफाल ने लगातार पांचवीं बार जीत दर्ज की थी। उन्होंने निर्दलीय मैदान में उतरे किशन भंडारी को 2368 मतों के अंतर से हराया था। कांग्रेस के प्रदीप पाल तीसरे स्थान पर रहे थे। लगातार पांच बार जीतकर विधानसभा पहुंचने वाले चुफाल अब कैबिनेट मंत्री हैं। वह पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। चुफाल के पास लंबा राजनीतिक अनुभव है।
ऐसे में यह माना जा रहा है कि इस बार भी भाजपा चुफाल पर ही दांव लगाएगी। डीडीहाट सीट से ब्राह्मण प्रत्याशी पर दांव खेलने वाली कांग्रेस ने पिछले चुनावों में बदलाव कर प्रदीप पाल को प्रत्याशी बनाया था। तब 14470 मत पाने वाले पाल आगामी चुनावों के लिए पहले से ही सक्रिय हैं। कुछ दिन पूर्व दौरे पर आए पूर्व सीएम हरीश रावत के स्वागत में देवलथल में आयोजित सभा में वह बड़ी भीड़ जुटाने में भी सफल रहे। ऐसे में कांग्रेस से संभावित अन्य उम्मीदवारों की फेहरिस्त में प्रदीप को ही मजबूत दावेदार माना जा रहा है। इस सीट पर पिछले चुनावों में कड़ा त्रिकोणीय मुकाबला बनाने वाले निर्दलीय किशन भंडारी की रणनीति क्या रहेगी यह भी काफी दिलचस्प होगा।
गंगोलीहाट सीट पर 2017 के चुनाव में भाजपा ने मीना गंगोला को मैदान में उतारा था। तब मीना ने कांग्रेस के नारायण राम आर्य को 805 मतों के अंतर से हराया था। सीटिंग विधायक होने के नाते इस बार भी मीना को ही भाजपा से टिकट की प्रबल दावेदार समझा जा रहा है। कांग्रेस से वरिष्ठ नेता नारायण को दावेदारों में मजबूत माना जा रहा है। हालांकि पिछले चुनावों में टिकट न मिलने से नाराज खजान गुड्डू ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में 10 हजार मत पाए थे।
जिले की धारचूला विधानसभा सीट पर लगातार 10 सालों से कांग्रेस का कब्जा है।
यहां से कांग्रेस के युवा नेता हरीश धामी ने 2017 के चुनावों में भाजपा के वीरेंद्र पाल को 3085 मतों से हराया था। हरीश धामी पूर्व सीएम हरीश रावत के बेहद करीबी माने जाते हैं। यह तय माना जा रहा है कि 2022 में भी इस सीट से धामी ही दावेदार होंगे। दूसरी ओर इस सीट पर भाजपा से पिछला चुनाव वीरेंद्र पाल (स्वामी वीरेंद्रानंद) ने लड़ा था। इस बार भी उन्हीं को भाजपा से प्रबल दावेदार माना जा रहा है। हालांकि पिछले दिनों प्रदेश स्तर पर भाजपा में कमजोर दावेदारों को बदलने की चर्चाओं के बीच लोगों में भी संभावित प्रत्याशियों के प्रति जिज्ञासा बढ़ने लगी है लेकिन भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र वल्दिया का कहना है कि जिले की चारों सीटों में से किसी भी सीट पर अभी कोई दावेदारी नहीं हुई है।
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वर्ष 2017 के चुनाव में पिथौरागढ़ सीट पर भाजपा के प्रकाश पंत और कांग्रेस के मयूख महर के बीच सीधी टक्कर हुई थी। तब भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में चुनावी सभा को संबोधित करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पिथौरागढ़ आए थे। पंत ने महर को 2694 मतों से हराया था। प्रकाश के निधन के बाद 2019 में उपचुुनाव हुए, जिसमें भाजपा की ओर से प्रकाश पंत की पत्नी चंद्रा पंत को टिकट दिया गया जबकि कांग्रेस से मयूख महर के उपचुनाव में उतरने से इनकार करने के बाद अंजू लुंठी को उम्मीदवार बनाया गया।
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जनता ने चंद्रा के पक्ष में जनादेश देकर 3267 मतों के अंतर से विजयी बनाया। आगामी चुनावों में सीटिंग विधायक होने के नाते भाजपा से उन्हीं को प्रबल दावेदार माना जा रहा है जबकि कांग्रेस से मयूख महर का नाम तय माना जा रहा है। अपने भ्रमण के तहत पूर्व सीएम हरीश रावत मयूख महर को चारों सीटों को जिताने की जिम्मेदारी भी सौंप गए हैं।
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डीडीहाट सीट से 2017 में भाजपा से विशन सिंह चुफाल ने लगातार पांचवीं बार जीत दर्ज की थी। उन्होंने निर्दलीय मैदान में उतरे किशन भंडारी को 2368 मतों के अंतर से हराया था। कांग्रेस के प्रदीप पाल तीसरे स्थान पर रहे थे। लगातार पांच बार जीतकर विधानसभा पहुंचने वाले चुफाल अब कैबिनेट मंत्री हैं। वह पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। चुफाल के पास लंबा राजनीतिक अनुभव है।
ऐसे में यह माना जा रहा है कि इस बार भी भाजपा चुफाल पर ही दांव लगाएगी। डीडीहाट सीट से ब्राह्मण प्रत्याशी पर दांव खेलने वाली कांग्रेस ने पिछले चुनावों में बदलाव कर प्रदीप पाल को प्रत्याशी बनाया था। तब 14470 मत पाने वाले पाल आगामी चुनावों के लिए पहले से ही सक्रिय हैं। कुछ दिन पूर्व दौरे पर आए पूर्व सीएम हरीश रावत के स्वागत में देवलथल में आयोजित सभा में वह बड़ी भीड़ जुटाने में भी सफल रहे। ऐसे में कांग्रेस से संभावित अन्य उम्मीदवारों की फेहरिस्त में प्रदीप को ही मजबूत दावेदार माना जा रहा है। इस सीट पर पिछले चुनावों में कड़ा त्रिकोणीय मुकाबला बनाने वाले निर्दलीय किशन भंडारी की रणनीति क्या रहेगी यह भी काफी दिलचस्प होगा।
गंगोलीहाट सीट पर 2017 के चुनाव में भाजपा ने मीना गंगोला को मैदान में उतारा था। तब मीना ने कांग्रेस के नारायण राम आर्य को 805 मतों के अंतर से हराया था। सीटिंग विधायक होने के नाते इस बार भी मीना को ही भाजपा से टिकट की प्रबल दावेदार समझा जा रहा है। कांग्रेस से वरिष्ठ नेता नारायण को दावेदारों में मजबूत माना जा रहा है। हालांकि पिछले चुनावों में टिकट न मिलने से नाराज खजान गुड्डू ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में 10 हजार मत पाए थे।
जिले की धारचूला विधानसभा सीट पर लगातार 10 सालों से कांग्रेस का कब्जा है।
यहां से कांग्रेस के युवा नेता हरीश धामी ने 2017 के चुनावों में भाजपा के वीरेंद्र पाल को 3085 मतों से हराया था। हरीश धामी पूर्व सीएम हरीश रावत के बेहद करीबी माने जाते हैं। यह तय माना जा रहा है कि 2022 में भी इस सीट से धामी ही दावेदार होंगे। दूसरी ओर इस सीट पर भाजपा से पिछला चुनाव वीरेंद्र पाल (स्वामी वीरेंद्रानंद) ने लड़ा था। इस बार भी उन्हीं को भाजपा से प्रबल दावेदार माना जा रहा है। हालांकि पिछले दिनों प्रदेश स्तर पर भाजपा में कमजोर दावेदारों को बदलने की चर्चाओं के बीच लोगों में भी संभावित प्रत्याशियों के प्रति जिज्ञासा बढ़ने लगी है लेकिन भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र वल्दिया का कहना है कि जिले की चारों सीटों में से किसी भी सीट पर अभी कोई दावेदारी नहीं हुई है।