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नामिक के ग्रामीणों ने पिथौरागढ़ जिले से हटकर बागेश्वर में शामिल होने की जताई इच्छा
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पिथौरागढ़ जिले के अंतिम गांव नामिक में आयोजित चौपाल में समस्याओं को लेकर चर्चा करते ग्रामीण।संव
- फोटो : PITHORAGARH
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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले की सीमा पर बसे ग्राम पंचायत नामिक के ग्रामीणों ने उपेक्षा से आहत होकर बागेश्वर में शामिल होने की इच्छा जाहिर की है। उनका कहना है कि अगली ग्राम पंचायत की खुली बैठक में इसके लिए प्रस्ताव पास कर राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
बुधवार को जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया की अध्यक्षता में नामिक गांव में चौपाल लगाई गई। ग्रामीणों ने कहा कि 24 फरवरी 1960 को पिथौरागढ़ जिले की स्थापना के समय गांव को अल्मोड़ा से हटाकर पिथौरागढ़ में शामिल कर दिया गया था। तभी से गांव के साथ सौतेला व्यवहार शुरू हो गया। नामिक गांव में सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिलता। चौपाल में भारतीय स्टेट बैंक के सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रबंधक बहादुर सिंह धर्मसक्तू, क्षेत्र पंचायत सदस्य दमयंती देवी, पूर्व प्रधान खुशाल सिंह, भगत राम, सरपंच प्रताप सिंह, मोहन राम, प्रवीण सिंह, लछीमा देवी, भानुली देवी, मोहन सिंह, महेंद्र सिंह, डिगर सिंह, बहादुर सिंह कन्यारी, कमला देवी, गुमानी राम, लाल सिंह, पान सिंह, खड़क सिंह, अनी राम सहित कई लोग मौजूद रहे।
ग्रामीणों का तर्क
-थल-मुनस्यारी सड़क पर पड़ने वाले बला नामक स्थान से 27 किमी की कठिन पैदल यात्रा के बाद नामिक गांव पहुंचते हैं जबकि बागेश्वर जिले में शामा-गोगिना सड़क मार्ग में गोगिना से छह किलोमीटर की पैदल दूरी तय करने के बाद नामिक गांव आ जाता है।
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-ग्राम प्रधान तुलसी जैम्याल ने कहा कि होकरा से नामिक के लिए बन रही सड़क का निर्माण कार्य कछुआ चाल से चल रहा है। गोगिना से सड़क मार्ग दो भाग में बनने हैं। एक पिथौरागढ़ और एक बागेश्वर जिले में। पिथौरागढ़ में तो बजट और निविदा दोनों स्वीकृत हो गई है। बागेश्वर जिले की फाइल पता नहीं कहा धूल खा रही है।
-ग्रामीणों ने अनुसार पिथौरागढ़ वाले अपना नहीं मानते। बागेश्वर वाले दूसरे जिले का मानते हैं।
बोर्ड टंग गया, उप स्वास्थ्य केंद्र का पता नहीं
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। ग्रामीणों ने कहा कि वर्ष 2015 में उप स्वास्थ्य केंद्र का बोर्ड टांगने के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक देहरादून नामिक तो आए, लेकिन सात साल बाद भी उप स्वास्थ्य केंद्र में न एएनएम आई न ही कोई फार्मासिस्ट। राजकीय प्राथमिक विद्यालय में एक ही शिक्षक तैनात है। राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में गणितम, हिंदी के शिक्षक नहीं हैं। प्रधानाचार्य तो स्थापना काल से नौ वर्षों के भीतर एक बार भी यहां तैनात नहीं हुआ है। आलू की खेती में बीमारी लगी हुई है। सेब के पेड़ दूसरे साल सूख रहे हैं। चौपाल में ग्रामीणों ने कहा कि पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं है, लेकिन पैदल यात्रा के लिए भी मार्ग नहीं है।
जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत की बैठक में इन सवालों को प्रमुखता से उठाएंगे। सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया तो मैं नामिक के ग्रामीणों के साथ भूख हड़ताल और सत्याग्रह में बैठूंगा।
-जगत मर्तोलिया, जिला पंचायत सदस्य।
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बुधवार को जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया की अध्यक्षता में नामिक गांव में चौपाल लगाई गई। ग्रामीणों ने कहा कि 24 फरवरी 1960 को पिथौरागढ़ जिले की स्थापना के समय गांव को अल्मोड़ा से हटाकर पिथौरागढ़ में शामिल कर दिया गया था। तभी से गांव के साथ सौतेला व्यवहार शुरू हो गया। नामिक गांव में सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिलता। चौपाल में भारतीय स्टेट बैंक के सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रबंधक बहादुर सिंह धर्मसक्तू, क्षेत्र पंचायत सदस्य दमयंती देवी, पूर्व प्रधान खुशाल सिंह, भगत राम, सरपंच प्रताप सिंह, मोहन राम, प्रवीण सिंह, लछीमा देवी, भानुली देवी, मोहन सिंह, महेंद्र सिंह, डिगर सिंह, बहादुर सिंह कन्यारी, कमला देवी, गुमानी राम, लाल सिंह, पान सिंह, खड़क सिंह, अनी राम सहित कई लोग मौजूद रहे।
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ग्रामीणों का तर्क
-थल-मुनस्यारी सड़क पर पड़ने वाले बला नामक स्थान से 27 किमी की कठिन पैदल यात्रा के बाद नामिक गांव पहुंचते हैं जबकि बागेश्वर जिले में शामा-गोगिना सड़क मार्ग में गोगिना से छह किलोमीटर की पैदल दूरी तय करने के बाद नामिक गांव आ जाता है।
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-ग्राम प्रधान तुलसी जैम्याल ने कहा कि होकरा से नामिक के लिए बन रही सड़क का निर्माण कार्य कछुआ चाल से चल रहा है। गोगिना से सड़क मार्ग दो भाग में बनने हैं। एक पिथौरागढ़ और एक बागेश्वर जिले में। पिथौरागढ़ में तो बजट और निविदा दोनों स्वीकृत हो गई है। बागेश्वर जिले की फाइल पता नहीं कहा धूल खा रही है।
-ग्रामीणों ने अनुसार पिथौरागढ़ वाले अपना नहीं मानते। बागेश्वर वाले दूसरे जिले का मानते हैं।
बोर्ड टंग गया, उप स्वास्थ्य केंद्र का पता नहीं
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। ग्रामीणों ने कहा कि वर्ष 2015 में उप स्वास्थ्य केंद्र का बोर्ड टांगने के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक देहरादून नामिक तो आए, लेकिन सात साल बाद भी उप स्वास्थ्य केंद्र में न एएनएम आई न ही कोई फार्मासिस्ट। राजकीय प्राथमिक विद्यालय में एक ही शिक्षक तैनात है। राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में गणितम, हिंदी के शिक्षक नहीं हैं। प्रधानाचार्य तो स्थापना काल से नौ वर्षों के भीतर एक बार भी यहां तैनात नहीं हुआ है। आलू की खेती में बीमारी लगी हुई है। सेब के पेड़ दूसरे साल सूख रहे हैं। चौपाल में ग्रामीणों ने कहा कि पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं है, लेकिन पैदल यात्रा के लिए भी मार्ग नहीं है।
जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत की बैठक में इन सवालों को प्रमुखता से उठाएंगे। सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया तो मैं नामिक के ग्रामीणों के साथ भूख हड़ताल और सत्याग्रह में बैठूंगा।
-जगत मर्तोलिया, जिला पंचायत सदस्य।