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Pithoragarh News: इलाज के लिए 100 किमी सफर तय करते हैं 26 से अधिक गांवों के लोग
Wed, 28 May 2025 10:36 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 28 May 2025 10:36 PM IST
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बंगापानी (पिथौरागढ़)। आपदाग्रस्त तहसील क्षेत्र बंगापानी में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। अस्पताल के नाम पर मवानी दवानी और बरम में आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। सुविधाओं के अभाव में इन अस्पतालों में भी इलाज नहीं मिल पाता है। ऐसे में 26 से अधिक गांवों के लोगों को इलाज के लिए 100 किलोमीटर का सफर तय कर पिथौरागढ़ पहुंचना पड़ता है।
बंगापानी तहसील मुख्यालय से करीब पांच किमी की दूरी पर मवानी दवानी और 15 किलोमीटर दूर बरम में आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। इन अस्पतालों में जरूरी आयुर्वेदिक दवाइयां तो हैं लेकिन जांच के नाम पर कुछ नहीं होता है। बंगापानी समेत मवानी दवानी, माणी धामी, धामी गांव, मदरमा, सेलमाली, दाखिम, आलम दारमा, सेरा, शिलिंग, सिरतोला, छोरीबगड़, बांसबगड़, मोरी, लुमती, चामी, बरम समेत 26 से अधिक गांवों की आबादी इन दोनों अस्पतालों पर निर्भर है।
सड़क सुविधा से वंटित कई गांवों के लोग भी इलाज के लिए पैदल अस्पताल पहुंचते हैं। बिना जांच के अस्पताल पहुंचे ज्यादातर मरीज दवा लेकर घर चले जाते हैं। अधिक परेशानी होने पर 100 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल पहुंचना पड़ता है। संवाद
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क्षेत्र में नहीं है एलोपैथिक अस्पताल
तहसील क्षेत्र में एलोपैथिक अस्पताल नहीं होने से अधिकतर मामलों में यहां से मरीजों को जांच और इलाज के लिए 36 किमी दूर मुनस्यारी, 60 किमी दूर धारचूला या फिर 100 किमी दूर जिला अस्पताल ही जाना पड़ता है। क्षेत्रवासियों के मुताबिक स्कूली बच्चों के आइकार्ड से लेकर कई जगह पर ब्लड ग्रुप का उल्लेख करना होता है। ब्लड ग्रुप की जांच हो या फिर किसी तरह की बीमारी होने पर रक्त परीक्षण करना हो तो मुनस्यारी, धारचूला या फिर पिथौरागढ़ ही जाना होता है। संवाद
कोट
स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है कि प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिले। बंगापानी तहसील में अस्पताल खोलने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसे स्वीकृति मिलते ही मानकों के अनुरूप पीएचसी खोला जाएगा। - डॉ. एसएस नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़।
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बंगापानी तहसील मुख्यालय से करीब पांच किमी की दूरी पर मवानी दवानी और 15 किलोमीटर दूर बरम में आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। इन अस्पतालों में जरूरी आयुर्वेदिक दवाइयां तो हैं लेकिन जांच के नाम पर कुछ नहीं होता है। बंगापानी समेत मवानी दवानी, माणी धामी, धामी गांव, मदरमा, सेलमाली, दाखिम, आलम दारमा, सेरा, शिलिंग, सिरतोला, छोरीबगड़, बांसबगड़, मोरी, लुमती, चामी, बरम समेत 26 से अधिक गांवों की आबादी इन दोनों अस्पतालों पर निर्भर है।
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सड़क सुविधा से वंटित कई गांवों के लोग भी इलाज के लिए पैदल अस्पताल पहुंचते हैं। बिना जांच के अस्पताल पहुंचे ज्यादातर मरीज दवा लेकर घर चले जाते हैं। अधिक परेशानी होने पर 100 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल पहुंचना पड़ता है। संवाद
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क्षेत्र में नहीं है एलोपैथिक अस्पताल
तहसील क्षेत्र में एलोपैथिक अस्पताल नहीं होने से अधिकतर मामलों में यहां से मरीजों को जांच और इलाज के लिए 36 किमी दूर मुनस्यारी, 60 किमी दूर धारचूला या फिर 100 किमी दूर जिला अस्पताल ही जाना पड़ता है। क्षेत्रवासियों के मुताबिक स्कूली बच्चों के आइकार्ड से लेकर कई जगह पर ब्लड ग्रुप का उल्लेख करना होता है। ब्लड ग्रुप की जांच हो या फिर किसी तरह की बीमारी होने पर रक्त परीक्षण करना हो तो मुनस्यारी, धारचूला या फिर पिथौरागढ़ ही जाना होता है। संवाद
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स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है कि प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिले। बंगापानी तहसील में अस्पताल खोलने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसे स्वीकृति मिलते ही मानकों के अनुरूप पीएचसी खोला जाएगा। - डॉ. एसएस नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़।