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पीएम आवास के लिए 217-18 के बाद से नहीं मिला धन
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पिथौरागढ़। जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 50 से अधिक आवेदन मिले थे। सीटी मिशन मैनेजर महेंद्र बिष्ट ने बताया कि वर्ष 2017-18 पिथौरागढ़ में पीएम आवास के लिए 56.80 लाख की राशि मिली थी। इससे पिथौरागढ़ 34 में से 14 मकानों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। अन्य निर्माणाधीन हैं। गंगोलीहाट में दो, डीडीहाट, बेड़ीनाग में एक-एक आवास का काम पूरा हो चुका है। डीडीहाट में 200 लोगों ने आवास के लिए आवेदन किए थे, लेकिन तीन लोग पात्र पाए गए। धन न मिलने के कारण धारचूला में सात पीएम आवास का काम शुरू नहीं हुआ है। वहीं 2018-19 में 75 और 2019-2020 में 10 लोगों ने पीएम आवास के लिए आवेदन दिया है। पीएम आवास के लिए डेढ़ लाख केंद्र और 50 हजार रुपये राज्य सरकार देती है। उन्होंने बताया कि लाभार्थी स्वयं ही भवन का निर्माण करता है। आवास के लिए चार किश्तों में भुगतान किया जाता है। उन्होंने बताया कि धन मिलने के बाद प्राप्त आवेदनों की जांच की जाएगी। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आपदा ने 100 से अधिक परिवारों को कर दिया आवासहीन
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। इस साल आई आपदा ने मुनस्यारी, बंगापानी और धारचूला तहसीलों के 100 से अधिक परिवारों को आवासहीन बना दिया है। यह परिवार सरकारी भवनों या फिर टेंटों में दिन बिता रहे हैं।
जून-जुलाई में आई आपदा ने मुनस्यारी के धापा और जोशा गांवों में 28 परिवार बेघर कर दिए। बंगापानी तहसील के टांगा, मोरी, लुमती और बरम क्षेत्र में 55 से अधिक परिवारों के मकान या जमींदोज हो गए या फिर खतरे में जद में आ गए हैं। जो भवन बचे हैं उन्हें भी सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। धारचूला तहसील में भी 15 से अधिक परिवार खतरे में आने के कारण सरकारी भवनों में शरण लेनी पड़ी है। आपदा के कारण मुनस्यारी, बंगापानी और धारचूला तहसीलों में आवासहीन हो गए 100 से अधिक परिवार चिंतित हैं। जोशा गांव के टेंट में दिन गुजार रहे हयात सिंह ने कहा कि सरकार को आपदा से बेघर हुए लोगों के लिए आवास की व्यवस्था करनी चाहिए। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर इन परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने के लिए जिला प्रशासन स्थल चयन कर रहा है। एडीएम आरडी पालीवाल का कहना है कि आपदा के कारण आवासहीन हुए लोगों को जल्दी पुनर्वासित किया जाएगा।
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आपदा में घर टूट गया था। चार माह से सरकारी स्कूल भवन में शरण ली है। अभी पुनर्वास को लेकर केवल आश्वासन ही मिले हैं। जाड़ा शुरू हो गया है। सर्दी कैसे कटेगी इसकी चिंता बढ़ती जा रही है। शीघ्र उन्हें सुरक्षित स्थानों पर बसाया जाना चाहिए
-डौली देवी, निवासी धापा।
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आपदा ने 100 से अधिक परिवारों को कर दिया आवासहीन
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। इस साल आई आपदा ने मुनस्यारी, बंगापानी और धारचूला तहसीलों के 100 से अधिक परिवारों को आवासहीन बना दिया है। यह परिवार सरकारी भवनों या फिर टेंटों में दिन बिता रहे हैं।
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जून-जुलाई में आई आपदा ने मुनस्यारी के धापा और जोशा गांवों में 28 परिवार बेघर कर दिए। बंगापानी तहसील के टांगा, मोरी, लुमती और बरम क्षेत्र में 55 से अधिक परिवारों के मकान या जमींदोज हो गए या फिर खतरे में जद में आ गए हैं। जो भवन बचे हैं उन्हें भी सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। धारचूला तहसील में भी 15 से अधिक परिवार खतरे में आने के कारण सरकारी भवनों में शरण लेनी पड़ी है। आपदा के कारण मुनस्यारी, बंगापानी और धारचूला तहसीलों में आवासहीन हो गए 100 से अधिक परिवार चिंतित हैं। जोशा गांव के टेंट में दिन गुजार रहे हयात सिंह ने कहा कि सरकार को आपदा से बेघर हुए लोगों के लिए आवास की व्यवस्था करनी चाहिए। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर इन परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने के लिए जिला प्रशासन स्थल चयन कर रहा है। एडीएम आरडी पालीवाल का कहना है कि आपदा के कारण आवासहीन हुए लोगों को जल्दी पुनर्वासित किया जाएगा।
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आपदा में घर टूट गया था। चार माह से सरकारी स्कूल भवन में शरण ली है। अभी पुनर्वास को लेकर केवल आश्वासन ही मिले हैं। जाड़ा शुरू हो गया है। सर्दी कैसे कटेगी इसकी चिंता बढ़ती जा रही है। शीघ्र उन्हें सुरक्षित स्थानों पर बसाया जाना चाहिए
-डौली देवी, निवासी धापा।