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पिथौरागढ़ के सरकारी दफ्तरों की बदल गई फिजां
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Mon, 19 Dec 2016 10:52 PM IST
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पिथौरागढ़ डीएम आफिस में जग और गिलासों में लाया गया पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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जिलाधिकारी डॉ. रंजीत सिन्हा ने नौ दिसंबर को आदेश जारी किया था कि अब किसी भी सरकारी कार्यालय में और सरकारी समारोह में प्लास्टिक की बोतलों में पानी नहीं आएगा। यही नहीं किसी भी बैठक में मिनरल वाटर की प्लास्टिक की बोतलों को प्रतिबंधित करने के आदेश भी उन्होंने दिए थे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।
अब दफ्तरों में मिनरल वाटर की बोतल के बजाए जग और गिलास से पानी सर्व किया जाता है। डीएम ने बताया कि वह तो खुद घर से पीने के लिए पानी लेकर आते हैं।
इस आदेश को जारी करने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत का 17 दिसंबर को डीडीहाट और बुंगाछीना के दौरे पर आए। उनके कार्यक्रम में भी पहला बदलाव यही देखा गया कि मिनरल वाटर की बोतल कम से कम मेज पर नहीं थी। उसी दौरान जीआईसी में लगे दो दिवसीय कृषि मेले में भी कहीं पर मिनरल वाटर की बोतल नजर नहीं आई। डीएम ने कहा कि कलक्ट्रेट के सभी सेक्सनों, विकास भवन के सभी दफ्तरों में प्लास्टिक की बोतलों में पानी नहीं आ रहा है।
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उन्होंने समाज के अन्य लोगों, निजी क्षेत्र के संस्थानों से अपील की है कि इस अच्छी परंपरा को शुरू करें और प्लास्टिक की बोतलों में पानी पीने वाली आदत खुद हटाएं। प्लास्टिक की बोतलों को बाद में लोग इधर, उधर फेंक देते हैं। इनसे गंदगी ज्यादा फैलती है। प्लास्टिक और पॉलिथीन से होने वाले नुकसान के प्रति लोगों को खुद सजग होने की जरूरत है। सोमवार को डीएम के कार्यालय में हुई एक मीटिंग के दौरान भी जग और गिलास में ही पानी लाया गया। अब देखना है कि लोग कब तक इस अच्छाई को अपनाते हैं।
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अब दफ्तरों में मिनरल वाटर की बोतल के बजाए जग और गिलास से पानी सर्व किया जाता है। डीएम ने बताया कि वह तो खुद घर से पीने के लिए पानी लेकर आते हैं।
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इस आदेश को जारी करने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत का 17 दिसंबर को डीडीहाट और बुंगाछीना के दौरे पर आए। उनके कार्यक्रम में भी पहला बदलाव यही देखा गया कि मिनरल वाटर की बोतल कम से कम मेज पर नहीं थी। उसी दौरान जीआईसी में लगे दो दिवसीय कृषि मेले में भी कहीं पर मिनरल वाटर की बोतल नजर नहीं आई। डीएम ने कहा कि कलक्ट्रेट के सभी सेक्सनों, विकास भवन के सभी दफ्तरों में प्लास्टिक की बोतलों में पानी नहीं आ रहा है।
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उन्होंने समाज के अन्य लोगों, निजी क्षेत्र के संस्थानों से अपील की है कि इस अच्छी परंपरा को शुरू करें और प्लास्टिक की बोतलों में पानी पीने वाली आदत खुद हटाएं। प्लास्टिक की बोतलों को बाद में लोग इधर, उधर फेंक देते हैं। इनसे गंदगी ज्यादा फैलती है। प्लास्टिक और पॉलिथीन से होने वाले नुकसान के प्रति लोगों को खुद सजग होने की जरूरत है। सोमवार को डीएम के कार्यालय में हुई एक मीटिंग के दौरान भी जग और गिलास में ही पानी लाया गया। अब देखना है कि लोग कब तक इस अच्छाई को अपनाते हैं।